हिंदुत्व के पतन का कारण

काबुल जो भगवान राम के पुत्र कुश का बनाया शहर था, आज वहाँ एक भी मंदिर नही बचा !गांधार जिसका विवरण महाभारत मे है, जहां की रानी गांधारी थी, आज उसका नाम कंधार हो चूका है, और वहाँ आज एक भी हिंदू नही बचा ! कम्बोडिया जहां राजा सूर्य देव बर्मन ने दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर अंकोरवाट बनाया, आज वहाँ भी हिंदू नही है ! बाली द्वीप मे 20 साल पहले तक 90% हिंदू थे, आज सिर्फ 20% बचे है ! कश्मीर घाटी मे सिर्फ 20 साल पहले 50% हिंदू थे, आज एक भी हिंदू नही बचा ! केरल मे 10 साल पहले तक 60% जनसंख्या हिन्दुओ की थी, आज सिर्फ 10% हिंदू केरल मे है ! नोर्थ ईस्ट जैसे सिक्किम, नागालैंड, आसाम आदि मे हिंदू हर रोज मारे या भगाए जाते है, या उनका धर्मपरिवर्तन हो रहा है !”

उपरोक्त वक्तव्य अक्सर सुनने को मिल जाते हैं और कई बार तो बड़े लम्बे-लम्बे पोस्ट मुझे व्हाट्सएप या मेसेंजर में पर्सनली भेजकर विद्वान लोग मुझ भटके हुए को राह पर लाने का प्रयास करते हैं | लगभग सभी हिंदूवादी, ब्राहमणवादी, दक्षिणपंथी मुझे वामपंथी मानते हैं और चाहते हैं कि मैं सुधर जाऊं और हिंदुत्व की रक्षा करने के लिए उन्हीं की तरह ‘परधर्म निंदा परम सुखम्’ सिद्धांत को अपना लूं |दुनिया से हिंदुत्व क्यों मिट गया उसकी चिंता करने से बेहतर है कि हिंदुत्व भारत में बचा भी है या नहीं, उसकी खोज की जाये | चिंता इस बात की की जाए कि लुप्त हो चुके हिन्दुओं को खोजकर उन्हें अपना गुरु बनायें और हिंदुत्व को भारत से हमेशा के लिए लुप्त होने से बचाएं |

हिंदुत्व है क्या पहले तो वही नहीं पता इन हिंदुत्व के ठेकेदारों को | ये लोग जिसे हिंदुत्व मान रहे हैं वह ब्राह्मणवाद है हिंदुत्व नहीं | ब्राहमणवाद और इस्लाम में समानता यह है कि दोनों ही ईश्वरीय ग्रंथों पर टिके हुए हैं | ग्रन्थ हटा दो तो इनका नामों निशान मिट जाए, यही कारण हैं कि ग्रंथों को ये लोग अपनी जान से अधिक प्रेम करते हैं | अपने संप्रदाय में कोई भूखा मर जाये तो इनके धर्म या ग्रन्थ या ईश्वरीय वाणी का अपमान नहीं होगा, लेकिन इनके धर्म ग्रन्थ का कोई पन्ना फट जाए तो शहर में आग लगा देंगे | दूसरी समानता यह है कि इनके कर्मकांड तिलक टोपी बहुत महत्वपूर्ण हैं | दिन भर चाहे सरे बाजार माँ-बहन की इज्ज़त नीलाम करते रहेंगे, उनका मौखिक बलात्कार करते रहेंगे…तब इनके धर्म और इनकी भावनाएं आहत नहीं होंगी, लेकिन कोई इनकी टोपी, तिलक पर ऊँगली उठा दे तो फिर देखो… कैसे इनकी भावनायें आहत होतीं हैं | तीसरी समानता यह है कि ये लोग अपने पड़ोस में किसी भूखे को खाना नहीं खिलाएंगे, न ही किसी पीड़ित की कोई सहायता करेंगे… सब ईश्वर/अल्लाह/सरकार की जिम्मेदारी, लेकिन दूसरे देशों की समस्याओं से हमेशा दुखी रहेंगे | और कई बार तो इतने दुखी हो जाते हैं कि सड़कों में तोड़फोड़ करने लगते हैं, मंदिर/मस्जिदों को आग लगाने लगते हैं, घरों में घुसकर स्त्रियों, बच्चियों से बलात्कार करने लगते हैं, हत्याएं करने लगते हैं | चौथी समानता यह है कि दोनों एक दूसरे के धर्म ग्रंथों को बड़ी श्रृद्धा से पढ़ते हैं और फिर खोज खोज कर उसमें से बुराइयाँ निकालकर यह दिखाना शुरू करते हैं कि दूसरा धर्म कितना नीच है और हम कितने श्रेष्ठ |

