असली मूल निवासी कौन है ?

मुझसे एक प्रश्न पूछा गया कि असली मूल निवासी कौन है ? मुझे यह भी बताया गया कि आदिवासियों के ७५० गोत्र होते हैं |
वास्तव में गोत्र के विषय में सुनकर तो मुझे भी आश्चर्य हुआ क्योंकि मैं तो अंडमान निकोबार से लेकर मणिपुर तक कभी नहीं सुना कि आदिवासी कोई गोत्र आदि की बात करते हैं |
चलिए मूल प्रश्न पर आते हैं कि मूल निवासी कौन हैं | मूलनिवासी मेरी दृष्टि व वैज्ञानिक आधार पर देखा जाए तो वे लोग हैं जो आज भी पढ़े-लिखे, धार्मिक लोगों की परछाई से भी दूर हैं, जैसे कि अंडमान के जारवा, ओंगी आदिवासी | या अफ्रीका के बीहड़ों में रहने वाले आदिवासी या भारत के ही भीतर वनों में रहने वाले भील, अहीर व अन्य आदिवासी | इनमें एक विशेषता होती है कि ये लोग आपसे झूठ नहीं बोलेंगे, जुमले नहीं बोलेंगे, झूठे वादे नहीं करेंगे, धोखा नहीं देंगे, चोरी नहीं करेंगे, दूसरों की भूमि या संपत्ति नहीं हथियाएँगे, बलात्कार नहीं करेंगे, किसी पर अत्यचार नहीं करेंगे किसी से कुछ छीनेंगे नहीं….और आप पर कोई विपदा आ जाए तो अपनी जान की बाजी लगा देंगे, लेकिन आप पर आंच नहीं आने देंगे | यदि आपको इनके विपरीत आचरण करते कोई आदिवासी मिल जाये तो समझ जाइए कि वह मूलनिवासी नहीं है |

वे लोग भी मूल निवासी नहीं हैं जो ब्रह्मा के शरीर से निकल कर वेद, अस्त्र, तराजू और कुदाल लेकर आसमान से टपके | यानि ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र |
आदिवासियों को जंगल और खेत बहुत प्रिय हैं और वही उनके आस्तित्व का आधार भी है | क्योंकि वे प्रकृति की संतान हैं और सनातन धर्म ही उनका मूल धर्म है | वे किताबी धर्म से अधिक सनातन धर्म पर निर्भर हैं | वे नौकरियों पर निर्भर नहीं हैं और न ही अमेरिका या ब्रिटेन पर | न तो किसी अमीर पर निर्भर हैं और न ही किसी दानवीर परोपकारी अडानी अम्बानी या जिंदल पर | वे प्रकृति पर निर्भर हैं, कृषि पर निर्भर हैं, वनों पर निर्भर हैं | वे न तो किसी की जमीन पर कब्ज़ा करते हैं और न ही किसी को बेघर करते हैं विकास के नाम पर | लेकिन यदि कोई उनसे उनका घर, खेत और वन छीनेगा तो वे उसी तरह उनकी रक्षा करेंगे, जैसे देश की सीमा पर सेना करती है देश की रक्षा |
लेकिन जो मूल निवासी नहीं होते, वे अपने खेत बेच देते हैं नौकरी के लालच में, गाड़ी, बंगला कोठी के लालच में और गुलाम बन जाते हैं जीवन भर के लिए उनके जो मूल निवासी नहीं हैं | जो मूलनिवासी नहीं हैं, व दूसरों की जमीनों पर कब्ज़ा करते फिरते हैं, भूमाफिया का प्रोफेशन चुनते हैं और भूमि हथियाने के लिए यदि पूरे गाँव को भी श्मशान बनाना पड़े तो वे पूरी श्रृद्धा व भक्तिभाव के साथ यह कार्य करेंगे बिना किसी अपराधबोध के | ~विशुद्ध चैतन्य
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ache jaankaari . ham gotr ki baat karte hai. aadivaasiyon me gotr hota hai malum nahi tha.