-●●●||| साकार बिना निराकार कैसे |||●●●—-

—●●●||| साकार बिना निराकार कैसे |||●●●—-
साधना यदि इतनी आसान होती तो निराकार ब्रह्म को बार – बार साकार रूपों में इस धरा पर न आना पड़ता ।
  •  विशुद्ध चैतन्य साधना तो बहुत ही आसान है केवल साधक नहीं हैं | ईश्वर को बार बार आना पड़ता है यह दिखाने Life_After_Death___Beach_by_goran_dके लिए कि जब मैं मानव शरीर में ईश्वरत्व को प्राप्त हो सकता हूँ तो तुम क्यों नहीं ? लेकिन मनुष्य उनके दिखाए मार्ग पर न चलकर मार्ग में ही उनकी मूर्ति बनाकर भजन कीर्तन करने लगते हैं और जो अधिक बुद्धिमान हैं वहीँ अपनी दूकान खोलकर कथा बाँचने लगते हैं | परिणाम होता है कि वहाँ एक मंदिर बन जाता है और धर्म के ठेकेदारों का धंधा शुरू | 
    फिर अगली कई पीढ़ियों तक यही सुनने सुनाने में बीत जाता है कि भगवान ने ये कहा और वो कहा…. फिर नए भगवान का अवतार होता है और फिर वही कहानी |
    17 hours ago · Like · 4
  •  बिष्णु देव चंद्रवंशी बिशुद्ध चैतन्य जी बिना प्रमाण यहाँ कुछ नही माना जाएगा केवल मात्र कपोल कल्पित बातो का यहाँ किसी भी प्रकार माननीय नही है अतः आप यदि निराकार को साबित कर सकते है तो करे अन्यथा बेतुकी बातो से कोई सरोकार नहीSee Translation
    17 hours ago via mobile · Unlike · 3
  •  बिष्णु देव चंद्रवंशी और वैसे भी भजन तो हर मनुष्य को करना ही पड़ेगा या तो इश्वर को भजो या सेठ साहूकार को बिना भजन के तो मनुष्य इस धरा पर रह ही नही सकताSee Translation
    17 hours ago via mobile · Unlike · 5
  •  विशुद्ध चैतन्य चलिए माना तो सही कि मैं बेतुकी बातें करता हूँ | 
    हवा निराकार है, अंतरिक्ष निराकार है, प्राण निराकार है …. लेकिन ये सभी कपोल कल्पना होते यदि किसी ने जानने की कोशिश नहीं की होती तो |
    17 hours ago · Like · 3
  •  बिष्णु देव चंद्रवंशी जिस प्रकार अग्नि अप्रत्यक्ष भी है और प्रत्यक्ष हैSee Translation
    17 hours ago via mobile · Unlike · 5
  • श्रृष्टि का अटल सिद्धांत है एक स्थूल दूसरा सूक्ष्म स्थूल आँखों से दीखता है और शुक्ष्म नही उसी प्रकार प्राण हैSee Translation
    17 hours ago via mobile · Unlike · 5
  • Enjoy Dr. Subramanian Swamy’s talk on “Values of Hinduism, Stress Management – B…See More
  •  बिष्णु देव चंद्रवंशी यदा यदा कि धर्मस्य ग्लानिर्भवाते भारत ।
    अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम।
    परित्राणाय सादूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
    धर्म संस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे ।।See Translation
    17 hours ago via mobile · Unlike · 4
  •  बिष्णु देव चंद्रवंशी क्या श्री मद्भागवत गीता प्रमाण नही है महाशयSee Translation
    16 hours ago via mobile · Unlike · 4
  •  Anand Kumar ॐ नमो भगवते वासुदेवया नमः
    16 hours ago · Like · 4
  •  Prem Sharma Jis samay Dharmshastron ki rachana hui, wah samay aur tatkaleen SAMAJ RACHNA kuchh aur the. Mujhe lagta hai ki vartamaan SAMAJ RACHNA ke anuroop aur samay sangat vyakhya karna atyavashyak hai.
    16 hours ago · Unlike · 216 hours ago · Like · 1
  •  विशुद्ध चैतन्य विष्णु देव जी, जब गीता लिखी गई तब मैं था या नहीं वहाँ पर कह नहीं सकता, क्योंकि अब कुछ याद नहीं काफी पुरानी बात है | लेकिन तब से लेकर आज तक कितने लोगों ने इसकी व्याख्या की और बड़े से बड़े विद्वान् कहलाये | लेकिन क्या किसीने यह कहा कि हाँ मैंने आत्मा को देखा है, अन्तरिक्ष को देखा है या हवा को देखा है साकार रूप में ?
    रटने और समझने में अंतर होता है पंडित जी |
    16 hours ago · Like · 3
  •  Anil Kumar गुरूजनो इस विषय पर शंकराचार्य माधवाचार्य निम्बकाचार्य रामानुजम कुमारिल भट्ट सरीखे सनातनी विद्वानो के अलावा नागार्जुन भगवान बुद्घ महावीर जी जैसे विद्वानो नेभी गहन शोध किया है परंतु उनके विचारों मे भी समता नही है वो भी द्वैतSee Translation
    16 hours ago via mobile · Unlike · 6
