आप पाखंडी हैं और ढोंग कर रहें हैं …

कई हज़ार वर्ष पुरानी बात है | मैं एक घने जंगल में घनघोर तपस्या कर रहा था | न किसी ने मिलना न किसी से बोलना, न खाने के चिंता न कमाने की, न कहीं जाता और न कहीं से आता… बस एक ही जगह बैठा रहता और केवल फेसबुक पर अपने विचार लिखता रहता था | इस तरह मुझे कई वर्ष बीत गए तपस्या करते हुए |
एक दिन एक व्यक्ति आया और बोला, “महाराज आप ने इतने वर्षों की तपस्या की है कोई न कोई सिद्धि-विद्धि भी प्राप्त किया ही होगा ? तो कोई चमत्कार दिखाइये |”
“कैसा चमत्कार देखना चाहेंगे ?” मैंने पूछा |
“महाराज यहाँ रुपयों का ढेर खड़ा करके दिखा दो तो मान जाऊँगा |” व बोला |
“नहीं कर सकता |” मैंने सपाट भाव से उत्तर दिया |
इसका मतलब आप पाखंडी हैं और ढोंग कर रहें हैं | आपके पास कोई शक्ति नहीं है, चमत्कार नहीं है, आप कोई नौकरी भी नहीं करते, कोई काम भी नहीं करते…. बस फेसबुक पर बैठे रहते हैं सारे दिन और रात | आपसे अच्छा तो वह सड़क का जादूगर है जो दो रूपये का नोट दो तो बोरा भरकर नोट बना देताVishuddha Chaitanya है | आपसे अच्छा तो वह छोटू है जो कम से कम मेहनत करके दो वक्त की रोटी कमाता है | आपसे अच्छा तो वह भिखारी है जो भीख मांगकर अपने परिवार का पेट भरता है….” वह बिफर गया और सारी भड़ास उड़ेल दी मुझपर जितना इतने वर्षों में उसने संगृहीत किया था |
“आपने सही कहा कि वे सभी मुझसे अच्छे हैं | आप भी मुझसे अच्छे हैं | लेकिन आप न तो मेरे जैसे हैं और न ही मैं आपके जैसा | मैं मैं हूँ आप आप हैं और छोटू छोटू है | सबके अपने अपने कर्म हैं और सभी अपने अपनी जगह श्रेष्ठ | लेकिन प्रश्न अब यह उठता है कि जब इतने सारे अच्छे लोगों से आप कुछ नहीं सीख पाए तो मेरे पास क्यों आये ? क्या आप जानते नहीं थे कि मैं जंगल में अकेला रहता हूँ और बेरोजगार हूँ ? कामचोर इतना हूँ कि अपने लिए खाना भी नहीं बनाता, अपने कपड़े नहीं धोता और वर्षों तक नहीं नहाता ?” मैंने प्रतिप्रश्न किया |
“जी मुझे क्या सारी दुनिया जानती है इस बात को तो | मैं तो इसलिए आया था कि शायद आपके शरण आने पर कोई आशीर्वाद मिल जाए और मेरा भला हो जाए |” उसने थोड़ा नरम होते हुए बोला |
“जब मैं अपना भला नहीं कर पाया तो आपका भला कैसे कर सकता हूँ ? जब इतने सारे भले लोग आपको मिले और वे भला नहीं कर पाए आपका तो मैं निकम्मा आपके लिए क्या कर सकता हूँ ? और मैं आपका भला कर दूंगा तो मैं पाखंडी नहीं रहूँगा ? मैं तब सिद्ध बाबा हो जाऊँगा ? केवल आपके लोभ व स्वार्थ की पूर्ति करके मैं महात्मा हो जाऊँगा ?
नहीं चाहिए मुझे ऐसी सिद्दी और प्रसिद्धि | आप को जो समझना हो समझिये और जाइए यहाँ से | मैं न तो जादूगर हूँ और न ही छोटू और न ही भिखारी | मैं वही हूँ जो मुझे होना चाहिए था | मैं किसी से भीख मांगने भी नहीं जाता | मेरी साधना मैंने तय की है और उसे कैसे करना है वह भी मैं ही तय करूँगा आप कौन होते हैं मुझे सिखाने वाले कि मुझे साधना कैसे करनी है और कैसे नहीं ? यदि आपको साधना का इतना ही ज्ञान है तो आप स्वयं कीजिये किसी दूसरे की साधना क्यों भंग करना चाहते हैं ?” मैंने थोड़ा गर्म होते हुए कहा |
“फिर महाराज आप मुझे भी सिखा दीजिये न ये फेसबुक साधना ?” उसने हाथ जोड़ कर कहा |
“जिस दिन आप स्वार्थ से मुक्त हो जायेंगे उस दिन कोई भी साधना करेंगे शुभ ही होगा | फिर आप फेसबुक साधना करें या ट्विटर साधना करें या कोई और साधना करें |” मैंने मुस्कुराते हुए कहा |
उसने हाथ जोड़ कर प्रणाम किया और एक रूपये का सिक्का मेरे चरणों में रखकर चला गया |
सारांश यह कि प्रत्येक व्यक्ति किसी विशेष उद्देश्य से आता है और उसके कार्य का समय और स्थान भी निश्चित रहता है | व्यक्ति भ्रमित रहता है क्योंकि समाज और शिक्षा कभी उसे अवसर नहीं देती कि वह स्वयं को जान पाए | समाज उसे हमेशा दूसरों का उदाहरण देता रहता है जिससे वह कभी स्वयं का सम्मान नहीं कर पाता और दूसरों का जीवन जीने लगता है | परिणाम यह होता है कि वह सारे भौतिक सुख सुविधाएं तो पा जाता है लेकिन अपने केंद्र से भटक जाता है | फिर एक दिन ऐसा भी आता है कि उसके पास सबकुछ होते हुए भी खालीपन महसूस करता है और कुछ लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं | जैसे कि पिकासो, मर्लिन मुनरों….. आदि विश्वविख्यात हस्तियों ने किया | -विशुद्ध चैतन्य

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