समाज व नैतिकता के ठेकेदार

एक बहुत बड़ा भ्रम हिन्दू समाज ने पाल रखा है कि हिन्दू सहिष्णु होते हैं, सभ्य होते हैं, मर्यादित होते हैं…..
वास्तव में ये सब किस्से कहानियों की बातें हैं | वास्तव में हिन्दू कभी सहिष्णु रहे ही नहीं, बस इनकी सहिष्णुता केवल इस बात पर निर्भर करती है कि सामने कौन है | यदि सामने अदानी, अम्बानी, जिंदल, या देश के सबसे बड़े गौमाँस व भैंस के माँस के निर्यातक व्यापारी हों, तो ये गौ से भी अधिक सहिष्णु व सभ्य बन जायेंगे | लेकिन यदि सामने कोई कमजोर वर्ग हो, गरीब हो और जिसके साथ खड़ा होने वाला कोई ना दिख रहा हो, तब ये लोग तालिबानी और आइसिस की संतान नजर आयेंगे | हाल की के दो वर्षों में इन हिन्दू आतंकियों ने जो उपद्रव मचाया है, वह मैंने पहले कभी नहीं देखा था | मुझे वास्तव में विश्वास ही नहीं हो रहा है कि अलकायदा और आइसिस की अवैध संताने इतनी संख्या में पैदा हो गयीं इन दो वर्षों में, जितनी कि मुगलों के समय में भी पैदा नहीं हुईं होंगी | दुर्भाग्य से ये सब हिन्दुओं के परिवार में जन्म लिए, किसी मुस्लिम परिवार में नहीं कि मैं यह कह पाऊं कि मुस्लिम होते ही ऐसे हैं |यदि इतिहास उठाकर देखें तो इन ब्राह्मणवादी हिन्दुओं और कट्टर मूढ़ मुस्लिमों में कोई अंतर मुझे दिखाई नहीं देता | दोनों एक ही नस्ल के हैं | यहाँ मैं यह स्पष्ट कर दूं कि ब्राह्मण होना और ब्राह्मणवादी होना, मार्क्स होना और मार्क्सवादी होना, गांधी होना और गांधीवादी होना, मानव होना और मानवतावादी होना, हिन्दू होना और हिंदूवादी होना…. समान नहीं हैं. दोनों में जमीन आसमान का अंतर है | जैसे अध्यात्मिक होना और अध्यात्मवादी होना एक ही बात नहीं है | आध्यत्मिक व्यक्ति दूसरों के प्रति व्यव्हार, भाषा, सहृदयता, परोपकार के लिए तत्परता व शांतचित्त व्यकित्व से बिना कुछ कहे ही यह सिद्ध कर देता है कि वह आध्यामिक है | जबकि आध्यात्मवादी ढोंग करता दिखेगा और पूजा-पाठ, कर्मकांडों में इतना व्यस्त दिखाई देगा कि न तो उसके पास दूसरों की समस्याओं को सुनने समझने का समय होगा और न ही वह फूटी कौड़ी किसी की सहायता में खर्च करेगा | कंजूस इतना होगा कि कोई मरता है तो मर जाये, एक गिलास पानी नहीं पूछेगा, लेकिन दिल से इतना बड़ा भी होगा कि अपने पारिवार व अपने लिए सारे सुख-सुविधायें ऐसे जुटाएगा कि दुनिया उसकी अमीरी देखकर आश्चर्य चकित रह जायेगी | फिर इन सब के लिए उसे दुनिया भर की बेईमानी, रिश्वतखोरी, लूट-पाट, ठगी, घोटाले ही क्यों न करने पड़ें, फिर चाहे दुनिया भर का कर्जा ही क्यों न लेना पड़े |
तो जितने भी वादी हैं, ये सभी नकलची हैं | भीतर से खोखले और दिखावों से भरे हुए | यदि ध्यान दे तो इनके पास मौलिक कुछ नहीं है, इनके पास अपना कुछ नहीं है | जो भी है सब उधार कर, माँगे का, दान का | यही कारण है कि ये लोग दान नहीं कर पाते कभी, दान के नाम पर भी केवल व्यापार करते हैं | यही कारण है कि ऐसे लोगों के पास न अपना विवेक होता है, न दिमाग होता है और न ही स्वाभिमान | ये हमेशा भीड़ में रहना पसंद करते हैं, हमेशा शोर-शराबों में रहना पसंद करते हैं, हमेशा समाज को आपस में ही लड़ाने में प्रयत्नशील रहते हैं, हमेशा आग में घी डालने का काम करते हैं…और यह सब केवल इसलिए करते हैं क्योंकि इनका अंतर्मन इनसे कहता