"बुरा जो देखन मैं चला…."

कई हज़ार वर्ष पुरानी बात है | पल्टू नाम का एक बच्चा छोटी मोटी चोरी करके अपना जीवन यापन करता था | असल में जितनी बार भी चोरी करता था पकड़ा जाता था और जेल पहुँच जाता था | इस प्रकार उसके खाने-पीने और सोने की व्यवस्था हो जाया करती थी |

एक दिन जब व जेल से छूटा तो जेल में कमाए कुछ पैसों से उसने फिल्म देखने की सोची | जब वह सिनेमा हाल पहुँचा तो उसके प्रिय हीरो की फिल्म लगी थी ‘डॉन’ | फिल्म ख़त्म हुई तो फिर से टिकट ली और फिर देखी फिल्म, इस प्रकार कई बार फिल्म देखने के बाद उसने ठान लिया कि मैं भी अमिताभ बच्चन की तरह डॉन बनूँगा और मुझे भी फिर कोई नहीं पकड़ पायेगा |

इस बार वह अधिक सतर्कता से चोरी करने के लिए किसी के घर में घुसा | उसे वहाँ कुछ नहीं मिला लेकिन एक किताब मिली कहानियों की | वह उसे ही उठा लाया कि कि इसे बेचकर वह कुछ पैसे बना लेगा | दिन में एक पेड़ के नीचे बैठकर वह कहानियों की किताब के पन्ने पलट रहा था कि एक कहानी पर उसकी नजर पड़ी  | कहानी थी कि एक औरत को घेर कर कुछ लोग पत्थर मार रहे थे | तभी जीसस वहाँ पहुँचे और उन्होंने कहा कि पहला पत्थर वही मारे जिसने कोई पाप न किया हो और सभी पत्थर छोड़ कर पीछे हट गए ….

उस  कहानी ने उसके अन्दर ऐसा आत्मविश्वास भर दिया कि उसके अन्दर से पुलिस और जेल का डर निकल गया और आज तक पूरी दुनिया की पुलिस उसे नहीं पकड़ पायी | क्योंकि जब भी कोई उसे पकड़ने जाता वह उससे पूछता कि क्या तूने कभी कोई अपराध नहीं किया है ? वह पुलिस वाला सर झुका कर वापस चला जाता |

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सारी दुनिया की पुलिस ने मिलकर एक बार ऐसा पुलिसवाला ढूंढ निकाला जिसने कभी न तो रिश्वत ली थी और न ही कभी कोई और ही अपराध किया था | जब उसे भेजा गया डॉन को गिरफ्तार करने के लिए तो डॉन ने उससे भी वही सवाल किया | पुलिस अधिकारी ने कहा नहीं, मैंने कभी कोई पाप या अपराध नहीं किया है | तो डॉन ने पूछा कि क्या तूने बचपन में आम, अमरुद या जामुन नहीं चुराए थे ? बेचारा पुलिस अधिकारी चुपचाप सर झुकाकर वापस चला आया |

सारांश यह कि आपने कोई अपराध अनजाने में या अज्ञानता वश किया है तो इसका अर्थ यह नहीं कि आप अपराधियों के विरुद्ध आवाज उठाने का अधिकार खो देते हैं | खुल कर विरोध कीजिये असामाजिक तत्वों का | -विशुद्ध चैतन्य 

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