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लेकिन हिंदुत्व नहीं है यह और न ही सनातन धर्म है | हिंदुत्व है सम्पूर्ण भारत वर्ष में जितने भी प्रान्त हैं, जितने भी संस्कृतियाँ हैं, जितनी भी मान्यताएं हैं, उन सभी का समा लेने वाला एक नाम | हिंदुत्व कोई इस्लाम या इसाई जैसा किताबों पर सिमटा हुआ धर्म नहीं है की किताब को कुछ हो गया तो धर्म संकट में पड़ जायेगा | हिंदुत्व की विशेषता यह है कि इसमें सभी के लिए समान भाव है इसलिए ही कहा गया है, “सर्वधर्म समभाव” |

वेदान्त का सर्वविदित सूत्र है – एकं सद विप्रा बहुधा वदन्ति – एक ही सत्य विद्वान अनेक तरह से कहते हैं। यह कहना कि मेरे ग्रन्थ में प्रतिपादित सत्य ही अन्तिम सत्य है, बाकी सब मिथ्या, घोर अज्ञान है। आज दुनिया में फैली अशान्ति और हिंसा का यही मूल कारण है। इतिहास साक्षी है कि इस विश्व में जितना नरसंहार धर्म के नाम पर हुआ है, उतना प्रथम-द्वितीय विश्वयुद्ध और हिरोशिमा-नागासाकी पर अणु बम के प्रहार से या किसी सुनामी से नहीं हुआ है।

लेकिन ये दक्षिणपंथी हिंदुत्व के ठेकेदार कर क्या रहे हैं ? क्या ये हिंदुत्व को अपने आचरण में उतार पाए ?

नहीं ये लोग वही कर रहे हैं जो अफगानिस्तान के मुस्लिमों ने किया, पाकिस्तान के मुस्लिमों ने किया, बंगलादेश के मुस्लिमों ने किया क्योंकि इन्होने उन्हें अपना आदर्श बना रखा है | और यदि उनको अपना आदर्श बना ही लिया तो फिर ये हिंदुत्व की ठेकेदारी छोड़ दो और इस्लाम ही अपना लो, कम से कम वास्तविक हिन्दू शर्मिंदा तो नहीं होंगे आप लोगों की करतूतों से !

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हिन्दू धर्म का पतन कोई आज से हो रहा है ? वह तो ऋषियों के लुप्त होने के बाद और बुद्ध के आने से पहले ही शुरू हो चूका था | जो ब्राहमणवाद ऋषियों की स्वतंत्रता, मुक्त विचारों को सहन नहीं कर पाया, वह किसी और को भला कैसे सहन कर सकता है ? वेदों को ढो रहे हैं आप लोग केवल इसलिए क्योंकि उसकी वजह से आपकी पहचान है, वरना तो अपनी खुद की तो कोई पहचान ही नहीं थी | आप लोगों से बेहतर तो आदिवासी हैं जो किसी धर्मग्रन्थ के मोहताज़ नहीं थे लेकिन सनातन धर्म को आत्मसात करके जीते रहे | लेकिन आप लोगों को वे भी बर्दाश्त नहीं  | आप लोगों से तो शूद्र अच्छे थे जो गंदगी ढो कर भी बिना धर्मग्रंथों के अपनी पहचान बनाये रखे…

