साक्षी भाव का ध्यान


“…लेकिन मैं ठीक होना ही नहीं चाहता तो कोई भी विधि काम नहीं करेगी | मैं कई ऐसी चीजें जानता हूँ जिनसे में अपना उपचार कर सकता हूँ, लेकिन कुछ नहीं कर रहा हूँ |

 कारण है कि मैं इस समय सभी प्रकार के जिम्मेदारियों से मुक्त हूँ | न मुझे किसी से मिलना है और न ही कोई मुझसे मिलने आने वाला है | तो यहाँ मैं अपने ऊपर ही प्रयोग कर सकता हूँ | मैं जान सकता हूँ वे बहुत सी बातें जो शायद पहले यहाँ किसी ने जानने की कोशिश नहीं की |

 ओशो ने कहा था कि जब दुःख तुम्हें घेर लें, उदासी के गहरे अंधेरों में सामने लगो तब तुम साक्षी हो जाओ | भागो मत, बचने के उपाय मत करो, उनका स्वागत करो, एक आत्मीय मित्र की तरह उन्हें गले लगाओ | आपका अपना पन, आत्मीयता उन्हें रास न आएगी क्योंकि उन्होंने तो हमेशा लोगों को दूर भागते हुए देखा है और आज आप उनका स्वागत कर रहे हो | उनको यह आत्मीयता रास न आयगी और वे भाग खड़े होंगे | तो गहरे में डूब जाओ, जानने और समझने की कोशिश करो कि दुःख और उदासी हैं क्या ? उनका आकार-प्रकार और व्यवहार क्या है…?

 तो मैं वही ध्यान कर रहा हूँ | साक्षी भाव का ध्यान |” –विशुद्ध चैतन्य

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ग,के,सिंह
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ग,के,सिंह

ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित होकर ईश्वर अंश जीव परिवार समाज जितना हो सके परोपकार सेवा में स्वयं को व्यस्त रखें।
परहित सरस् धर्म नहि भाई।
परपीड़ा सम नहि अधमाई।।