वह स्वर्णयुग अवश्य लौटेगा जब हम सब पुष्पक विमान का आनंद ले सकेंगे

रामराज्य
समय के साथ सभी प्रगति करते हैं मनुष्यों ने भी की | पहले तीर कमान से लड़ते थे अब एके ४७ और ५६ से लड़ते हैं | पहले केवल जंगली पशु-पक्षियों से लड़ते थे, अब आतंकियों और भ्रष्टाचारियों से लड़ते हैं | पहले पैदल यात्रा करते थे, अब मेट्रो और बुलेट ट्रेन में | पहले शिक्षा का अर्थ होता था, जीवनोपयोगी व आत्मरक्षा का ज्ञान अर्जित करना, लेकिन अब शिक्षा का अर्थ होता है डिग्री लेना और नौकरी करना | पहले धर्म का अर्थ होता था अपने परिवार की रक्षा, अपने कबीले की रक्षा सबके लिए भोजन पानी की व्यवस्था और अपने स्वास्थ्य व जीवन की रक्षा….लेकिन अब धर्म का अर्थ होता है, टोपी तिलक लगाना, हरा या भगवा पहनना, दूसरे पंथों और धर्मों की निंदा करना, अपने लोगों के हित के लिए कार्य न करते हुए दूसरों को कैसे बर्बाद कर सकते हैं उसके उपाय करना… आदि |
तो इस प्रकार यदि ध्यान दें तो मानव जाति अपने ही समकक्ष पशु-पक्षियों की प्रजातियों से बहुत ही आगे निकल गयी | पशु-पक्षी आज भी वही सब कर रहे हैं जो पहले करते थे, कोई विकास नहीं किया उन्होंने | वे आज भी सुबह सोकर उठते हैं, भोजन की तलाश में निकलते हैं, और शाम को घर आ जाते हैं | वे आज भी सेक्स, बच्चे, उनकी सुरक्षा, उनकी शिक्षा में ही व्यस्त रहते हैं | वे आज भी प्राचीन परंपरा पर ही चल रहें हैं और आज भी वे अपने अपने ग्रुप बनाकर रहते हैं और दूसरे ग्रुप से झगड़ते रहते है |
लेकिन न जाने क्यों मैंने कोई विकास नहीं किया ? मैं आज भी वहीँ का वहीँ रह गया मानसिक धरातल पर | मैं आज भी सोचता हूँ कि रामराज्य होता तो कितना अच्छा होता, दहेज़ हत्या से मुक्त समाज होता हमारा | जिस किसी को अपनी पत्नी पर शक होता वह उसकी अग्नि परीक्षा लेने का अधिकारी होता और सरकार आग लगाने के लिए पेट्रोल पर विशेष छूट देती | मैं आज भी सोचता हूँ कि चोरी-बलात्कार जैसी सजा के लिए हाथ काटने, सर धड से अलग करने जैसी सजा होती तो, रामराज्य स्थापित रहता | मैं आज भी सोचता हूँ कि बलात्कार की समस्या मुगलों के आने से पहले कभी नहीं रही क्योंकि उस समय देवदासियां और नगरवधुएं हुआ करतीं थी बलात्कारियों पर लगाम लगाने के लिए | मुझे आज भी लगता है कि सेना पर व्यर्थ ही पैसा खर्च किया जाता है, जबकि हमारे पंडित-पुरोहितों को सीमा पर तैनात करना चाहिए | क्योंकि मन्त्रों में १००० परमाणु बम से अधिक की शक्ति होती है | ये लोग सीमा पर शत्रु सैनिकों और आतंकियों पर वशीकरण और मारण मन्त्रों का प्रयोग करके सीमा को सुरक्षित रख सकते हैं….. ..
न जाने मुझे भी क्या हो जाता है…..कब मैं विकसित व उन्नत हो पाऊंगा यही नहीं समझ में आ रहा | मुझे ख़ुशी होती है यह जानकर कि धर्म के रक्षकों ने बीड़ा उठा रखा है भारत में रामराज्य लाने का और एक दिन वह स्वर्णयुग अवश्य लौटेगा जब हम सब पुष्पक विमान का आनंद ले सकेंगे | वह दिन फिर लौटेगा जब हम अश्वमेघ यज्ञ किया करेंगे | वह दिन लौटेगा जब हम संस्कृत में ही बात किया करेंगे | वह दिन अवश्य लौटेगा जब न फेसबुक होगा, न मोबाइल होगा, न मेट्रो होंगे न हवाईजाहज होंगे, न कम्प्यूटर होंगे, और न ही होगी बिकाऊ मीडिया | एक घुडसवार हुआ करेगा जो सबकी चिट्ठी पत्री लेकर गाँव गाँव में बाँटा करेगा…..जब भी कभी कोई युद्ध हुआ करेगा तो सब लोग विश्वशान्ति यज्ञ किया करेंगे और युद्ध टल जाया करेगा | जैसे राम-रावण युद्ध, महाभारत युद्ध, कलिंगा युद्ध…. केवल किस्से कहानियाँ हैं, वास्तव में हमने विश्वशांति यज्ञ करके उन युद्धों को होने ही नहीं दिया था | यह तो सब विदेशियों ने हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए साजिश रचकर मनगढ़ंत कहानियाँ बनाई हैं | हवाई जहाज का नक्शा हमसे चुराया, कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग चुराई यहाँ से, रोकेट और रोबोट की तकनीकी चुराई और तो और परमाणु बम से लेकर एके ४७ तक की तकनीकी चुराकर ले गये वे हरामखोर |
हम ने तो जानबूझ कर ये सब चीजें नहीं बनाई थी क्योंकि हम तो केवल मन्त्र पढ़ देते थे और काम हो जाता था | कम्प्यूटर हमने इसलिए नहीं बनाई थी क्योंकि कोई अंग्रेजी नहीं जानता था, तो क्या करते बनाकर | बेकार पड़ा रहता यहाँ पर | -विशुद्ध चैतन्य

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