लेकिन आप लोगों को तो वे भी बर्दाश्त नहीं | आप लोगों से तो वे पहाड़ी और तटीय क्षेत्र के माँसाहारी अच्छे हैं जो कम से कम बिना किसी धर्म ग्रन्थ के केवल पेड़ पौधों सागर, नदी को पूजते या सूरज चाँद को और खुश रहते…लेकिन आप लोगों को तो वे भी बर्दाश्त नहीं | पूरी दुनिया को अपना गुलाम बना लेने की यही मानसिकता ले डूबी आपके ब्राहमणवादी हिन्दू धर्म को | बस मंदिर बना दो इनके लिए और फिर चढ़ावा चढाते रहो इनके बनाए भगवानों को… भूल जाओ सूरज को, भूल जाओ नदी, तलाबों और सागर को… बस इनकी किताबें जिनको अवतार कह दें, बस उसी को मानो | ये जो खाने को कहें वही खाओ, जो पहनने को कहें वहीँ पहनो… नहीं तो अधर्मी और देशद्रोही…. अरे सीमा होती है किसी भी अति की !!!

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जब कोई दरिद्र पीड़ित होता है तो इन हिंदुत्व के ठेकेदारों की आँखों रौशनी और सुनने की शक्ति चली जाती है, लेकिन जैसे ही मुस्लिमों के विरुद्ध कोई मामला सामने आ जाये तो कुत्ते से भी तेज कान और गिद्ध से भी तेज निगाहें हो जातीं हैं | इनको चिंता तो हिन्दुओं की है और न ही इंसानों की, इन्हें तो बस अपनी कमाई और वोट बैंक की चिंता है | वोट के लालच में ये गौमाँस भी खा लेंगे और कुत्ते का मांस भी, बस वोट मिल जाना चाहिए |

तो हिन्दू धर्म का पतन इसलिए नहीं हुआ कि लोग धार्मिक नहीं थे, या देश के प्रति वफादार नहीं थे, बल्कि इसलिए हुआ क्योंकि धन और चढ़ावों के भूखे धर्मों के ठेकेदारों ने अपने ही उन हिन्दू भाइयों पर अत्यचार किये जो इनके ब्राहमणवाद को नहीं अपनाए | मैं तो कितने ऐसे ब्राहमण देखे जो बेचारे बहुत ही गरीब थे, लेकिन इन हिंदुत्व के ठेकेदारों ने तो उनकी ही चिंता नहीं की तो किसी और की क्या करेंगे ? और सहायता तो इनसे भूलकर भी नहीं लेनी चाहिए… असम के एक आश्रम ने इनसे सहायता मांगी थी कुछ उपद्रवियों से आश्रम की महिलाओं व भूमि की रक्षा के लिए… ये लोग आश्रम पर ही कब्ज़ा जमा लिए | बहुत मुश्किल से कोर्ट के दखल के बाद इनसे पीछा छूटा था उनका | तो जिस धर्म के ऐसे ठेकेदार होंगे उसका पतन होगा या नहीं ?

इसलिए हिदुत्व को समझिये और हिंदुत्व को अपने जीवन में उतारिये..ईश्वरीय किताबों को रटने से, गौरक्षा व धर्म रक्षा के नाम पर मार-काट करने से और परधर्म निंदा करने से हिंदुत्व की रक्षा नहीं होगी | ~विशुद्ध चैतन्य

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B Tविशुद्ध चैतन्यrekhasahay Recent comment authors
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B T
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B T

ब्राह्मण वाद नही आपकी कुंठित मानसिकता से आज भी यही पता चलता है कि हिन्दू मे एकता नही पनपने दिया गया । किसी भी काल मे ज्ञानी आगे आऐ और समाज का परिवर्तन किया। मौर्य सुरदास तुलसी चैतन्य प्रभु। किसी एक पर दोषारोपण ठीक नही।

rekhasahay
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बहुत सही प्रश्न है. शायद यह हमारे धर्म में भेद -भाव का परिणाम है. निम्न जाति के हिंदू दूसरे धर्म को स्वीकार कर लेते है. दूसरी बात , हमारे धर्म में प्रचार -प्रसार जैसी बात नहीँ सिखायी जाती है.