वे बहुत ही दुखी हैं कि आपने उन्हें सृष्टि में भेज दिया वे सभी को कोसते फिर रहे हैं…

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मैंने जितने भी भारतीय विद्वानों को पढ़ा या सुना, सभी ने एक ही विषय पर अधिक जोर दिया कि ईश्वर व मोक्ष की प्राप्ति और जन्म-मरण से मुक्ति ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य है | लेकिन अनपढ़ होने के कारण आजतक उनका ज्ञान मेरे पल्ले नहीं पड़ा |
सूरज का एक मात्र उद्देश्य सूर्यास्त और अन्धकार कैसे हो सकता है ?
फूल का एक मात्र उद्देश्य मुरझाना और मिट जाना कैसे हो सकता है ?
नदी का एकमात्र उद्देश्य सागर में विलीन होना कैसे हो सकता है ?
वृक्ष का एकमात्र उद्देश्य सुखकर गिर जाना कैसे हो सकता है ?
मुझसे मेरे कई शुभचिंतक इतने नाराज हुए कि फोन करना तो दूर फेसबुक में भी ब्लाक कर दिया क्योंकि वे मुझे हमेशा कहा करते थे कि दुनिया के सामने मत आओ | जो कुछ भी ज्ञान अर्जित किया है उसे अपने तक ही सीमित रखो, प्रचार मत करो… आदि इत्यादि | लेकिन मैंने फेसबुक में उल्टा-सीधा लिखना शुरू कर दिया | शुरू में जब मैं केवल सुविचार-कुविचार पोस्ट किया करता था, तब तो सभी खुश थे | जब में देवी देवताओं की तस्वीरे पोस्ट किया करता था सभी खुश थे | जब मैं चुटकुले पोस्ट करता था, सभी खुश थे | लेकिन जब से खुल कर लिखना शुरू किया सभी दुखी हो गये |
कुछ लोगों ने कहा कि इससे आप समाज के बहुत बड़े हिस्से से मुफ्त में मुसीबत ले रहे हो और कोई लाभ होने वाला भी नहीं है | किसी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला….
अब जो लोग जो मुझे सलाह दे रहे थे कि मुझे क्या करना है क्या नहीं, वे स्वयं मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रयास क्यों नहीं कर रहे ? मुझे क्यों सलाह दे रहे हैं कि मुझे क्या करना चाहिए या क्या नहीं ? मैं तो किसी को नहीं कहता कि उनको क्या करना चाहिए या क्या नहीं ? मैं तो जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति भी नहीं चाहता और न ही ईश्वर की खोज में हूँ |
मेरा तो सीधा सा सिद्धांत है, बात समझ में आयी तो समझ लो, नहीं आयी तो जयराम जी की | आप अपना रास्ता नापो और मैं तो अपने रास्ते पर चल ही रहा हूँ | मैं किसी को सुधारने के चक्कर में भी नहीं हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ कि बिगड़ा कोई नहीं है, केवल ड्राईवर ही बेहोशी में है | और जब तक वह बेहोश है गाड़ी को सुधारने का प्रयास व्यर्थ है |
और यदि किसी को लगता है कि मैं गलत हूँ तो कृपया मुझसे दूर ही रहें | मैं नहीं चाहता मेरी बीमारी आपके जीवन को भी नरक बना दे और आप के जीवन-मरण से मुक्ति के मार्ग बंद हो जाएँ |
हे ईश्वर ! मेरी आपसे प्रार्थना है कि जितने लोग भी मोक्ष की कामना से तीर्थों और आश्रमों में पड़े हुए हैं, धर्म की दुकानें खोल रखीं हैं और ब्रोकर व एजेंट बनें हुए हैं ईश्वर के, उन सभी को मोक्ष प्रदान करें | और साथ ही सुनिश्चित करें कि वे भूल से भी दोबारा सृष्टि में टपक न पायें | हो सके तो उन्हें आज रात ही मोक्ष दे दें | उन्हें वहीँ तबला ढोलक हारमोनियम, चिमटा, मंजीरा, नक्कारे और साउंड-सिस्टम की व्यवस्था करवा दीजिये, ताकि वे २४ घंटे वहीं आपके पास आपको खुश करने के लिए भजन-कीर्तन, कव्वाली और नादिया गाते बजाते हुए नाचते रहें | वे बहुत ही दुखी हैं कि आपने उन्हें सृष्टि में भेज दिया वे सभी को कोसते फिर रहे हैं और आपकी बनाई रचनाओं का भी अपमान करने से नहीं चूकते | वे आपके वियोग में ऐसे विक्षिप्त हो गये हैं कि छोटी-छोटी बच्चियों तक का बलात्कार कर रहें हैं और चारों-ओर क़त्ल-ए-आम मचाये हुए हैं धर्म के नाम पर | मुस्लिमों को उन हूरों की याद बहुत आ रही है जो आपने छीन लिया उनसे |
हे ईश्वर उन्हें उन हूरों के पास भेज दो ताकि सृष्टि में शान्ति और भाई चारा फिर से स्थापित हो सके | जब तक ये धार्मिक और धर्म के ठेकेदार सृष्टि में रहेंगे, वे किसी को चैन से न जीने देंगे | न तो वे सहयोगी हो पाए आपके कार्यों के लिए और न ही विकास कर पाए राष्ट्र व नागरिकों का | कभी धर्म के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर लोगों को लड़ा रहें हैं, तो कभी हूरों की दलाली करते फिर रहें हैं | दुनिया भर में मार-काट मचा रहे हैं और खुद को ईश्वर बता रहे हैं | खुद तो अय्याशी में उलझे रहे और दुनिया को बैराग सिखाते रहे | पढ़े-लिखे हिन्दू नेताओं और धर्मगुरुओं को तो यह रहस्य पता चल गया कि बस अंतिम क्षणों में नारायण का नाम लो, तो बैकुंठ की प्राप्ति होती है | सो वे तो निश्चिन्त हैं लेकिन बेचारी गरीब जनता क्या करे ? उनकी तो सरकारी बाबू, थाने का चपरासी भी नहीं सुनता तो नारायण भला कहाँ से सुन लेंगे | इसलिए वे सभी विद्वान् जो जानते हैं कि स्वर्ग तक कैसे पहुँचा जा सकता है यहाँ दूकान जमा रखे हैं | जबकि मुझे विश्वास है कि बिना एजेटों के भी आप इन गरीबों की सुन सकते हैं अगर इनको सही विधि पता चल जाये आपसे बात करने की तो | –विशुद्ध चैतन्य

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