सहआस्तित्व में सहयोगी होना ही सृष्टि का मूल धर्म है |

हमारे पास दो विधि हैं किसी को सहयोगी बनाने के लिए; प्रेम और निंदा | प्रेम पशु को भी मित्र बना सकता है और निंदा मित्र को भी शत्रु बना सकता है | चुनाव आपको करना है कि कौन सी विधि अपनानी है | ~विशुद्ध चैतन्य

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