जिन्होंने धर्म पहले ही छोड़ दिया, वे धर्म छोड़ने की धमकी दे रहे हैं !

एक खबर पढ़ी आज मैंने…..
मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा में डीजे बजाने पर लगे प्रतिबन्ध को लेकर केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बाल्यान के बयान के बाद कांवरियों में जोश आ गया है. जिसे लेकर आज मुरादाबाद में हजारों कांवरियों ने जिला अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और जिला अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर 24 घंटे के अन्दर कांवड़ यात्रा में डीजे पर लगी पाबन्दी नहीं हटाई गयी तो वो कलेक्ट्रेट में 15 हजार कांवरियों के साथ धर्म परिवर्तन करेंगे. केवल इतना ही नहीं इसके साथ ही कावरियों ने उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आज़म खान से अपील की है कि वो आकर उन्हें इस्लाम धर्म कबूल कराएं. प्रदर्शनकारी कांवरियों का आरोप है कि देश में उन्हें धार्मिक कार्यक्रम करने नहीं दिए जा रहे हैं. ऐसे में उनके सामने एक ही विकल्प है कि वो धर्म परिवर्तन कर लें. मुरादाबाद में कावारियों की धर्म परिवर्तन करने की धमकी से प्रशासन के होश उड़े हुए हैं और अब वो नाराज़ काँवरियों को किसी तरह समझाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन कांवरिये डीजे पर लगी पाबन्दी हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं.
motorcycle0150815धर्मपरिवर्तन, धर्म छोड़ने की धमकी देना वर्तमान में एक फैशन सा हो गया | आये दिन कोई न कोई धर्म छोड़ने की धमकी देता फिर रहा है | अरे कोई इन मूर्खों को समझाओ कि धर्म तो ये लोग पहले ही छोड़ चुके हैं, धर्म की हत्या तो पहले ही कर दिए अब तो केवल लाश ढो रहे हैं धर्म नाम का, धर्म को जीवित ही कहाँ रखा इन्होने ? केवल धर्म के नाम पर दिखावा, ढकोसले के सिवाय कर क्या रहे हैं ये लोग ? बेहतर है कि धर्म छोड़ने की धमकी देकर लोगों को मुर्ख बनाने के, स्वीकार कर लें कि वे धर्म से बहुत पहले ही विमुख हो चुके हैं |
हिन्दुओं के किस धार्मिक ग्रन्थ में लिखा है कावंड यात्रा पर डीजे बजाना अनिवार्य है ? लिखा है कहीं ? कावंड यात्रा के पदयात्रा है, लेकिन लोग मोटरसाइकिल पर यात्रा करते हैं, कारों, ट्रकों में यात्रा करते हैं…. तो कांवड़ यात्रा हो कहाँ रही है, केवल ढोंग ही तो हो रहा है ?
731738kanwarकई लोगों को मैंने देखा है जमीन पर दंडवत करते हुए यात्रा कर रहे हैं, कई लोग हैं जो पूरी ईमानदारी से बिना किसी की सहायता लिए पैदल ही यात्रा करते हैं, उनको नमन है… वे हैं सच्चे समर्पित धार्मिक | उनको न तो डीजे चाहिए होता है और न ही मोटरसाईकिल या कार | कांवड़ यात्रा का उद्देश्य ही समझ में आ जाता तो ये धर्मपरिवर्तन की धमकी न देते और वह भी डीजे के लिए | हाँ ग्रुप में नाल, मृदंग या चिमटा, खड़ताल आदि के साथ कीर्तन करते हुए चलते तो वह अधिक आकर्षक व चित को हर्षित करने वाला लगता, लेकिन छिछोरे फ़िल्मी गानों पर केवल भोले बाबा का नाम चिपका कर शोर करने से ऐसा लगता है जैसे बिसलरी की बोतल में कोई दारु पी रहा हो | इसलिए यदि आपकी शिव के प्रति भक्ति डीजे पर आधारित है तो रहने ही दीजिये ऐसी नौटंकी… जनता को तो मुर्ख बेशक बना लोगे, लेकिन भोले बाबा को कैसे मुर्ख बना पाओगे ?
~विशुद्ध चैतन्य
अब इस भजन में देखिये… इसमें किसकी भक्ति की जा रही है ? क्या ऐसी ही होती है भोले की भक्ति ?
[youtube https://www.youtube.com/watch?v=z2dYFMhHGww]

READ  लिखी हुई सभी बातें अकाट्य सत्य नहीं हो सकतीं क्योंकि इनमें हेर-फेर हो सकते हैं

लेख से सम्बंधित अपने विचार अवश्य रखें

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of