दड़बा कोई भी हो, धर्म से उनका कोई लेना देना नहीं होता

एक सज्जन ने मुझसे प्रश्न किया, “मैं आपके विचारों से बहुत हद तक सहमत हूँ….इस्लाम पर आपके क्या विचार हैं ?

मुझसे ऐसे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं क्योंकि मैं इस्लाम पर, ईसाईयों पर, सिक्खों पर, बौद्धों पर कुछ नहीं लिखता या कभी लिखता भी हूँ तो हाई-लाइट नहीं हो पाता | मैं इन सब पर नहीं लिखता क्योंकि मेरा कुछ भी लिखना इन सम्प्रदायों के लिए सकारात्मक उद्देश्यों के लिए प्रयोग नहीं होगा, बल्कि हिंदुत्व के मूर्ख ठेकेदार उसपर भी अपनी रोटियाँ सेंकनी शुरू कर देंगे |

यदि कोई हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई नाम के दड़बों से बाहर निकल पाए कभी और सनातनी हो जाए या नास्तिक हो जाये तो वह देख पायेगा कि मुस्लिम समाज को सबसे अधिक तिरस्कृत किया जा रहा है | कहा जा रहा है कि मुस्लिम ही सर्वाधिक हत्याएं करते आ रहे हैं धर्म के नाम पर | मुगलों से लेकर अलकायदा और आइसिस तक सभी नर-पिशाच ही हैं और आइसिस का आतंक तो सारी दुनिया के सामने है ही |

मुगलों का अत्याचार यदि हम देखें तो उन्होंने वही किया जो एक पराजीत देश के साथ विजेता करता है | हिन्दू सम्राटों में अशोक द्वारा किये गये नरसंहार का जिक्र कभी नहीं किया जाता…..ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा किये गये नरसंहारों का भी कभी कोई जिक्र नहीं करना चाहता | अब जरा ईसाईयों द्वारा की गयी हत्याओं और अत्याचारों की खोजबीन कीजिये, यहूदियों द्वारा की गयी हत्याओं और अत्याचारों की खोजबीन कीजिये, अमेरिका द्वारा वियेतनाम जैसे छोटे व गरीब देश के साथ युद्ध की बात कीजिये, ईराक और अफगानिस्तान में अमेरिका द्वारा मारे गये निर्दोषों की गिनती कीजिये, हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु विस्फोट किस मुस्लिम नेता या राष्ट्र ने किया था उसका जरा पता लगाइए……. ?

तो आप पायेंगे कि भारत में जो उपद्रव हो रहा है वह भी प्रायोजित है और अमेरिका के पालतू पिल्ले ही यह सब उपद्रव कर रहे हैं | भारत में हिन्दू-मुस्लिम विवाद स्वाभाविक नहीं, बल्कि बनाया गया है | इसे बनाए रखने में ही नेताओं और धर्मों के ठेकेदारों का आस्तित्व व कमाई टिकी हुई है | धर्म के नाम पर एक दूसरे के प्रति डरा कर ये धर्मों के ठेकेदार अपनी अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेंकते हैं, बेरोजगारों, सड़कछाप टपोरियों और आवारा युवाओं की लम्पट सेनायें बनाकर उत्पात मचाते हैं…. फिर भी सम्मानित और धार्मिक कहलाते हैं | आइसिस भी अमेरिका की नाजायज औलाद है और अलकायदा भी……

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इस्लामिक लोगों का दुर्भाग्य यह है कि उनका धर्म अब ठहर गया है | उनके धर्म में अब कोई पीर-पैगम्बर नहीं आएगा | अब उनको राह दिखाने वाला कोई नहीं आएगा | अब उनके धर्म में कोई भी जागृत उन्नत श्रेष्ठ आत्माएं जन्म नहीं ले पाएंगी…. क्योंकि उनका धर्म ठहर गया है | अब वे लाचार हैं अपने शास्त्रों और धर्मग्रन्थों को ढोने के लिए… उनके पास आगे बढ़ने का कोई मार्ग ही नहीं बचा अब | अब लौटना ही उनके पास एकमात्र रास्ता है | अब उनके लिए अपने धर्मग्रंथों में संशोधन करने योग्य भी कोई नहीं है…. जो लिख दिया गया उसे मानने के सिवाय कोई उपाए उनके पास है ही नहीं |

इसलिए कभी ईश निन्दा के नाम पर धर्मग्रंथों पर प्रश्न उठाने वालों की हत्या करके जागृत लोगों की आवाज दबाना पड़ता है, तो कभी अल्लाह का खौफ दिखाकर लोगो को जागृत होने से रोकना पड़ता है | परिणाम यह हुआ कि वे इस्लाम और अल्लाह के नाम पर हो रहे उपद्रवों का विरोध तुरंत नहीं कर पाते और न ही कह पाते हैं कि अल्लाह व इस्लाम के नाम पर उपद्रव करने वालों का हम केवल विरोध ही नहीं करते, बल्कि उनको अपने सम्प्रदाय से बेदखल भी करते हैं | भारत के मुस्लिम कम से कम इस मामले में अधिक जागरुक हैं और खुलकर विरोध व्यक्त करना भी जानते हैं | फिर भी जब तक ये लोग विरोध व्यक्त करते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है |

