इन सबका धर्म और आध्यात्म से कोई लेना देना नहीं होता

बड़े खुश होते हैं दड़बों के ठेकेदार यह कह कर कि आज इतने गैर-दड़बों के भेड़ों को अपने दड़बों में शामिल कर लिया यानि धर्मांतरण करवा लिया | लेकिन क्या कभी किसी ने देखा है कि उन्हीं के दड़बों में भूख गरीबी, भूमाफियाओं और सवर्णों द्वारा किये जा रहे अत्याचारों से मुक्त करवाए लोगों की तस्वीरें दिखा कर गर्व से कहा हो, “आज अपने ही दड़बे के इतने लोगों को हमने सिद्ध कर दिया कि ईश्वरीय किताब लिखने वाले ईश्वर के आदेश से हमने इनको सुख व शांति प्रदान की |”

शायद कभी देखा हो किसी ने कि ये धर्मों के ठेकेदार किसी गाँव से गुजरे हों और गरीबों के टूटे फूटे मकानों की मरम्मत ही करवा दिए हों | लेकिन मंदिरों/मस्जिदों के लिए मरने मारने पर उतारू हैं |

जरा सोचिये !!!

यदि मंदिरों/मस्जिदों/दरगाहों में चढ़ावे चढ़ने ही बंद हो जाएँ, तो क्या ये लोग उसपर फूटी कौड़ी भी खर्च करना चाहेंगे ?

तो सारांश यह कि अपने अपने दड़बों में दूसरे दड़बों से लोगों को खींचने का खेल, मंदिर/मस्जिद और धर्म-जाति के खेल… इन सबका धर्म और आध्यात्म से कोई लेना देना नहीं होता | केवल धंधा है, राजनीती है, नौटंकी है | ~विशुद्ध चैतन्य

यह तस्वीर उस महिला की है जिसे उन दबंगों द्वारा पीटा जा रहा था, जिनके खिलाफ इस महिला ने शिकायत की थी क्योंकि इन लो लोगों ने उसके घर के सामने रोड़ी और ईंटा उतरवा दिया था | जिसके कारण उनको घर से बाहर जाने में परेशानी हो रही थी | कई बार कहने पर भी नहीं हटवाया, उलटे गुंडागर्दी पर उतर आये थे… जिससे महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी और ये लोग गिरफ्तार हो गये थे | बाद में जैसे ही जमानत में छूटे ये लोग महिला को पेड़ से बांध कर पीटने लगे और गाँव खड़ा होकर तमाशा देखने लगा | बाद में पुलिस ने महिला को अस्पताल में गंभीर अवस्था में भर्ती करवाया |

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