  •  Anil Kumar अद्वैत साकार निराकार मे उलझे रहेSee Translation
    16 hours ago via mobile · Unlike · 6
  •  Om Arora विष्णु जी जितने लोग है उतने मत है एक ताताव्ज्ञान सन्देश के नाम से विअकती है वो कहते है की गीता ज्ञान श्री क्रिशन ने नहीं दिया वो तो निराकार परमात्मा ने उनके शरीर में आकर दिया है ?See Translation
  • विष्णु जी जितने लोग है उतने मत है एक ताताव्ज्ञान सन्देश के नाम से
    विअकती है वो कहते है की गीता ज्ञान श्री क्रिशन ने
    नहीं दिया वो तो निराकार परमात्मा ने उनके शरीर में आकर
    दिया है ?)))))) aap sahi kah rahe h bandhu.. lekin wo brahm nirakar nhi hai sakar h.. bas usne ye pratigya kar rakhi h ki main kabhi kisi ke samne prakat nhi hota.. apni yog maya se chupa rahta hu.. praman ke liye dekhe gitaji..
  •  तत्वज्ञान सन्देश ज्योति निरंजन, क्षर पुरुष, ब्रह्म, सदाशिव, महाविष्णु, काल या काल भगवान आदि नाम हैं उनके…
    15 hours ago · Like · 4
  •  Ramjibhai Jotaniya suddh satsang
    15 hours ago · Like · 2
  •  Ramjibhai Jotaniya sant samagam
    15 hours ago · Like · 1
  •  तत्वज्ञान सन्देश वो ब्रह्म अपने मूल रूप में कभी भी किसी के सामने नही आते, कभी सदाशिव के रूप में और कभी महाविष्णु के रूप में भक्तो को दर्शन देते हैं तो उन भक्तो को लगता हैं की जो देव उन्हें दर्शन दे रहे हैं वाही परमात्मा है वही पूर्ण ब्रह्म हैं। और कुछ को कुछ भी प्राप्त नही हुआ सिर्फ अनुभव हुआ या सिर्फ एक प्रकाश पुंज दिखा दिया तो वो समझते हैं परमात्मा निराकार हैं जबकि वो वास्तव में साकार हैं, और ब्रह्मलोक (not ब्रह्मा का लोक) उनका स्थान हैं! उन्होंने कभी किसी को अपना वास्तविक रूप नही दिखाया.. ये बात गीताजी में ये खुद कह रहे हैं की हे अर्जुन मेरी प्राप्ति न जप से न तप से ना ही वेदों से किसी भी प्रकार नही की जा सकती…
  •  तत्वज्ञान सन्देश और कहा की मैंने तो तुम पे अनुग्रह करके अपना वास्तविक रूप दिखाया हैं। और जब अर्जुन ने पुच हे देव आप कोन हो तो उस ब्रह्म ने कहा की ‘मैं काल हू’ यही उनका वास्तविक नाम हैं।
  •  तत्वज्ञान सन्देश अध्याय 15 के श्लोक 1 से 4 तक का सार..
    अक्षर पुरुष इक पेड़ है, निरंजन वाकी डार।
    तीनो देवा साखा हैं ये पात रूप संसार।।
    15 hours ago · Like · 2
  •  Anil Kumar विशुद्ध चैतन्य जी जहां तक आत्मा के दर्शनो का प्रश्न है तो वो तो शंकराचार्य जी ने परकाया प्रवेश के प्रयोग से सिद्ध कर ही दिया था कि आत्मा साकार है दूसरा हमाराशरीर तीन तलो मे विभाजित है। अन्नमय प्राणमय अौर मनोमयआदि और ये सब क्रमशः सूक्ष्मतर होते हैं। ये चर्मचक्षुओ से परे हैं हम चाहकर भी परमात्मा या आत्मा का साक्षात्कार नही कर सकते । कुरूक्षेत्र में भी भगवान ने अर्जुन को दिव्य ज्योति दी ताकि वो उनके विराट रूप के दर्शन कर सके । और पराबैंगनी किरणो और पराश्रव्य ध्वनि को केवल कुत्ते और चमगादड ही देख और सुनसकते हैं ।मानव दृष्टि से बाहर की वस्तु को हम चाहे वो किसी रूप मे हो मानने से ईनकार करता है।See Translation
    14 hours ago via mobile · Unlike · 6
  • Ashokradha Kunjhbihari सही बात है जै जै जी
    14 hours ago via mobile · Like · 3
  •  बिष्णु देव चंद्रवंशी विशुद्ध चैतन्य जी प्रमाण किसे माना जाता है कपोल कल्पित बातो को या शाष्त्र को 
    जरा बतलायेंगेSee Translation
    13 hours ago via mobile · Unlike · 4
  •  Pt Indramani Dubey नमों नारायणSee Translation
    13 hours ago · Like · 3
  •  Sudhir Jha देवोत्थान एकादशी के हार्दिक शुभकामना
    13 hours ago · Like · 3
  • अंतर होता है रटने में और समझे में आप जैसे लोग केवल बिना आधार वाली बातो को रटते रहते है और समझने वाले समझ का भक्ति में लगे रहते है See Translation
    13 hours ago via mobile · Edited · Unlike · 4
  • विशुद्ध चैतन्य हा हा हा हा हा
    13 hours ago · Like · 2
  • विशुद्ध चैतन्य प्रमाण किसे माना जाता है यह तो ज्ञानी ही बता सकते हैं | मैं तो परम अज्ञानी हूँ | 

