शिक्षण केंद्र या व्यावसायिक केंद्र ?


एक खबर आप लोगों ने भी पढ़ी होगी कि नौवीं कक्षा की एक छात्रा ने केवल इसलिए आत्महत्या कर ली, क्योंकि उसके स्कूल के शिक्षिकाओं ने फीस के लिए न केवल उसके पिता को थप्पड़ मारा, बल्कि पुलिस बुलाकर झूठी शिकायत भी की |
यह खबर पढ़कर मेरा मन बहुत ही व्यथित हुआ, क्योंकि मैं उस लड़की की जगह होता तो शायद मैं भी वही करता या फिर उन शिक्षिकाओं का सर फोड़ देता | कोई भी संतान अपने माता-पिता का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता, फिर वह चाहे कितना ही गरीब क्यों न हो | लेकिन उस बच्ची ने दूसरों को कष्ट देने से, स्वयं को मिटा देना बेहतर समझा | लेकिन क्या उस बच्ची की मृत्यु के दोषी केवल वे शिक्षिकाएं मात्र हैं ?नहीं… बिलकुल नहीं ! शिक्षिकाएं तो मात्र माध्यम हैं, आइना हैं उस समाज का उस शिक्षा नीति का जो शिक्षा को व्यापार बना रखा है | ऐसा समाज जिसने आराधना केन्द्रों, तीर्थस्थलों से लेकर न्यायायिक व शिक्षण केन्द्रों व संस्थानों तक को व्यापारियों के हाथों में सौंप दिया | एक साहूकार केवल साहूकार ही होता है, उससे मानवीयता और सहृदयता की अपेक्षा करना उनपर हिंसा से कम नहीं है | उनको आपके मान सम्मान व जीवन-मृत्यु से अधिक अपने धन की चिंता है | वे धन के लिए न जाने कितनों का लहू पी चुके हैं, कितनों के प्राण ले चुके हैं… उन्हें तो शायद याद भी नहीं होगा और कईयों को तो पता भी नहीं होगा |
लेकिन ये व्यापारियों द्वारा संचालित शिक्षण केंद्र अचानक कुकरमुत्ते की तरह उग कैसे गए ?
ये उगे क्योंकि हमने उनके लिए वातावरण तैयार किया | ये उगे क्योंकि हमारी मानसिकता ही ऐसी बन गयी कि शिक्षा से अधिक हमने डिग्रियों को महत्व देना शुरू कर दिया | हर तरफ से लुट रहे हैं हम, लेकिन मूर्खों की तरह आधुनिकता की दौड़ में दौड़े चले जा रहे हैं | व्यस्तता इतनी है कि सोचने-समझने का समय ही नहीं निकाल पा रहे | इसी आधुनिकता की दौड़ में एक गरीब गार्ड भी दौड़ पड़ा इस आशा में कि मैं तो पढ़ लिख नहीं पाया या जीवन में कुछ कर नहीं पाया, लेकिन कम से कम मेरे बच्चे पढ़-लिख कर कुछ कर जाएँ | अपनी हैसियत से अधिक जाकर उसने बच्चों को व्यापारियों और साहूकारों के स्कूल में दाखिला दिलवाया लेकिन उसकी स्वाभिमानी बेटी ने अपना बलिदान देकर न जाने कितनों की आँखें खोलने का प्रयास किया | लेकिन जानता हूँ, भेड़चाल में दौड़ रहा यह भारतीय समाज, नहीं सुधरेगा | जैसे भेड़ों के झुण्ड से एक भेड़ को निकालकर मार दो, बाकी भेड़ें थोड़ी देर के लिए सहम जायेंगी, लेकिन फिर सामान्य हो जायेंगी | फिर वही भेड़चाल…. न जाने कितने बच्चों को इस आधुनिकता की दौड़ में अपना बलिदान देना होगा, तब जाकर समाज की आँख खुलेगी, यह तो ईश्वर ही जानता होगा या शायद वह भी नहीं | ~ विशुद्ध चैतन्य
नीचे वह समाचार दे रहा हूँ… आपको दोबारा याद दिलाने के लिए |
नौवीं की छात्र प्रियांशी की मौत मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। अगर पुलिस इस मामले में थोड़ी सावधानी बरतती तो प्रियांशी की जान बच जाती। जब शिक्षिकाएं  प्रियांशी के घर पहुंची तो उस वक्त प्रियांशी के पिता रतन सिंह, उसकी दोनों छोटी बहनें अनुष्का, कृष्णा और कई पड़ोसी थे। शिक्षिकाओं ने घर में घुसकर रतन सिंह से फीस मांगी तो रतन ने तुरंत फीस देने में असमर्थता जताई। इस पर शिक्षिकाओं ने उससे मारपीट शुरू कर दी। प्रियांशी पिता को बचाने लगी लेकिन शिक्षिकाएं मारपीट करती रही। इसके बाद 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस को बुलाया और छेड़खानी के आरोप में रतन को हिरासत में ले लिया। पड़ोस में रहने वाले लोगों ने पुलिस को छेड़खानी के आरोप गलत बताए। इसके बाद भी पुलिस वाले नहीं माने और रतन सिंह को थाने ले जाने लगे। इसके बाद प्रियांशी ने घर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

एसपी सिटी सलमान ताज पाटिल का कहना है कि कार्यवाहक प्रधानार्चाय समेत छह शिक्षिकाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें शशि, कविता, अशोक, मधु, दुर्गेश और प्रियंका शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि स्कूल ने तीन माह की फीस के रूप में 11 हजार रुपये बकाया दिखाए थे। जब शिक्षिकाएं प्रियांशी के घर पहुंची, तब उसके पिता रतन सिंह ने प्रिंसिपल को बैठने के लिए कुर्सी दी। प्रिंसिपल कुर्सी पर तो नहीं बैठी, उल्टे रतन को थप्पड़ जड़ दिया। डीएसपी ने हायर सेकेंड्री पब्लिक स्कूल के खिलाफ शिक्षा विभाग ने जांच बिठा दी है। जिला विद्यालय निरीक्षक आरएस यादव ने कर्मचारियों को मौके पर जाकर जांच करने और उसके बाद कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। डीआईओएस ने बताया कि स्कूल प्रशासन को किसी छात्र-छात्र के घर पहुंचकर फीस आदि की वसूली का अधिकार नहीं है। उधर, बीएसए ने स्कूल के खिलाफ जांच की बात कही है। 
प्रियांशी के पिता रतन सिंह सिक्योरिटी गार्ड हैं। वे किराए पर रहते हैं और पत्नी , दो बेटी व एक बेटे का खर्च वहन करते हैं। प्रियांशी की दोस्त राधा का कहना है कि वह पढ़ने में मेधावी थी और दसवीं के बाद की भी पढ़ाई करने की तैयारी कर रही थी। इस दौरान यह घटना हो गई। राधा ने बताया कि वह हंसमुख और व्यवहार कुशल थी। स्कूल में वह सभी की प्यारी थी। -साभार: लाइव हिंदुस्तान

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