आज धन ही धर्म है और वही खतरे में है न कि वास्तविक सनातन धर्म |

वास्तव में जिस सनातन धर्म को स्वामी स्वरूपानंद जी खतरे में बता रहे हैं वह है धन | वे धन के स्थान पर धर्म बोल रहें हैं और शायद सही भी कह रहें हैं, क्योंकि आज धन ही धर्म है | जिसके पास धन नहीं वह अधर्मी है | उसे मोक्ष नहीं मिल सकता क्योंकि पूजा पाठ, कर्मकाण्ड के लिए धन की आवश्यकता होती है, वरना तो श्मशान घाट के दर्शन भी नहीं हो पाते निर्धन को |

जिस मंदिर में चढ़ावा अधिक आने लगता है लोगों की श्रृद्धा भी वहीँ बढ़ती है या यह भी कह सकते हैं जहां श्रृद्धा बढ़ने लगती है, वहीँ चढ़ावा भी बढ़ने लगता है | धार्मिक लोग हों या संत-महंत या त्यागी-बैरागी, सभी की भक्ति वहीं पर हो टिक जाती है | ध्यान में मन भी वहीं लगता है और शान्ति व ईश्वर के दर्शन भी वहीं होते हैं | इसलिए शंकारचार्य जी ठीक ही कह रहें हैं कि सनातन धर्म खतरे में है क्योंकि आज पैसा ही सनातन है |

कई धर्म के रक्षक आजकल सनातन धर्म (धन) की रक्षा करने निकले हैं लाठियों और तलवारों के साथ | क्योंकि यह धर्म (धन) जो शंकारचार्य जी खाते में आना चाहिए था वह किसी गैर-हिन्दू फ़कीर के खाते में जा रहा है | वह हिन्दू मुस्लिम एकता की बात करता था जो कि एक पाखण्ड है यह सभी संत महंत जानते हैं | क्योंकि एकता जैसी चीज से कभी इनका कोई परिचय नहीं हुआ | इन्होने तो केवल नफरत के बीज ही बोये हैं और उसीकी फसल की कमाई पर पलते रहें हैं आज तक | धर्म के नाम पर जाति के नाम पर लड़ाना ही इनका मुख्य धर्म रहा |

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न विष्णु को ये लोग सम्मान दिला पाए, न ही ब्रम्हा को और न ही शिव को लेकिन अवतारों को भगवान् से ऊपर का स्थान अवश्य दे दिया | न ही कभी लोगों को विश्वास दिला पाए कि त्रिदेव ही आपकी मनोकामना पूर्ण कर सकते हैं किसी और की प्रार्थना करने की आवश्यकता ही नहीं है | न ही खुद को विश्वास है ईश्वर पर कि ईश्वर सनातन धर्म की रक्षा करेंगे | आज इनके भगवान् राम हैं न कि विष्णु या ब्रम्हा न शिव | इन सबके नाम लिए जाते हैं तो केवल खाना पूर्ति के लिए, भक्ति कुछ नहीं है |

इनका धर्म खतरे में नहीं पड़ता जब कोई किसान आत्महत्या करता है, जब कोई निर्धन माँ को फूटपाथ में बच्चे को जन्म देना पड़ता है क्योंकि पैसे नहीं थे उसके पास अस्पताल को देने के लिए, तब इनका धर्म खतरे में नहीं पड़ता जब आदिवासियों को नेताओं और पूंजीपतियों के इशारे पर प्रताड़ित किया जाता है भूमि हथियाने के लिए, तब इनका धर्म खतरे में नहीं पड़ता जब नेता और पूंजीपति भारतीय धन विदेशी बैंकों में जमा करवा रहे होते हैं जिससे भारत को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं होने वाला, तब इनका धर्म खतरे में नैन पड़ता जब बच्चे बड़ों के साथ दुर्व्यवहार व गाली-गलौज करते हैं, तब इनका धर्म खतरे में नहीं पड़ता जब बहुत को जिंदा जला दिया जाता है, तब इनका धर्म खतरे में नहीं पड़ता जब स्कूलों से भारतीय भाषा व संस्कृति गायब हो जाती है…….. क्योंकि नैतिकता, राष्ट्रभक्ति, व संस्कृति इनका धर्म नहीं है, क्योंकि धन ही इनका सनातन धर्म है | ~विशुद्ध चैतन्य 

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