    मैं तो ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ कि एडिसन को प्रमाण पत्र नहीं मिला | यदि मिल गया होता बचपन में तो हम आज भी मशालें जला कर फेसबुक में चेहरा देखते और तख्ती में सरकंडे की कलम से लिख कर कमेन्ट कर रहे होते |

    13 hours ago · Like · 2
  •  बिष्णु देव चंद्रवंशी विशुद्ध चैतन्य जी बिना धर्म के तो कोई मनुष्य इस धरा पर रह ही नही सकता और आप जैसे लोग अनुसरण तो धर्म के करते है और नास्तिकता के गाने गाते है क्या आप मात्र 24 घंटो में धर्म रहित हो कर अपना जीवन ब्यातित कर पायेंगेSee Translation
    13 hours ago via mobile · Unlike · 4
  •  बिष्णु देव चंद्रवंशी विशुद्ध चैतन्य जी क्या हुआ बतलाये नही दो नाव पर सवारी क्यों 
    24 घंटो में आप एक न एक ऐसा कार्य कर गुजरेंगे जो धर्म से सम्मलित हो उसके बावजूद नास्तिकता का ढोंग क्योंSee Translation
    13 hours ago via mobile · Unlike · 3
  • Adv Sanjay Singh RADHE KRISHNA
    13 hours ago · Like · 2
  • Kumar Sandip मात्र पूर्णतया श्रद्धा, निश्छल प्रेम ,मेरा अपना मात्र मेरा अराध्य प्रभु ,मै अज्ञानी कुछ नहीं पता मेरे प्रभु मेरा काम है चलना चलाना तुझे है कहा कब क्यों कैसे सब तू जाने !समर्पण मुझे करना है बाकि साधना या जो भी सब वोह खुद ही करवा लेगा न मेने किया न करूँगा उसने ही किया और वोह ही करेगा। … यह मेरे कपोल कल्पित विचार है ! कृपया प्रश्न न करे मुझसे अपितु मेरा मार्गदर्शन करे कृपया !
  • Ragini Kumari bahut sunder vishnu jee
    13 hours ago · Like · 3
  •  जय श्रीकृष्ण वाह भ्राता आपने तो धो डाला !!!!
    12 hours ago via mobile · Like · 4
  •  जय श्रीकृष्ण अभी भी गांधी छाप द्विचारित्र लोगों की कमी नहीं है, मुख में राम राम और पीछे में अल्लाह-हू-अकबर !
    12 hours ago via mobile · Like · 3
  •  Kumar Sandip मेरी समझ से बाहर है क्या लेना ऐसे लोगो से जो दो नावों पर पाँव रखेगा खुद डूब लेगा ! यात्रा अपनी अपनी आप साधना के बारे में कुछ लिखे ताकि कुछ ज्ञानप्राप्त कर पाउ !
    12 hours ago · Like · 3
  •  विशुद्ध चैतन्य अनिल कुमार जी, मैं तो निराकार स्वरुप के समर्थन में ही बात कर रहा हूँ और आप मुझे ही समझा रहें हैं | 
    11 hours ago · Like · 2
  • Ramjibhai Jotaniya हारिये न हिम्मत बिसारिये

