सनातन में सभी आ जाते हैं, कोई वैदिक ही सनातनी है ऐसा नहीं है

यह तो अब हर जगह पढ़ने मिल ही जाता है कि हिन्दू शब्द सिन्धु का अपभ्रंश है यानि सिन्धु नदी जुड़ा है हुआ यह नाम | हिन्दू कोई धर्म नहीं है वह इसलिए क्योंकि हिन्दू भौगोलिक नाम है कोई धर्म पर आधारित नाम नहीं है और न ही कोई पंथ है यह | भारत विभिन्न मान्यताओं व संस्कृतियों के साथ साथ विभिन्न भौगोलिक संरचनाओं व जलवायु का भी देश है | यहाँ कहीं बर्फ से ढका क्षेत्र है तो कहीं समुद्र का किनारा, तो कहीं रेगिस्तान तो कहीं, पहाड़ और कहीं मैदान…. सभी के अपने अपने संस्कार, रहन-सहन व खान-पान हैं | इन सभी को सम्मिलित रूप में ही हिन्दू धर्म के रूप में स्वीकार किया गया था संविधान में | यदि संविधान में हिन्दू कि व्याख्या पूछी जाए तो कोई उत्तर नहीं मिलेगा (यह भी अभी हाल ही में एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा पूछे गये प्रश्न के उत्तर से पता चला)

तो मैं जब कहता हूँ कि हिन्दू कोई धर्म नहीं है, उसका सीधा सा अर्थ है कि जैसे इस्लाम है, जैसे ईसाई है, जैसे सिख या बौध हैं… वैसा कोई धर्म नहीं है | यहाँ धर्म का प्रयोग संप्रदाय के लिए किया गया है क्योंकि इसी रूप में प्रयोग हो रहा है हिन्दू नाम भी | जबकि धर्म स्वयं बहुत ही विस्तृत शब्द है | धर्म शब्द का प्रयोग कर्तव्य के लिए भी होता है और गुण व स्वभाव के लिए भी |

अब सनातन कि जय करते हैं, तो भी सनातन में सभी आ जाते हैं, कोई वैदिक ही सनातनी है ऐसा नहीं है | सनातन का अर्थ ही है जो सदा था, सदा है और सदा रहेगा | सनातन धर्म वह धर्म है जिसपर सम्पूर्ण सृष्टि आचरण कर रही है | चिड़ियों का सूर्योदय से पूर्व उठना और सूर्यास्त के साथ वापस लौट आना, सनातन धर्म ही है | सभी ग्रहों का अपनी अपनी कक्षा में घूमना और सूर्य के आसपास चक्कर लगाना और इस पूरे सौर परिवार का आकाश गंगा में चक्कर लगाना और पूरे आकाश गंगा का ब्रहमांड में चक्कर लगाना…… सब सनातन है | सृजन, जनन-प्रजनन, मृत्यु, विनाश… सभी कुछ सनातन है | इसलिए ही गीता में कहा गया है, जो हो रहा है अच्छा ही हो रहा है और जो होगा वह भी अच्छा ही होगा | यहाँ कोई शोषक है तो कोई शोषित है….. कोई पोषक है तो कोई कसाई है…. सभी अपना अपना कर्म ही कर रहे हैं | उदाहरण के लिए पूरी दुनिया के शरीफ और मानवतावादी मिलकर भी आइसिस के नरसंहार को नहीं रोक पाए, इसी प्रकार महाभारत का युद्ध नहीं रुका लेकिन जीवन तो अपनी गति चलता ही रहा | अब धार्मिक उन्मादियों ने फिर उपद्रव शुरू कर दिया भारत में और आप देखेंगे कि अस्सी प्रतिशत जनता इन सब से बेखबर अपनी ही धुन में पड़ी हुई है | कोई पिज़्ज़ा खाने में मस्त है तो कोई क्रिकेट में तो कोई, कोर्ट-कचहरी में धक्के खाने में, तो कोई शेर-ओ-शायरी में…. यानि सब कुछ स्वीकार्य है | यहाँ कुछ भी गलत नहीं है और कुछ भी सही नहीं है | जिसकी लाठी उसकी भैंस ! यही सनातन है | सारे धार्मिक ग्रंथों के श्लोक और आयतें और संविधान व कानून की किताबों के धारायें…. केवल कमजोरों के लिए ही हैं, ताकतवर, पूंजीपति, बाहुबली, घोटालेबाजों पर ये सब लागू नहीं होते और एक रटा-रटाया डायलॉग सुनने को मिल जाता है, “उपर जो बैठा है वह न्याय करेगा !” और यही सत्य भी है | न्याय तो वही करता है ये नीचे वाले लोग तो केवल व्यवसाय ही करते हैं |

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इसलिए जब हम हिन्दू या सनातन कहते हैं तो वह केवल ब्राह्मणों का वैदिक धर्म नहीं है | उसमें सभी सम्प्रदाय, पंथ व मत शामिल हो जाते हैं | उसमें शेर भी शामिल है और हिरण भी शामिल है | उसमें शाकाहारी भी शामिल हैं और माँसाहारी भी शामिल हैं, उसमें मानव भी शामिल हैं, और पशु-पक्षी व सभी सूक्ष्म जीव जंतु भी शामिल हैं |

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