अलगावाद की नई परिभाषा है आतंकवाद

एक दिन एक खबर पढ़ा कि एक बाप ने अपनी छः वर्ष की बेटी को पटक का मार दिया क्योंकि वह बुर्का पहने बगैर ही घर से बाहर निकल आयी थी | एक खबर पढ़ी कि एक बाप ने अपनी नवजात बेटी का गला घोंट दिया क्योंकि वह रोये चली जा रही थी और चुप नहीं हो रही थी |
अब कुछ बड़ी ख़बरों पर नजर डालिए, जलियाँवाला बाग़ काण्ड आपको याद होगा ही, थियानमेन (चीन) में छात्र आंदोलन रोकने के लिए छात्रों पर टैंक चढ़ा दिए गये थे…..
 
उपरोक्त घटनाएँ अमानवीय मानी जाती हैं लेकिन अमानवीयता हमें अधिक रास आती है | एक बाप यदि वही कार्य करे जो पाकिस्तान बलूचिस्तान पर कर रहा है, या भारत चीन पर कर रहा तो उसे तुरंत उठाकर जेल में ठूंस दिया जायेगा, लेकिन यदि कोई राजनैतिक पार्टी या देश वही कार्य करे जो उपरोक्त पिताओं ने किये तो सारा देश शांति से देखता रहेगा, क्योंकि यदि ताकत है तो कमजोर को मार दो या दबा दो, वरना ताकत की कोई अहमियत नहीं | यदि ताकत है तो जलियांवाला बाग़ काण्ड करो या थियानमेन काण्ड, दुनिया दो दिन थू-थू करेगी फिर आपको चाटने लगेगी, जैसे कि आज हम चीन को चाटते हैं, ब्रिटेन को चाटते हैं, अमेरिका को चाटते हैं…. क्योंकि यही आधुनिकता है और यही है सभ्य लोगों की पहचान |
शर्त केवल इतनी ही है कि आपके पास ताकत होनी चाहिए, फिर आप जो करें वही सही है | फिर न धर्म आड़े आएगा, न ईश्वरीय किताबें आड़े आएँगी, न ईश्वर आड़े आएगा और न ही अल्लाह कुछ कहेगा | न आपको नर्क भोगना पड़ेगा, न जहन्नुम की आग में जलना पड़ेगा, न कोई पाप लगेगा….क्योंकि आपके पास शक्ति है और गुलाम सैनिक, गुलाम जनता, गुलाम मिडिया… और आपके हर कार्य की जय जय होगी, ठीक वैसे ही, जैसे जलियाँवाला काण्ड के दोषी ब्रिटेन की जय जय हम करते हैं, हिरोशिमा और नागासाकी काण्ड करने वाले अमेरिका की जय जय हम करते हैं… अपनी राजनैतिक असफलता को आप हथियारों के जोर पर ठीक वैसे ही छुपाना चाहते हैं, जैसे पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी राजनैतिक असफलता को छुपा रहा है हवाई हमले करके और यही है शायद आप लोगों की मानवीयता और राजनीती की नई परिभाषा |
 
न पाप की परिभाषा सही है और न ही पुण्य की क्योंकि परिभाषाएं समय व ताकतवर के अनुसार बदलती रहती हैं, ठीक वैसे ही जैसे बलात्कार की परिभाषा कानून में वही नहीं है, जो वास्तव में है | बल + आत्कार = बलात्कार अर्थात बलपूर्वक किया गया अत्याचार बलात्कार है | इस प्रकार आदिवासियों की भूमि छीनना भी बलात्कार है, हथियारों या सैनिकों के बल पर दमन करना भी बलात्कार है….. .लेकिन हम बलात्कार को कानून की परिभाषा के अनुसार देखते हैं, यानि किसी स्त्री के साथ बलपूर्वक शारीरिक सम्बन्ध बनाने तक सीमित कर दिया बलात्कार को | अब बलात्कार शब्द सुनते ही किसी स्त्री और पुरुष के बीच बलपूर्वक बने सम्बन्ध का ध्यान आ जाता है |
 
इसी प्रकार आतंकवाद की परिभाषा भी सरकार को नहीं पता | आतंक का अर्थ है किसी को भयाक्रांत करना | आतंकवाद का अर्थ है भयाक्रांत करने की मानसिकता और आतंकवादी का अर्थ है जो ऐसी मानसिकता के समर्थक हैं, अनुयाई हैं |
 