अब प्रश्न यह था कि इस्लाम पर मेरे विचार क्या हैं ? तो विचार मेरे वही हैं जो हिंदु नाम के दड़बे के लिए हैं, जो ईसाई नाम के दड़बे के लिए….दड़बा कोई भी हो, धर्म से उनका कोई लेना देना नहीं होता | वह तो प्रोपर्टी, पैसा और सत्ता का खेल मात्र होता है… धर्म वहां निभाता कौन है ? यदि वास्तव में कोई धर्म को समझ ले, जान जाए, आचरण में ले आये तो हर सम्प्रदायों में सुख व शांति स्थापित हो जाये | कोई भी किसी दूसरे सम्प्रदाय से नफरत न करे और कोई भी सम्प्रदाय दूसरे से श्रेष्ठ या निम्न दिखाई न पड़े….. लेकिन व्यवहारिक रूप में ऐसा होता नहीं है |

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मैं यदि हिंदुत्व के नाम पर हो रहे उपद्रवों का विरोध कर पाता हूँ तो उसका प्रमुख कारण है सनातन धर्म | मैं हिन्दू नाम के दड़बे से मुक्त हूँ और सनातनी हूँ, इसलिए निर्भीकता है विरोध करने का | लेकिन इस्लाम में कोई विरोध करे तो ईशनिंदा हो जाए, धर्म का अपमान हो जाये…. और वे अपनी जगह सही भी हैं | क्योंकि उनका धर्म ठहरी हुई झील है | सीमित ही बचा है उसमें और कोई उसपर भी सवाल खड़े करे तो समस्या हो जाएगी | उनका कोई पैगम्बर नहीं आने वाला अब उसे सही करने… तो जो कुछ है उसे संभाले रखना ही उनकी विवशता है | उनका धर्म किताबों तक ही सीमित है, उससे बाहर तो धर्म है ही नहीं | फिर उनका ईश्वर निराकार है… तो कोई ठोस आधार भी नहीं है….. लेकिन हमारे साथ तो ऐसी समस्या है ही नहीं | दुर्गा, काली, भैरव, लक्ष्मी….. ब्रह्मा, विष्णु, महेश से लेकर पायलट बाबा, लेपटॉप बाबा, गोल्डन बाबा, आईफोन बाबा….. तक उपलब्ध हैं | हमारे पास इतने सारे देवी देवता व अराध्य हैं कि हमको चिंता करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है |

अब यदि आप समझने का प्रयास करें तो इस्लाम अपनी संकीर्ण मानसिकता के कारण ही कलंकित हो रहा है और फिर उनके प्रमुख विरोधी ईसाई, यहूदी, और हिंदुत्व के ठेकेदार हैं | और ये सभी आपस में एकजुट हैं…. इसलिए कहा जाता है कि पूरा विश्व ही इस्लाम का विरोधी है | इस्लाम के नाम पर उपद्रव करने वाले वास्तव में ईसाईयों और यहूदियों द्वारा पाले गये पिट्ठू ही हैं….. और वह भी इसलिए ताकि इस्लाम को बदनाम किया जा सके | ठीक वही यहाँ हिंदुत्व के नाम पर शुरू किया जा रहा है विदेशियों के पालतू पिट्ठुओं के द्वारा…. ताकि एक दिन यह बताया जाए कि हिन्दू भी मुस्लिमों की तरह ही आतंकी होते हैं |

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अरे इस खेल को समझना कोई बहुत मुश्किल थोड़े ही है, शिया सुन्नी का आपस में लड़ना ही देख लो ? जब मुस्लिमों को आपस में ही लड़ाया जा सकता है, तो भारत में आपस में लड़वाने के लिए बहुत कुछ है | हिन्दू-मुस्लिम, काँग्रेसी-भाजपाई, आदिवासी और ब्राह्मणवादी…… अरे भारत में तो यदि गृहयुद्ध छिड़ गया तो समझो अमेरिका से अमीर पूरे विश्व में फिर कोई देश नहीं रह जायेगा | उसके सारे हथियारों के कारखाने दिन रात भी काम करेंगे, दस गुना अधिक कीमत में भी हथियार बेचेंगे तब भी वे भारत में हथियारों की मांग पूरी नहीं कर पाएंगे | तो इस खेल को समझिये… ये सारा विवाद हथियारों के मार्किट में आई मंदी को दूर करने के लिए ही हैं…. जिन देशों के पास हथियार अब जंग खा रहे हैं, वे उसे ठिकाने लगाना चाहते हैं | और यह सब तभी होगा जब हम सब आपस में लड़ेंगे… चाहे जैसे भी हो…..

मैं जानता हूँ, यह पोस्ट धार्मिकों के सर के ऊपर से निकल जायेगी…. कोई बात नहीं… दो चार को ही समझ में आ जाये वही बहुत है | ~विशुद्ध चैतन्य

इस लिंक को भी देखें :

CBS News Anchor Explains How and Why the US Created ISIS

 

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