हम उनका साथ देते हैं जो मानवीयता से परे होते हैं..

जापान के हिरोशिमा की धरती के बारे में तो यह भी नहीं कहा जा सकता कि यह लाखों लोगों के खून से सनी है क्योंकि जिस तरह वे लाखों लोग मारा गए, उनका खून भी भाप बनकर उड़ गया था. जो बचा वह इंसानियत की राख थी. इंसानियत के इस सबसे बड़े कत्ल के लिए जिम्मेदार देश अमेरिका का कोई राष्ट्रपति पहली बार उस तबाही का मंजर देखने हिरोशिमा जाएगा. बराक ओबामा इस महीने के आखिर में हिरोशिमा जाएंगे.
बातों का मरहम लेकर हिरोशिमा जाएंगे ओबामा - दुनिया - DW.COM - 10.05.2016चक्रवर्ती सम्राट बनने की लालसा हर युग में रही और शायद हमेशा रहेगी | शायद यही सनातन लालसा है और हर महत्वाकांक्षी व्यक्ति में, संगठन, समाज, सम्प्रदाय व राष्ट्र में अनुवांशिक रूप से उपस्थित रहती है | बस अवसर व सामर्थ्य मिलने की देर होती है, और कोई सम्राट अशोक बन जाता है, तो कोई रावण तो कोई हिटलर | मानवता की बातें केवल निर्बल, असहाय लोग किया करते हैं | और आश्चर्य की बात है, जो सर्वाधिक अमानवीयता से भरा हो, वह सबसे अधिक ढोंग करता है मानवता का | उसे चिंता होती है दूसरे देशों में हो रहे नरसंहारों की, वह पाठ पढ़ाता है कैसे नरसंहार को रोका जाए, लेकिन भीतर ही भीतर खाद-पानी सब देता रहता है, ताकि नरसंहार जारी रहे |
जापान में तो देशभक्तों की कमी नहीं है क्योंकि उनकी जींस में ही देशभक्ति है | उन्होंने अपने बिखरे राष्ट्र को फिर से ऊँचाई पर पहुँचा दिया | लेकिन हम क्या करें ?
हम तो अमेरिका के तलुए चाटने को अपना सौभाग्य समझते हैं | हम तो खुश होते हैं कि अमेरिका ने हमारे सर पर हाथ फेरा, हमें कार में घुमाया, हमें गोलगप्पे खिलाया….
खैर हम बात कर रहे थे अमानवीयता से भरे मानवीयता की | जिस प्रकार अमेरिका मानवीयता से भरकर जापान में परमाणु बम से ढाई लाख लोगों का नरसंहार किया, उससे कोई भी अनुमान लगा सकता है कि वह कितना मानवीय व हृदय का विशाल राष्ट्र है | ईराक को बर्बाद किया अपनी मनगढ़ंत कहानी सुना कर, अलकायदा, आइसिस उसी की नाजायज औलादें हैं | फिर भी दुनिया उसकी जय जयकार करती है | शायद हम नरपिशाचों को आज भी पूजनीय मानते हैं |
हाँ सही तो है… हम नरपिशाचों, हैवानों, दरिंदों के उपासक ही तो हैं !!! आज अपने ही देश में देख लीजिये, जो जितना हिंसक है, जो जितने अधिक नफरत से भरा है, जो जितने अधिक दंगे-फसाद करवाने की कोशिशें करता है, जो जितने ज़हर उगलता है दूसरे सम्प्रदायों, मान्यताओं के लिए वह उतना ही सम्मानित माना जाता है | वोट भी उसे ही सर्वाधिक मिलते हैं, जिनके खाते में सर्वाधिक जघन्य अपराधिक रिकार्ड्स दर्ज हों |
आजकल अचानक सैनिक महान हो गये क्योंकि वे कश्मीरियों की जिंदगी नरक बना रखे हैं… हर किसी के मन में सैनिकों के लिए श्रृद्धा का भाव उमड़ आया, लेकिन यही श्रृद्धा का भाव गायव हो जाता है जब किसी सैनिक की भूमि भूमाफिया हड़प लेता है, जब वे वन रेंक वन पेंशन की मांग करते हैं तो पुलिस ही उनपर डंडे बरसाती है, जब शौर्य पदक विजेता के रिश्तेदार दर दर ठोकरें खाते हैं.. तब किसी को उनपर तरस नहीं आता | पिछले वर्ष कुछ सैनिकों ने मुझसे संपर्क किया कि मैं उनकी समस्याएं अपने पोस्ट पर लिखूं | लेकिन वे सामने नहीं आना चाहते थे क्योंकि उनपर एक्शन हो सकता था | मैंने उनसे कहा कि सेना के सारे केस सिविल से बाहर के हैं, उन्हें हम यदि उठाएंगे, तो समस्या सुलझेगी नहीं, बल्कि उलझ ही जाएगी | उसके बाद एक दो सैनिक मीडिया में आये भी अपनी दुखभरी दास्ताँ सुनाई भी, लेकिन क्या हुआ ? सब रफा-दफा हो गया… उसके बाद पता ही नहीं चला कि उनका क्या हुआ और क्या नहीं |
तो हम उनका साथ देते हैं जो अत्याचार करते हैं, हम उनका साथ देते हैं जो मानवीयता से परे होते हैं… क्योंकि हमारे भीतर नफरत भरा हुआ है, हमारे भीतर क्रोध भरा हुआ है, हमारे भीतर बेबसी भरी हुई है कुछ न कर पाने की | हम महंगाई से त्रस्त हैं, हम पारिवारिक किच-किच से तंग हैं, सेलेरी कम पड़ रही है, सरकार कुछ सुन नहीं रही है….. और यह सब हम किसी पर निकालना चाहते हैं | तो बहाना मिल जाता है कश्मीरियों का, नक्सलियों का, आदिवासियों का…. जितने ये लोग मरते हैं, हमारी आत्मा को शांति मिलती है, एक तृप्ति मिलती है.. क्योंकि हमारे भीतर के पिशाच को इन सबसे आनंद मिलता है |
हम कभी उनकी समस्या नहीं सुनना चाहते, हम कभी उनकी समस्याएं नहीं सुलझाना चाहते हैं…. यदि अमेरिका की तरह पावर हो हमारे हाथ में तो हम एक परमाणु बम कश्मीर में गिराएंगे, एक बस्तर में गिराएंगे, एक नार्थईस्ट में गिराएंगे… अरे एक क्यों…. जितने गाँव हैं उनमे उतने गिराएंगे… न रहेगा बांस और न बजेगी बाँसुरी | हमें तो अमेरिका की तरह ही सरकार चाहिए…बस !!! ~विशुद्ध चैतन्य
Why is the ‘non-lethal’ pellet gun killing people in Kashmir?

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