कामुकता

LOVE 33 (2)_thumb[2]कई हज़ार साल पहले की बात है | एक दिन एक विश्वविख्यात ज्योतिष मेरे पास आया और बोला कि बाबा आप कई हज़ार वर्षों से तपस्या कर रहें हैं इसलिए आपसे मिलने चला आया | आपने इतने वर्षों में कई सिद्धियाँ प्राप्त की होंगी ? मैंने तो पुरे विश्व में अपने ज्योतिश्ज्ञान का डंका बजवा रखा है इसलिए आप की कुंडली देखना चाहता हूँ और अपने ज्ञान के विषय में आपसे राय लेना चाहता हूँ |
मैंने कहा, “मैंने तो कभी कुंडली बनवाई ही नहीं |”
“कोई बात नहीं आप अपना डेट ऑफ बर्थ बता दीजिये और स्थान व समय बता दीजिये |” उसने अपना लैपटॉप खोलते हुए कहा | “लेकिन मैं जो कुछ भी बताऊँ उसे आप पूरी इमानदारी से सुनियेगा और बुरा मत मानियेगा यदि कुछ गलत निकला तो ”
मैंने उसे सब कुछ बता दिया और उसने कुंडली बनाकर मेरी ओर हैरानी से देखा और पूछा कि आपने जो विवरण दिया है वह सही है ?
मैंने कहा कि सौ प्रतिशत सही है |
“आप की कुंडली बता रही है कि आप बहुत ही कामुक प्रवृति के व्यक्ति हैं और आपके कई स्त्रियों से सम्बन्ध हैं | क्या यह सही है ?
मैंने कहा कि आपको अपने ज्योतिष पर विश्वास है ? उसने कहा बिलकुल ! आज तक मेरी बातें गलत नहीं निकली |
मैंने कहा कि यदि आप इस जन्म की बात कर रहें हैं तो कम से कम एक स्त्री से ही मिलवा दीजिये मुझे | आज तक तो किसी स्त्री ने सम्बन्ध बनाना तो दूर मेरी तरफ देखा तक नहीं | अब यदि आप पिछले किसी और जन्म की बात कर रहें हैं तो कह नहीं सकता क्योंकि मुझे पिछला जन्म याद नहीं |
ज्योतिषी सोच में पड़ गया और अंत में बोला “आपने जो विवरण दिया है वही गलत है और चूँकि कई हज़ार साल से आप तपस्या पर बैठे हैं इसलिए आपको ठीक से याद नहीं है | वैसे भी फेसबुक साधना करने वालों को कुछ याद रहता नहीं है….”
मैं मुस्कुराया और उसे विदा कर दिया शुभकामनाओं के साथ |
तो ज्योतिष गलत नहीं होता केवल उसे कैसे आप व्याख्या करते हैं वह गलत हो सकता है | यदि मेरी कुंडली में अत्याधिक कामुक होने की बात लिखी है तो कारण यही है कि ऐसा हो सकता था लेकिन हुआ नहीं क्योंकि मेरे दिशा बदल गई | मैं यदि किसी ऐसी संगत में होता जहाँ मुझे सुविधाएँ मिली हुई होती या किसी करोडपति बाप का बेटा होता तो सम्भव था कि ऐसा होता | क्योंकि कामुकता स्वाभाविक व प्राकृतिक गुण है | यदि इसे सही दिशा मिल जाए तो अच्छा दाम्पत्य स्थापित हो जाए साथ ही व्यक्ति जीवन के प्रति आस्थावान, आत्मविश्वास से पूर्ण व सृजनात्मक हो |और दिशा विहीन हो जाए तो बैराग्य जीवन के प्रति उदासीनता और पलायनवादी हो जाएगा | और यदि विकृत हो जाए तो कारावास का योग निश्चित है | -विशुद्ध चैतन्य
 

READ  क्या हम उस ओर तो नहीं बढ़ चुके जहाँ मानवता और भावनात्मक सम्बन्ध समाप्त हो जाता है और केवल व्यापार और मशीनों का ही वर्चस्व रहता है ?

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of