एक अजीब स्वप्न जो मैंने सुबह सुबह देखा

इस समय सुबह के पाँच बज रहे हैं और अभी अभी एक स्वप्न के कारण आंख खुली | एक ऐसा स्वप्न देखा जो मेरी दिनचर्या, विचारों और संबंधों से बिलकुल अलग है | ऐसा स्वप्न जो वर्तमान में किसी भी तरह मुझसे जुड़ा हुआ नहीं है |

मैंने देखा कि एक बहुत बड़ा स्टेज बनाया गया है बिलकुल ऑस्कर समारोह की तरह और दुनिया भर के विद्वान वहाँ आमन्त्रित हैं | देश विदेश के पत्रकारों की भीड़ है वहाँ और शो शुरू होने में बस कुछ ही देर है | मैं स्टेज के पीछे पहुँचता हूँ जहाँ भाग लेने वाले अतिथि व विद्वान स्टेज पर जाने की तैयारी कर रहे हैं | सबके हाथ में स्टेज में पढ़े जाने वाले भाषण आदि हैं | जैसे ही मैं वहाँ पहुँचता हूँ, संचालक मेरे पास आता है और एक पेपर टेबल पर रख कर कहता है, “इस लेख को ध्यान से पढ़ लो | यह आपका ही लिखा हुआ लेख है और इसी पर आपसे प्रश्न पूछे जायेंगे और इसी पर आपको उत्तर देना है पब्लिक के सामने | इस लेख की बहुत ही चर्चा है……..

तभी अचानक एक प्रसिद्ध एंकर/रिपोर्टर (मैं उसका नाम भी जानता हूँ और चेहरा भी पहचानता हूँ लेकिन यहाँ नाम लेना उचित नहीं है) जिसकी ऊँचाई करीब पंद्रह-बीस फीट होगी आता है और वह लेख उठाकर फेंक देता है और हँसते हुए कहता है, “यह लेख है ? अरे इसे लोग अगर लेख कहते हैं तो इसका मतलब है कि उन्होंने कभी कोई लेख आज तक पढ़े ही नहीं | और आपका नाम शामिल कैसे हो गया हम जैसे विश्वप्रसिद्द विद्वानों में ? आपको तो मैं अपना जूता पोलिश करने लायक भी नहीं समझता…..मेरी लिखी किताबें दुनिया भर में पढ़ी जाती हैं… कभी पढ़ना उन्हें” फिर संचालक से कहता है, “ध्यान रखो कहीं यह स्टेज में न पहुँच जाए….”

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मैं अपना लेख उठाता हूँ और उससे कहता हूँ, “मुझे तो किसी ने बताया था कि आप बहुत ही विद्वान हैं | क्या आप विद्वान हैं ? मुझे तो किसी भी एंगल से आप विद्वान नहीं दिखते और मुझे आश्चर्य हो रहा है कि विद्वानों की सूची में आपका नाम कैसे आ गया…..?”

बस अचानक हमारे बीच बहस बढ़ जाती है और जाने कहाँ से एक बहुत ही बड़ा चट्टान उठाकर मैं उसके ऊपर पटक देता हूँ जिससे उसकी तुरंत ही मौत हो जाती है | तुरंत पुलिस पहुँच भी पहुँच जाती है और लोगों से बयान लेने लगती है | संचालक मुझसे कहता है तुरंत भाग जाओ हम संभाल लेंगे सब कुछ….. लेकिन मुझे न कोई भय होता है और न ही भागने की इच्छा | पुलिस इंस्पेक्टर मुझे देखता है लेकिन वह मुझसे कुछ नहीं कहता | बाकी लोग भी मेरी ओर कोई ध्यान नहीं देते | मैं वहां से निकलकर पीसीआर में अपने साथियों के पास पहुँचता हूँ तो सभी कहते हैं बिलकुल सही किया, वह इसी लायक था | तभी संचालक भी आ जाता है और कहता है आपका लेख बेहतरीन लेख है इसमें कोई शक नहीं है और सबने इसी को विषय बनाया था और इसी विषय पर विश्व भर से विद्वान् आये हुए हैं चर्चा करने के लिए | इसी बीच इंस्पेक्टर भी आ जाता है और पीसीआर में उपस्थित सभी व्यक्तियों को बयान देने के लिए बुलाता है, लेकिन मुझे फिर कुछ नहीं कहता | मैं इंस्पेक्टर को अपना लेख वाला पेपर देता हूँ और कहता हूँ, “यह लेख ही था सारे फसाद की जड़…” इंस्पेक्टर लेख लेकर चला जाता है |

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थोड़ी देर बाद देखता हूँ मैं उस जगह हूँ जहाँ लोगों से बयान लिया जा रहा है और सभी लोग मुझ से ऐसा व्यव्हार कर रहे हैं जैसे मुझे जानते ही नहीं | मेरे विरुद्ध कोई भी कुछ नहीं कह रहा… पुलिस वाले भी मुझे देखकर अनजान बन रहे हैं | एक व्यक्ति बयान दे रहा है कि ये रिपोर्टर और एंकर हम पीसीआर वालों को अपने पैर की जूती समझते हैं और जो हुआ वह अच्छा ही हुआ | जिसके हाथ से वह मारा गया वह निर्दोष है, कोई भी होता उसकी जगह तो वह वही करता…. उसे तो मरना ही था…..”

अचानक मैं इंस्पेक्टर के पास पहुँचता हूँ और कहता हूँ, “मैं जानता हूँ, मुझे कम से कम उम्र कैद होगी | आप मुझे गिरफ्तार कर लीजिये | मुझे ऐसे समाज में रहना भी नहीं है |”

इंस्पेक्टर फिर मुझे अनदेखा कर देता है और लोगों से बयान लेने लगता है | तभी कुछ जाने पहचाने चेहरे सामने आते हैं और मुझे अपने साथ बाहर ले आते हैं | मेकअप रूम में पहुँचते हैं और रॉयल स्टैग की बोतल खोलकर सभी के लिए पेग बनाई जाती है | मैं भी दो चार पैग पी लेता हूँ और तभी उनमें से कोई कहता है यह रहा आपका लेख और स्टेज में पहुँचने के लिए तैयार हो जाओ, नाम अनाउंस होने वाला है | मैं कहता हूँ ठीक है मैं पेशाब करके आता हूँ क्योंकि बहुत जोर से पेशाब लगी है | बस तभी नींद खुल जाती है और पाता हूँ कि सचमुच बहुत जोर से पेशाब लगी है |

है न अजीबोगरीब सपना ??

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