भीड़ के पीछे मत भागो

पिछले कुछ वर्षों में आदिवासियों के मन में मनुवादियों के प्रति नफरत इतनी बढ़ गयी कि वे खुद को हिन्दू मानने से ही इनकार करने लगे और खुद को सरना धर्म के अनुयाई मानते हैं | सरना धर्म जो पुर्णतः सनातन सिद्धांतों और प्रकृति की उपासना पर आधारित है उसे ही वे अपना धर्म मानते हैं | पता चला पूरे भारत में ग्यारह करोड़ आदिवासी हैं और वे सभी अब सरना धर्म को मान्यता दिलाने के लिए आन्दोलन के लिए उतर पड़े हैं |

फिर दलितों (शोषितवर्गों) में भी हिन्दुओं के प्रति नफरत बढ़ती ही जा रही है और आये दिन ऐसी खबरे पढ़ने को मिल रहीं हैं जिनमें किसी न किसी दलित को जिन्दा जला देने की घटनाएँ सामने आ रहीं हैं | अभी हाल ही मैं गुजरात में एक दलित किशोरी को जिन्दा जला देने की घटना सामने आई |

फिर मुस्लिमों और हिन्दुओं में तो छत्तीस का आँकड़ा शायद संघ की स्थापना के साथ ही बढ़ गया था या हो सकता है पहले से ही रहा हो |

उपरोक्त घटनाओं पर यदि हम ध्यान दें और सामाजिक जीवन पर नजर डालें तो आम जीवन में इतनी उथल पुथल नहीं है जितनी कि मिडिया में हमे देखने मिल रही है | और हम सभी जानते हैं कि मीडिया पैसों और राजनैतिक पार्टियों के लिए ही काम करती है, न कि देश व समाज के हित के लिए | कभी पता कीजिये तो पायेंगे कि अधिकांश टीवी चैनल किसी न किसी राजनैतिक पार्टी या संरक्षक के संरक्षण में है | और वही निर्देश देते हैं कि कौन सी खबर को हाईलाइट करना है और कौन सी नहीं | टीवी चैनल के डायेक्टर भी उन्हें ही बनाया जाता है जो गुलाम मानसिकता का हो और केवल इशारे पर ही भौंकने की क्षमता रखता हो |

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तो इतनी नफरत कहाँ से और क्यों पैदा हो गयी इस विषय पर किसी भी धार्मिक संगठन को चिंतन-मनन करते नहीं देखा | आजकल संतों महंतों के भेस में घूम रहे राजनैतिक गुलाम भी इस नफरत की आग में फ्री में मिल रही सरकारी घी डालने का काम कर रहे हैं | एक प्रकार से देखने पर ऐसा लगता है कि हर कोई अपनी ही जिंदगी से परेशान हो गया है और हत्या/आत्महत्या पर उतर आया है | सत्ता पक्ष के समर्थक ही सर्वाधिक नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं और विपक्ष की स्थिति तो कुत्तों के बीच घिरी भीगी बिल्ली से भी बदतर हो रखी है | वह मुंह खोले तो सीबीआई छोड़ देंगे की धमकी मिल जाती है |

ऐसे में सर्वसाधारण को ही चाहिए कि वे स्थिति को संभाले | यह देश किसी नेता या राजनैतिक पार्टी का नहीं है, बल्कि हमारा है, हम सभी का है | इस नफरत की आग में हमारा ही घर जलेगा, नफरत के सौदागरों और उनके दुमछल्लों का कुछ नहीं बिगड़ने वाला |

फिर मैं आदिवासियों और दलितों से कहना चाहता हूँ कि, गलती तो आप लोगों कि भी है कि आप लोग शोषित हो रहे हो | थोड़े से पैसों के लालच में अपनी जमीन बेच देते हो, खुद को बेघर कर लेते हो और फिर दुनिया भर के जुल्म सहते हो | आप लोगों से जब कहा जाता है कि संगठित होकर अपने ही गाँव अपने ही लोगों के विकास के लिए कार्य करो बिना किसी नेता या राजनैतिक संगठन के तलुए चाटे, तो ऐसा चेहरा बना लेते हो, जैसे कोई बहुत ही असंभव बात कह दी गयी हो | आप लोगों से जब मैं कहता हूँ कि आओ मैं आपके साथ हूँ और मिलकर केवल अपने गाँव को ही सुधारते हैं, तो गधे के सर के सींग की तरह गायब हो जाते हो | गाँव के मुखिया भूमाफियाओं के साथ मिलकर गाँव की गोचर जमीनें बेच रहे हैं और आप लोग दो-तीन हज़ार रूपये उनसे लेकर अपने अपने घरों में दुबक जाते हो….. फिर आप लोग कहते हो हमारा शोषण हो रहा है, हमें बेघर कर दिया….. आप लोगों ने खुद ही कुलहाड़ी मारी अपने पैरों में और ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया दूसरों पर |

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यह ध्यान रखें, आप दलित हैं आदिवासी हैं, मुसलमान हैं, ईसाई हैं…. या जो भी हैं, वह आपका व्यक्तिगत विषय है | जो भी होने में आपको सुख मिलता है वही हो जाइये मुझे कोई परेशानी नहीं है | लेकिन यदि भारतीय नागरिकता ले रखी है, और भारत की भूमि में जन्म लिया है तो आप भारतीय हैं और आपका प्रथम धर्म है राष्ट्रधर्म | जब राष्ट्र ही नहीं रहेगा, अपनी जमीन ही नहीं रहेगी तो बाकी सारे धर्म भी बदलते देर नहीं लगेगी | थोड़े से पैसों और दो रोटी के लिए आप अपना धर्म भी बदल लेंगे | फिर आप सरना हों या हिन्दू हों या मुस्लिम हों….

हिन्दू कोई धर्म नहीं है यह जान लें भारत में रहने वाला हर नागरिक हिन्दू हैं | भारतीय धर्म को सनातन कहा जाता था क्योंकि यहाँ इस्लाम या ईसाई जैसा कोई एक मत या पंथ का धर्म नहीं था | विभिन्न सामाजिक, भौगोलिक परिस्थियों, संस्कारों व मान्यताओं का देश है यह और सभी को संगठित किया गया | इसलिए अपनी अपनी मान्यताओं को महत्व दीजिये, लेकिन नफरत और हिंसा फ़ैलाने के लिए नहीं | कुछ लोगों ने मान लिया है कि वेद ही एकमात्र ग्रन्थ है भारत का क्योंकि वे लोग कभी पहाड़ों पर नहीं गए, आदिवासियों को असुर बना दिया, जीवन के कठिन संघर्षों को नहीं झेला…. इसलिए वे अपनी कूपमंडूकता से मुक्त भी नहीं हो पाए | अब उनकी वजह से हम अपने देश अपना सुख चैन मिटा लें ? भीड़ के पीछे मत भागो, क्योंकि भीड़ के पास अपनी कोई अक्ल नहीं होती | ~विशुद्ध चैतन्य

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