आतंकवादी वे लोग हैं जो निर्दोषों, निहत्थों को अपना निशाना बनाते हैं ताकि समाज में भय का वातावरण बने | ऐसे लोग कभी भी आमने सामने की लड़ाई नहीं लड़ेंगे और कभी लड़े भी तो वह उनकी विवशता होगी | आतंकवादी चुनौती देकर युद्ध नहीं करेंगे क्योंकि वे कायर होते हैं |
 
अब आप कह रहे हैं कि अलगावाद और आतंकवाद एक ही है क्योंकि अब आपने कानून की किताब में यह लिख दिया…. ठीक वैसे ही जैसे घोटाले करना, झूठ बोलना, झूठे वादे करना अलिखित रूप से राजनैतिक योग्यता मानी जाती है | इससे यह सिद्ध हो जाता है, कि पाप-पुण्य जैसी कोई चीज होती ही नहीं, बस किताबों में परिभाषाएं बदल दी जाएँ तो पाप को पुण्य और पुन्य को पाप सिद्ध किया जा सकता है |
 
चलिए अच्छा है आप लोग भी निकल पड़िए पाकिस्तान की राह पर, अमेरिका आपको उसी प्रकार सर आँखों पर बैठायेगा जैसे पाकिस्तान को बैठा रखा है | वास्तव में एक राजनैतिक पार्टी और एक देश की वास्तविक उपलब्धि व सफलता तो यही है न कि अमेरिका खुश होकर पीठ सहला दे | हम भारतीय पैदा ही होते हैं अमेरिका और ब्रिटेन को खुश करने के लिए, और यही हम भारतीयों की नियति है | कश्मीरियों को मारिये, आदिवासियों को मारिये, दलितों को मारिये…. क्योंकि इनको दुनिया में जीने का कोई अधिकार नहीं है और न ही इनको अधिकार है अपने अधिकार माँगने का |
 
शब्दों की परिभाषाएं बदलकर उनको मत बिगाड़ीये, बल्कि सीधे कहिये कि अलगावादियों देखते ही गोली मार दी जाए, फिर वह चाहे छः वर्ष का बच्चा ही क्यों न हो | सीधे कहिये कि कश्मीरियों, आदिवासियों का नामों निशाँ मिटा दिया जाए, इस्लाम मुक्त भारत बनाया जाये…. जो कहना है खुल कर कहिये, जो करना है खुलकर करिए…. बना दीजिये भारत को भी सीरिया और ईराक, हो जाने दीजिये क़त्ल-ए-आम, छेड़ दीजिये नागरिकों के विरुद्ध युद्ध… लेकिन शब्दों के साथ खिलवाड़ मत करिए | अलगावादी और आतंकवादी एक ही नहीं हैं दोनों में जमीन आसमान का अंतर है | अपनी राजनैतिक असफलता के लिए असंतुष्ट नागरिकों की हत्या करने के उपाय करना आतंकवाद व नक्सलवाद की आढ़ में, मेरी नजर में कायरता है और ऐसा करने वाला आतंकवादी नस्ल का ही हो सकता है |
ऐसे कार्यों का समर्थन करने वाला व्यक्ति या समाज में मानवता लुप्त हो चुकी है इसमें कोई संशय नहीं है | और सबसे बड़े दुःख की बात तो यह है कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसमें भारतीय नहीं रहते | भारतीय हमेशा आपको विदेश में ही मिलेंगे यहाँ आपको हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, ब्राह्मण, दलित, आदिवासी, गुजराती, बंगाली, मद्रासी, इंजिनियर डॉक्टर, आईएएस, आईपीएस, काँग्रेसी, भाजपाई, सपाई……. सभी मिल जायेंगे, लेकिन भारतीय नहीं मिलेंगे | किसी भारतीय को कुछ हो जाये तो कोई पूछने भी नहीं जाएगा, लेकिन उपरोक्त  में से किसी को कुछ हो जाए तो लाखों की संख्या में लोग निकल आएंगे….. अभी एक खबर पढ़ा था कि कुछ सैनिकों के साथ एक जहाज गायब है….लेकिन चारों और शान्ति है, एक खबर पढ़ा कि एक बूढी माँ अपने शहीद सैनिक बेटे की यादों को समेटे जी रही है और उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं…. लेकिन यह सब ईश्वर का न्याय है | जिस प्रकार सैनिक केवल सरकार के प्रति निष्ठावान होता है और सरकार के इशारे पर किसी भी नागरिक को जान से मार सकता है या उसपर अत्याचार कर सकता है… तो एक दिन उसे ही नहीं, उसके परिवार को भी वही सब भोगना पड़ता है | यही सनातन धर्म है ! ~ विशुद्ध चैतन्य
 
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