व्यावसायिक राजनीति

यह समाचार मुझे अभी Newbuzzindia  से प्राप्त हुआ | चाहता तो पढ़कर भूल भी जाता या फिर अपने किसी पेज में शेयर कर देता | लेकिन फिर अचानक दिमाग में आया कि सभी ऐसा ही कर रहे होंगे | मुझे इस विषय पर कुछ लिखना भी चाहिए, तो प्रस्तुत है:
राजा हो या राजनेता, उन्हें अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए, अधिक से अधिक भक्तों की आवश्यकता होती है क्योंकि अधिकांश नेता जानते हैं कि वे जिन मुद्दों के बल पर चुनाव जीते हैं, उसे वे कभी भी पूरा नहीं कर सकते | और जो चुनाव हार चुके हैं, वे भी जानते हैं कि मुद्दे वही उठाने पड़ेंगे और फिर से जुमलों और झूठे वायदों का सहारा लेना पड़ेगा | तो ये भक्त ही हैं जो भक्ति में ऐसे अंधे हो चुके होते हैं कि न राष्ट्र की उनको चिंता होती है, न समाज की और न ही नागरिकों की, बस उनको जय जय करने से मतलब होता है | इन भक्तों की यादाश्त भी इतनी कमजोर होती है कि, कल उनके नेता ने क्या वायदे किये, किन चीजों का विरोध किया था, वही भूल जाते हैं | इसलिए राजनेताओं को ऐसे भक्तों से उतना ही प्रेम होता है, जितना ईश्वर को अपने भक्तों से होता है |
राजा, राजनेताओं, देवी-देवता और निराकार ईश्वरों में एक बात समान होती है कि ये सभी स्तुति वन्दना से द्रवित व प्रसन्न होते हैं | इसलिए जिनकी भूमि छिन गयी, जिनकी स्त्रियाँ या बच्ची छिन गयी और ईश्वर उनकी सहायता के लिए नहीं आ पाता तो भी उन्हें ईश्वर की स्तुति करते हुए हम देखते हैं | इसी प्रकार जो नेता कभी गाँव के या समाज के उत्थान के लिए नहीं आता, न ही भूमाफियाओं से उनकी भूमि बचाता है उसी की न केवल जय जयकार करते हैं लोग, बल्कि उसे दोबारा सत्ता सौंपने से भी परहेज नहीं करते | क्योंकि भारत में शासक वर्ग और ईश्वर को समतुल्य माना जाता है | यही कारण है कि लगातार शोषित, प्रताड़ित करने वाला, घोटाले करने वाला नेता फिर सत्ता को प्राप्त होता है |
तो चूँकि ईश्वर और शासक वर्ग स्तुति और वंदना के भूखे होते हैं तो प्राचीन काल में भांड आदि को राजा नियुक्त करते थे, जो गाँव गाँव जाकर राजा की स्तुति किया करते थे, उनकी प्रशंसा में गीत गाया करते थे | कालान्तर में समाज उन्नत हो गया और ऐसे भांड जो पैसे लेकर स्तुति या प्रशंसा करते हैं, वे न्यूज़ चैनल के एंकर बन गये, पत्रकार बन गये और कुछ ने संस्था बना ली जिसे एडवरटाइजिंग एजेंसी कहते हैं | ये सब घटिया से घटिया सामानों से लेकर अपने ईमानों तक को बेच देते हैं और वह भी अच्छी कीमतों पर | ऐसे ही कुछ भांड पर्सनलिटी और इमेज डेवलपमेंट के नाम पर नेताओं, अभिनेताओं की मार्केटिंग करते हैं | मार्केटिंग या प्रचार करने गलत नहीं है, लेकिन यदि राष्ट्र व नागरिकों की हित का ध्यान न रखा जाये और केवल धन लाभ को ही प्राथमिकता दी जाए तो यही माध्यम कलंकित हो जाता है |
पहले क्षत्रियों के हाथ में सत्ता हुआ करती थी और ब्राहमण उनकी प्रशंसा करते थे, अब वैश्यों यानि व्यपारियों के हाथों में सत्ता है और ब्राह्मण आज उनकी चापलूसी करते हैं | वैसे ऐसे लोगों को ब्राहमण कहना ब्राह्मण शब्द की गरिमा को कलंकित करने से कम कुछ नहीं है | क्षत्रियों के पास अब उतना दिमाग रह नहीं गया, तो वे अपने स्वभावानुसार सैनिक बन जाते हैं या पुलिस बन जाते हैं, लेकिन रहते उपरोक्त के गुलाम ही हैं | इन्हें अपना विवेक प्रयोग करने की अनुमति नहीं होती, नेता या उद्योगपति, जिसकी तरफ इशारा करेंगे ये लोग उसी का शिकार कर लेंगे.. सही यह गलत का निर्णय करने कि क्षमता छीन ली जाती है इनसे |
तो जब वैश्यों ने राजनीती संभाली तो स्वाभाविक ही है कि वे प्रचार करने के नए नए तरीके अपनाएंगे, और उसी क्रम में यह नया तरीका निकाला उन्होंने… हो सकता है पहले से चलन में रहा हो, लेकिन मुझे आज पता चला | ~विशुद्ध चैतन्य
विस्तार से खबर पढ़िए…
Newbuzzindia: मुंबई महाराष्ट्र में बीजेपी ने सदस्यता अभियान बढ़ाने के लिए कई अनोखे आयडिया अपनाए हैं। इनमें सबसे अनोखा आयडिया नाशिक के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने अपनाया है। बीजेपी के पांच नए मेंबर बनाने पर ‘एक हेयर कट फ्री’ का नया फंडा सामने आया है।
इस आशय के बोर्ड नाशिक में दिखने लगे हैं। निश्चित संख्या में मेंबर बनाने पर ‘फ्री मसाज’ की भी सुविधा ऑफर की गई है। बाजार में ‘एक पर एक फ्री’ की कई स्कीम चलती हैं, मगर किसी राजनीतिक दल ने इस तरह का फॉर्म्युला अब तक नहीं अपनाया था। बाल काटने के सैलून में इस तरह के बोर्ड लगाए गए हैं। पांच सदस्य बनाने वाले को मुफ्त में हेयर कट मिलेगा। आगे इससे भी बड़े ऑफर हैं।
पांच से सौ तक सदस्य बनाने पर मसाज, हेयर कलर से लेकर फेशियल तक की सुविधा फ्री देने का वादा किया गया है।‌ विश्व रेकॉर्ड बनाने के लिए सभी इकाइयों को बीजेपी ने टारगेट दिया है। नाशिक शहर इकाई को ढाई लाख मेंबर बनाने का लक्ष्य दिया गया है। बताया जाता है कि इसमें से दो लाख मेंबर बन चुके हैं। बाकी का टार्गेट पूरा करने के लिए अनोखे आयडिया रखे गए हैं।
टिकट चाहिए, मेंबर बनाओ: औरंगाबाद महानगरपालिका के लिए उम्मीदवारों का चयन जारी है। बीजेपी ने इसके लिए आवेदन मंगवाए हैं और उम्मीदवारों के इंटरव्यू होने हैं। इस बार ऐसी शर्त रख दी गई है कि इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने के लिए हर उम्मीदवार को 200 मेंबर बनाने होंगे। बीजेपी ने पहली बार सदस्यता के लिए मिस्ड कॉल की सुविधा दी है। मिस्ड कॉल के लिए भी कार्यकर्ता तरह-तरह के प्रलोभन दे रहे हैं।

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