है;कुछ करो ताकि तुम्हारी अपनी कोई पहचान बने, तुम्हारे पास अपना कुछ भी नहीं है, जो कुछ भी है सब मांगे का है, छीना हुआ है, हथियाया हुआ है… फिर चाहे ये शराफत का मुखौटा ही क्यों न हो… सब कुछ दूसरों का है |यही कारण है कि ये लोग धार्मिक ग्रंथो को पढ़ने का ऐसा ढोंग करते हैं कि दुनिया इनको धार्मिक समझने लगती है | कई लोग धार्मिक ग्रंथों को ऐसा कंठस्थ करके रखते हैं कि चलते फिरते लाइब्रेरी दिखाई देने लगते हैं, जैसे कि वर्तमान में जाकिर नाइक हैं | लेकिन वास्तव में न तो ये लोग धर्म से परिचित होते हैं, न आध्यात्म से और न ही मानवता से | बहुत ही दयनीय स्थिति में होते हैं | स्वार्थी इतने होते हैं कि ये किसी दूसरे को दो पल भी सुख से बैठा नहीं देख सकते | क्योंकि इनके अहंकार को चोट पहुँचती है यदि सामने कोई सुखी व्यक्ति दिख जाए इन्हें | इन्हें लगता है कि इतने मेहनत से दुनिया को धार्मिक, सभ्य व सुखी दिखाने के लिए जो आडम्बर किये, उनमें पानी फिर गया |
और बड़े आश्चर्य की बात है कि ऐसे ढोंगी, नकलची, खोखले लोग समाज, धर्म और नैतिकता की जिम्मेदारी लिए हुए घूम रहे हैं | केवल घूम ही रहे होते, समाज को कोई राह ही दिखा रहे होते तो चलो फिर भी सही था, लेकिन ये लोग तो खुद ही कानून बने बैठे हैं…पुलिस और कानून तो इनके सामने रखैल और कुत्तों से भी बदत्तर स्थित में | यह विडियो आपने पहले भी देखा ही होगा ?
[youtube https://www.youtube.com/watch?v=9DDJx8T-j7Q] दोबारा देखिये और आपको विश्वास हो जाएगा कि इन गुंडों मवालियों के सामने पुलिस कैसी लाचार और बेबस खड़ी है | ऐसा लग रहा है जैसे गुलामों के मालिक के ससुराल वाले उत्पात मचा रहे हैं और बेचारे गुलाम जानते हैं कि यदि उन्होंने विरोध किया तो उनका सर कलम कर दिया जाएगा | और ये पुलिस भी इतनी लाचार और बेबस इन सड़कछाप लफंगों के सामने इसलिए ही हो जाती है क्योंकि इन्हीं के मालिकों के फेंकी हड्डी पर ये और इनके बीवी बच्चे पल रहे हैं | इन लफंगों का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा यदि पुलिस इनपर कोई कार्यवाही करती है, क्योंकि इनके मालिक इन्हें बचा ही लेंगे, लेकिन पुलिस वाले का ट्रांसफर हो जाएगा या वर्दी उतर जायेगी | और धार्मिकों और सभ्यों का समाज इन पुलिस वालों का साथ देने कभी नहीं आएगा क्योंकि वह भी इन्हीं लफंगों के मालिकों के डर से पैरों में महावर और हाथों में मेहंदी लगा कर बैठा रहता है |
इसलिए फेंक दीजिये इन धार्मिक ग्रंथों को, फेंक दीजिये इन धर्म की किताबों को… क्योंकि ये केवल कायरों के बचाव के काम में आते हैं कि हमारी धार्मिक किताबें केवल शान्ति और भाईचारा का पाठ पढ़ाती हैं… और जो पढ़ते हैं वे या तो कायर बन जाते हैं या नरपिशाच, शैतान व परपीड़क बन जाते हैं | ~विशुद्ध चैतन्य
नोट: इस पोस्ट को पढने के बाद कृपया अपनी अपनी धार्मिक ग्रंथों की दुहाई न दें, न ही यह कहें कि ये लोग भटके हुए हैं या धार्मिक ग्रंथों को पढ़े या समझे नहीं | और यदि आप को ऐसा लगता है कि इनको धर्म की समझ नहीं है, तो और आपकी धार्मिक ग्रंथो से ये लोग सही रास्ते पर आ जायेंगे, तो जाइए पढ़ाइये इनको धर्म और धार्मिक ग्रन्थ |
यह एक और विडियो है गुजरात के दलित उत्पीडन का…
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