एक ही काम को हम दो तरीकों से कर सकते हैं;

एक ही काम को हम दो तरीकों से कर सकते हैं;

पहला है स्वाभाविक तरीका और दूसरा है विवशता |

पहले तरीके से काम करने पर हमें समय का पता नहीं चल पाता और काम समाप्त करने पर असीम शांति व संतुष्टि मिलती है | जितना अधिक समय हम उस काम को देते है, उतना ही अधिक हमारे भीतर उत्साह व प्रसन्नता का संचार होता है और कई घंटे काम करने के बाद भी थकान का अनुभव नहीं होता | हमें इस बात की भी परवाह नहीं होती कि हमें उस काम की कोई कीमत या प्रशंसा मिलेगी या नहीं |

उदाहरण के लिए मीरा को लें | वह अपनी ही भक्ति में मगन थी और उसी में ऐसी खो गयी कि दुनिया ही भूल गयी | उदाहरण के लिए आप किसी छोटे बच्चे को लें जो खेल में व्यस्त है | उदाहरण के लिए आप किस संगीतकार या चित्रकार को लें जो अपने कामों में व्यस्त हैं….

दूसरे तरीके से किये गये कामों से थकान बहुत जल्दी होने लगती है | हर समय हम अपने काम का बखान करने लगते हैं | हम यह बताने लगते हैं कि कितनी मेहनत हम कर रहे हैं | हम हर काम की कीमत लगाने लगते हैं और एक समय ऐसा आ जाता है कि कोई मृत्यु के कगार पर पहुँचा हुआ हो तब भी हम मोल-भाव करने लगते हैं बनिस्बत उसे बचाने के |

मैंने कई देवी-देवताओं के भक्तों को देखा है जो मंदिर में साफ सफाई करते समय भी यह अपेक्षा करते है कि लोग उनकी तारीफ़ करें | कई लोगों को देखा है जो पूजा-पाठ भी ऐसे करते हैं जैसे कि नौकरी कर रहे हैं | कुछ लोग सुबह की आरती करेंगे और शाम की आरती में गायब हो जायेंगे क्योंकि सुबह की आरती उसकी ड्यूटी थी और शाम की किसी और की | ऐसे काम करने वाले हमेशा आपको चिडचिडे, शक्की ही मिलेंगे और हमेशा दूसरों को कोसते मिलेंगे | इनका सारा ध्यान दूसरों पर ही रहता है कि कौन क्या कर रहा है और कौन क्या नहीं | दिन भर ये लोग शिकायतें करे ही मिलेंगे या लड़ते-झगड़ते चीखते चिल्लाते |

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तो आप जो भी काम करें, चाहे वह पूजा-पाठ हो या कारोबार…यदि वह विवशता में कर रहे हैं तो उपाय खोजें कि उस विवशता से कैसे मुक्त हुआ जाए | हो सकता है आर्थिक या सामाजिक विवशता हो… तो उपाय खोजिये कि दूसरा विकल्प क्या है | हो सकता है आपके भीतर कोई ऐसी कला हो, जिससे आप आर्थिक समस्या भी सुलझा सकते हैं और स्वाभाविक काम भी कर सकते हैं | जैसे कि संगीत, अध्यापन, गायन, चित्रकला, कृषि, बागबानी… या अन्य कोई भी | जो भी करें स्वाभाविक रूप से करें…दूसरों की नकल न करें | दूसरों की नकल करके कोई भी व्यक्ति न समृद्ध हो पाया है और न ही महान बन पाया है | ~विशुद्ध चैतन्य

“This is the real secret of life — to be completely engaged with what you are doing in the here and now. And instead of calling it work, realize it is play.”- Alan Watts

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