    राम ।
    तू क्यों सोचे बंदे सब
    की सोचे राम

    दीपक ले के हाथ में सतगुरु
    राह
    दिखाये ।
    पर मन मूरख बावरा आप
    अँधेरे जाए

    पाप पुण्य और भले बुरे
    की वो ही करता तोल ।
    ये सौदे नहीं जगत हाट के तू
    क्या जाने मोल ॥
    जैसा जिस का काम पाता वैसे
    दाम

    तू क्यों सोचे बंदे सब
    की सोचे राम

    See Translation
  • विशुद्ध चैतन्य विष्णुदेव जी, यह आपने कैसे जान लिया कि मैं नास्तिकता का ढोंग कर रहा हूँ ??? मैं तो आप को केवल विद्वान् मान रहा था, आप तो परम ज्ञानी निकले !!!! धन्य हैं आप !!!!! सादर नमन आपको, जो बात मैं स्वयं नहीं जानता था आपने जान लिया |
    11 hours ago · Like · 2
  • Bharat A. Odedara wah bhrata, sundar
    10 hours ago · Like · 1
  •  Anil Kumar चैतन्य जी मै तो आपकी बात का समर्थन कर रहा था परंतु ये पूर्ण सत्य भी तो नही है कि ईश्वर निराकार है । जब जब धर्म की अवनति होती है और पाप बढता है तब तब भगवान प्राणीयों के कष्टो के निवारण के लिए प्रगट होते हैं । गॉड-पार्टिकल की खोज के बाद तो विज्ञान ने भी मान लिया है कि प्रत्येक अणु के भी अंदर एक ही मूल तत्व है ।See Translation
    10 hours ago via mobile · Unlike · 4
     विशुद्ध चैतन्य अनिल कुमार जी, प्रत्येक अणु के भीतर भी एक ही मूल तत्व है यह सत्य है लेकिन वह ईश्वर नहीं है | ईश्वर प्राण है और वही हम सभी प्राणियों के भीतर है | वैज्ञानिक जिन तत्वों की बातें करते हैं प्राण उन सभी तत्वों में से किसी भी तत्व में से नहीं है यह भी सत्य है | अतः ईश्वर निराकार ही है |
    • ईश्वर निराकार रूप में सभी में विद्धमान है यह भी सत्य है | लेकिन बहुत ही कम लोग होते हैं जो स्वयं को पहचानने की ओर अग्रसर होते हैं | जो ऐसा कर लेते हैं हम उन्हें भगवान मान लेते हैं | यदि आप भी स्वयं के भीतर खोजेंगे तो आप भी पाएंगे कि आप स्वयं भगवान हैं | भगवान कहीं बाहर नहीं है |

    9 hours ago · Like · 3

    बिष्णु देव चंद्रवंशी विशुद्ध चैतन्य निराकार ब्रह्म को आप प्रमाणित कैसे करंगे जरा बतलायेंगेSee Translation

