मेरी अनपढ़ बुद्धि कहती है कि संन्यासी मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं |

एक तो वे संन्यासी होते हैं जो शुद्ध हिन्दू हैं और धार्मिक पुस्तकों के नियमों व दूसरों द्वारा निर्देशित जीवन जीते हैं | वे वर्ण जातियों के अंतर्गत ही रहते हैं और कर्मकांडों, व ब्राहमणवाद का अनुगमन करते हैं | ऐसे संन्यासियों के उदाहरण हैं विश्वविख्यात, हिंद्त्व के शान योगी आदित्यनाथ, साक्षी महाराज, साध्वी प्राची जैसे महान विभूतियाँ | इनके सम्मान में सारा विश्व नतमस्तक रहता है और इनके एक इशारे से कहीं भी लोग जान ले और दे सकते हैं |

दूसरे वे संन्यासी हैं जो स्वयं की खोज करते हैं और जिन्हें मैं सनातनी मानता हूँ | क्योंकि वे ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वधर्म समभाव’ के सिद्धांत पर चलते हैं | वे किताबी धर्म से अधिक सनातन धर्म को महत्व देते हैं और प्राकृतिक रूप से जीवन जीते हैं | वे कोई भेदभाव नहीं करते और और न ही दंगा भड़काते हैं, न ही नफरत फैलाते हैं | बल्कि वे तो विश्वबंधुत्व की भावना लेकर जीते हैं | ऐसे सन्यासियों व संतों में यदि मैं नाम लेना चाहूँगा तो गौतम बुद्ध, नानक, कबीर, स्वामी विवेकानंद, ठाकुर दयानंद देव, ओशो आदि मुझे अधिक तर्क संगत दिखते हैं |

बाकी आप लोग विद्वान् हैं, पढ़े-लिखे हैं अंग्रेजी बोलते हैं, संस्कृत जानते हैं…तो आप ही बताइये कि क्या मैं गलत कह रहा हूँ ? ~विशुद्ध चैतन्य

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