आपसे ऐसी आशा नहीं थी….!

images (5)मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि जैसा लोग समझते हैं, मैं वैसा नहीं निकलता | लगभग १५-२० साल मैंने कोशिश की लेकिन लोगों की शिकायतें बंद नहीं हुईं | फिर मैंने लोगों से कटना शुरू किया और धीरे धीरे सारे रिश्तों नातों से दूर हमेशा के लिए हो गया | ये एकांत के वर्ष मेरे लिए वरदान सिद्ध हुए और स्वयं से परिचय हुआ | क्योंकि ईश्वर ने अकेले जीने के लिए किसी को नहीं भेजा है और जब आपके साथ कोई नहीं होता तो आप स्वयं अपने साथ होते हैं | और वही वह समय था जब मैंने जाना कि लोग मुझे वही क्यों नहीं समझते जो मैं हूँ ?
तो मैं आज सभी मित्रों के लिए कुछ तथ्य यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ | आशा है उसके बाद आप लोग मुझे यह नहीं कहेंगे कि हमें आपसे ऐसी आशा नहीं थी | 🙂

  • मैंने जाना कि मैं अनपढ़, जाहिल गँवार हूँ, और विद्वान् दिखने की कोशिश करता हूँ | लेकिन मेरी बातें किसी की समझ नहीं आते जबकि विद्वान् लोग जो कहते हैं वह सभी की समझ में आता है |
  • मैंने जाना कि मुझे आध्यात्म का क-ख-ग भी पता नहीं है, लेकिन भ्रम पाले बैठा हूँ आध्यात्मिक होने का | जबकि जिन्हें पता है वे सिद्ध कर देते हैं कि आध्यात्म नाम की कोई चीज नहीं है |
  • मैंने जाना कि मैं धार्मिक नहीं हूँ क्योंकि मैं मानता हूँ कि धर्म तिलक और टोपी में नहीं छुपा है | लेकिन धार्मिक लोग सिद्ध कर रहें हैं कि धर्म खतरे में है | कोई तिलक टोपी बदल ले तो धर्म बदल जाता है |
  • मैंने जाना कि मैं सत्य नाम की कोई चीज नहीं है, लेकिन सत्यवादी लोग सत्य के लिए लड़ रहें हैं | यह और बात है कि सबका सत्य अलग अलग है |
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