     बिष्णु देव चंद्रवंशी जो निराकार है वही साकार भी हैSee Translation

     बिष्णु देव चंद्रवंशी श्री मद्भागवत गीता पर आप की क्या राय हैSee Translation

     बिष्णु देव चंद्रवंशी आप ने वायु प्राण और आत्मा को निराकार कहा है 
    • यहाँ वायु और प्राण में क्या अंतर है जरा बतलायेंगेSee Translation

    8 hours ago via mobile · Like · 1

    बिष्णु देव चंद्रवंशी रामकृष्ण परम हंश पर आप की क्या बिचार हैSee Translation

     विशुद्ध चैतन्य विष्णु देव जी, सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती | और जो प्रमाणित हो जाते हैं वे असत्य भी हो जायेंगे एक दिन | जैसे कि एक दिन पृथिवी समाप्त हो जायेगी, सूर्य समाप्त हो जाएगा और सारे प्रमाण समाप्त हो जायेंगे | 

    • फिर सृष्टि की रचना होगी और फिर से नए प्रमाण तैयार किये जायेंगे |

    भागवत गीता में जो कहा गया है वह समझ में आ जाए तो फिर कुछ और समझने को शेष नहीं रह जाता |

     Gyanchand Bundiwal शुभ रात्रि जय श्री कृष्णा

     विशुद्ध चैतन्य विष्णु देव जी, मैं पहले ही कह चूका हूँ कि मैं अज्ञानी हूँ | वायु और प्राण में अंतर तो आपको ज्ञानी ही बता सकते हैं और परमहंस के विषय में कोई भक्ति मार्गी है बता सकता है 

     बिष्णु देव चंद्रवंशी विशुद्ध चैतन्य जी इस लिए कहता हु की श्री मद्भागवत गीता पर क्या राय है आप अब तक आप ने इस बिषय पर कुछ भी नही कहा 

    • श्री मद्भागवत गीता पर अपना राय स्पस्ट करेSee Translation

    8 hours ago via mobile · Unlike · 2

    Anil Kumar प्रभु ये सत्य है कि भगवान घट घट व्यापी है परंतु जो लोग भगवान को देख चुके हैं उन्हे भी तो नकारा नही जा सकता जैसे रामकृष्ण धन्ना जाट नामदेव आदि ।आत्म ग्यान तो सही है किंतु उसका भी तो उदेश्य ब्रहम को जानना है । और आप भागवत गीता का समर्थन भी कर रहे है और भगवान कृष्ण जी के साकार रूप को प्रश्नचिन्हित भी कर रहे हैंSee Translation

     विशुद्ध चैतन्य विष्णु देव जी, राय वही है जो पहले कहा था…भागवत गीता में जो कहा गया है वह समझ में आ जाए तो फिर कुछ और समझने को शेष नहीं रह जाता |

     विशुद्ध चैतन्य अनिल जी मेरे कमेन्ट को पुनः धैर्य के साथ पढ़ें

     बिष्णु देव चंद्रवंशी आप अपना मत साफ़ साफ़ सब्दो में कहेSee Translation

     विशुद्ध चैतन्य  इससे अधिक स्पष्टता से तो कोई ज्ञानी ही कह सकता है |

     बिष्णु देव चंद्रवंशी आप कभी कहते है इश्वर का साकार रूप हो नही सकता 

    • दुसरे श्री कृष्ण भगवन को अवतार भी मानने से कतरा रहे हैSee Translation

    8 hours ago via mobile · Like · 1

     Anil Kumar शुभ रात्री बन्धुओ । शायद रात्री की गहनता या आपके वचनो की गूढता को न समझने केऔर निद्रा के वशीभूत होने के कारण क्षमा चाहता हूं। जय निराकार xyz भगवान या जो भी चैतन्य जी मानते है उसी की जयSee Translation

     विशुद्ध चैतन्य शुभरात्रि आप सभी ज्ञानी जनों को |

     बिष्णु देव चंद्रवंशी मुझे लगता है की जवाब नदारद ही रहेगा 

    • जो शाश्त्रो को नही मानते उनके लिए कपोल कल्पित उदाहरण मात्र ही रह जायेंगे और वो भी बिना प्रमाण केSee Translation

    8 hours ago via mobile · Edited · Unlike · 1

     Prem Prakash Upadhyaya Vyart ki bahas choro …karmanye vadeekaraste maflesukadachana..

     Nantu Das HARE KRISHNA]

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