हिन्दू समेत सभी सम्प्रदाय अब किताबी धर्म मात्र बनकर रह गये हैं

सनातनी होने का एक लाभ यह भी है कि बुद्ध होने की सम्भावना है, खुद में भी खोजा जा सकता है और हुआ भी जा सकता है | जबकि आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित हिन्दू सम्प्रदाय समेत सभी में यह सम्भावना समाप्त हो गयी है | क्योंकि सभी पंथ, सम्प्रदाय अब धर्म तक की अपनी यात्रा स्थगित करके खुद हो धर्म घोषित कर चुके हैं | वे अब ऐसे पोखरों में रूपांतरित हो चुके हैं जिसमें न बाहर का जल आ सकता है और न ही भीतर का जल बाहर जा सकता है | उनकी स्थिति मृत सागर के समान हो चुकी है |

हिन्दू समेत सभी सम्प्रदाय अब किताबी धर्म मात्र बनकर रह गये हैं और आगे गति करने का अब उनके पास कोई उपाय ही नहीं बचा है | अब कोई बुद्ध, जीसस, पैगम्बर नहीं आयेंगे उनके और न ही अब कभी कोई सत्य को जान पायेगा….. उनकी विवशता है कि जो लिख दिया गया पहले कभी, वहीं ठहर गयी उनकी दुनिया, उससे आगे अब गति नहीं कर पाएंगे वे |

लेकिन सनातनियों के लिए तो मार्ग खुला है और बहुत कुछ है आगे अभी जानने के लिए…. जो जितना आगे बढ़ेगा उतना ही आधिक जान पायेगा | वैसे भी जो धर्म ठहर गया हो, जो जीवन ठहर गया हो, जो समय ठहर गया हो, जो जल ठहर गया हो…. वे सभी बीमारी और त्रासदी के कारक ही बनते हैं | यदि आगे बढ़ना है, तो भूतकाल और इतिहास को छोड़ना होगा | अगर विदेश जाना है, तो स्वदेश की धरती छोड़नी ही पड़ेगी | ऐसा नहीं हो सकता कि अपने देश में भी पैर जमा रहे और विदेश का भ्रमण भी कर लें…. जब तक हम छोड़ने का साहस नहीं कर सकते, तब तक आगे गति संभव ही नहीं है….. और यही सनातन धर्म की विशेषता है कि वह ठहरा हुआ धर्म नहीं है, वह गतिमान है और सर्वदा गतिमान ही रहेगा |

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जो सम्प्रदाय ठहर गये हैं, वे आपसी मारकाट में उलझे हैं, नफरतों के कारोबार में उलझे हुए हैं, आपसी विवादों में उलझे हुए हैं….. क्योंकि अब आगे कोई गति नहीं है, क्योंकि अब आगे कुछ नहीं है उनके लिए, उन्हें तो लड़ना है आपस में और लड़मरकर ही आगे बढ़ पायेंगे, जीते जी तो उनके लिए आगे गति करना संभव ही नहीं है |

पहले मुझे बुरा लगता था जब देखता था मंदिर-मस्जिद और धर्मो के नाम पर नफरत फैलाते, आपसे में लड़ते मरते लोगों को…. लेकिन जैसे जैसे सनातन रहस्यों को समझता जा रहा हूँ, वैसे वैसे ही यह भी समझता जा रहा हूँ कि यह सब तो नियति है | यह सब तो होना ही है क्योंकि प्रकृति किसी को ठहरने नहीं देती और जो जिद करते हैं ठहरने की उसे आगे बढ़ाने के उपाए भी वही करती है | इसलिए ही लोग ऐसी ऐसी मुर्खता पूर्ण विषयों को लेकर लड़ते-मरते हैं कि यदि कॉमेडी फिल्म बनाई जाए कभी इनकी तो शायद दुनिया की सबसे अधिक हँसाने वाली फिल्म बनेगी 🙂

किसी दिन इनकी मुर्खता से मैं भी यदि मारा गया तो वह भी एक कॉमेडी ही होगी ट्रेजेडी नहीं ! ~विशुद्ध चैतन्य

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