शायद आप लोग मेरी उलझन सुलझा सकें

निराकार और साकार में महत्वपूर्ण किसकी आराधना है इसपर यदि मैं चिंतन करता हूँ तो पाता हूँ कि दोनों में से कोई महत्वपूर्ण नहीं है | महत्वपूर्ण है केवल आराधना | आराधना निराकार की हो या साकार की कोई अंतर नहीं पड़ता क्योंकि दोनों ही निष्क्रिय हैं, भावहीन हैं | अंतर पड़ता है अराधना करने वाले के भाव, समर्पण व विश्वास से |

यदि उनसे पूछा जाये कि किसी किसान की सहायता ईश्वर ने क्यों नहीं की या किसी बलात्कारी से किसी मासूम की रक्षा ईश्वर ने क्यों नहीं की ?

तो जो निराकार को पूजते हैं और जो साकार को पूजते हैं, दोनों ही एक ही तर्क देते हैं कि उसने पूरे विश्वास से ईश्वर को नहीं पुकारा होगा, या उसने कोई पाप किये होंगे पिछले जन्म में या उसकी श्रृद्धा में कमी रह गयी होगी….. अर्थात साकार और निराकार दोनों ही ईश्वर चापलूसी पसंद हैं | ये दोनों ही प्रकार के ईश्वर किसी बेबस व मासूम की रक्षा करने कभी नहीं आते और न ही किसी को भेजते हैं… जैसे सीरिया और ईराक में कितनी मासूमों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा लेकिन उनके अल्लाह ने किसी पैगम्बर को उनकी रक्षा के लिए नहीं भेजा |

अभी अख़बार पढ़ रहा था तो एक घटना पर नजर पड़ी कि एक नौ साल कि बच्ची की हत्या उसके ही माता-पिता ने कर दी | माँ ने बच्ची के पैर पकड़े और पिता ने दाव से एक वार में बच्ची का सर धड़ से अलग कर दिया | ग्रामीणों ने उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया लेकिन अभी तक कारणों का पता नहीं चल पाया है ऐसा पुलिस का कहना है | तो इस घटना को भी मैं इसी नजर से देखता हूँ कि वह बच्ची हो सकता ईश्वर से अनजान हो, लेकिन क्या ईश्वर को उसकी सहायता नहीं करनी चाहिए थी ?

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फिर ऐसा ईश्वर जो न किसी किसान की सहायता करता हो, न किसी आदिवासी की सहायता करता हो, जो न दंगाईयो को दंगा करने से रोकता हो, जो न आतंकियों से मासूमों की जान बचाता हो, जो घोटालेबाजों और भ्रष्टाचारियों से समाज को बचाने के बजाये उन्हीं की हिफाजत करता हो, उन्हें जेल की बजाय सत्ता दिलवाता हो…… तो फिर ऐसे ईश्वर और अल्लाह के लिए, सड़कों पर उत्पात मचाने, तोड़-फोड़ करने का क्या लाभ यह मेरी समझ में नहीं आ रहा | आप लोग विद्वान है, पढ़े-लिखे हैं, अंग्रेजी बोलते हैं…. शायद आप लोग मेरी उलझन सुलझा सकें | ~विशुद्ध चैतन्य

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चैतन्य भारत
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जी शुक्रिया फारुख जी

Farooq Ahmed
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बहुत बढ़िया और आजकल कम पाया जाने वाला लेख। वैसे मेरी मान्यता है की हम यहाँ परीक्षा के लिए हैं। हमें सही गलत का भान करा दिया गया है। अब अपने अपने अपने चुनाव के हिसाब से परीणाम आयेंगे और हमें प्रतिफल मिलेगा मोत के बाद। इस दुनिया को ईशवर यदि रोज़ हस्तक्षेप करे तो यह परीक्षा को बाधित करता है। आपके निष्कर्ष के प्रार्थना महत्वपूर्ण है से सहमत हूँ।