दूसरों के भरोसे मत रहिये, अपना दीपक आप खुद बनिए

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कहते हैं बुद्ध और महावीर का ऑरा लगभग पचास मील का था | व जहाँ से भी ठहरते थे, वहाँ से दस पचास मील के दायरे में अचानक से शान्ति व्याप्त हो जाती थी | लोगों के दिलों से नफरत गायब हो जाती थी यहाँ तक की बाघ और बकरी भी एक ही घाट से पानी पीने लगते थे |

कहानी सही है या गलत मैं इसपर चर्चा नहीं करना चाहता | कहानी केवल शिक्षा व सन्देश के लिए ही होते हैं और मैं यही मानकर चलता हूँ | इस कहानी में भी यही समझाने व शिक्षा देने का प्रयास किया गया है कि आपकी अपनी ऑरा जैसी होगी, वैसा ही आपके आसपास का वातावरण होगा | यदि आपके भीतर नफरत भरी हुई है, तो स्वाभाविक है कि आपके आसपास भी नफरत का वातावरण ही बनेगा |

कहते हैं कि अशोक का साम्राज्य भारत का स्वर्णयुग माना जाता था | कई विदेशी यात्रियों के लिखे यात्रा संस्मरणों में लिखा गया है कि उस समय भारत के किसी भी घर में ताला नहीं होता था लेकिन कोई चोरी चकारी भी नहीं थी | सभी लोग संतुष्ट थे, आनंद व हर्ष का वातावरण रहता था | ईसा मसीह भी मोर्य काल में ही भारत आये और यहाँ से उन्होंने अहिंसा व प्रेम का पाठ सीखा, जिसे उन्होंने अपने देश में ले जाकर उन लोगों को सिखाया जो जंगलियों की तरह आपसे में लड़ने मरने पर तुले थे |

घर का मुखिया, गाँव का मुखिया, देश के मुखिया का ऑरा सकारत्मक होगा, उसकी मानसिकता लुच्चो-लफंगों जैसी नहीं होगी, तो उसके अधिकार क्षेत्र में भी वातावरण स्वतः ही शुद्ध होने लगेगा | लेकिन यदि नेता ही लुच्चा-लफंगा हो, तो उसके अधिकार क्षेत्र में लुच्चे लफंगे, बलात्कारी, मोबलिंचिंग, भूमाफिया, व अन्य अपराधियों का तांडव होगा | और जब अपराधियों का तांडव होगा तब अपराधियों को सजा देने की बजाय पुलिस व अदालत उन्हें बचाकर किसी निर्दोष को फंसाएगी | परिणाम यह होगा कि जनता को एक दिन समझ में आ जायेगा कि लाठी अब अपने ही हाथ लेनी होगी | उस दिन गली गली पुलिस, जज, वकील और नेता पिटने लगेंगे और पूरे देश में अराजकता फ़ैल जाएगा |

इसलिए अपना नेता यह देखकर मत चुनिए कि वह नौलखा सूट पहनता है, तीसहज़ारी सब्जी खाता है, सवा लाख के पेन से सिग्नेचर करता है……बल्कि यह देखकर चुनिए कि उसमें न्याय करने की योग्यता है या नहीं | वह किसी उद्योगपति, पूंजीपति का गुलाम तो नहीं है | वह बिकाऊ तो नहीं है | अधिकांश नेता किसी ने किसी पूंजीपति, भूमाफिया, अपराधी का टट्टू ही होता है और कौड़ियों में बिकता है….ऐसे में आप उनसे न्याय की अपेक्षा नहीं कर सकते | वह सत्ता में आया ही अपने आकाओं के हितों के लिए न कि जनता के हितों के लिए | इसलिए जितनी जल्दी हो सके जाग जाओ, अपने विवेक को नेताओं, राजनैतिक पार्टियों की तिजोरी से बाहर निकालकर खुद प्रयोग करो | यदि आप इस योग्य भी नही हो पाए कि अपने गाँव, अपने राज्य, अपने देश के लिए अच्छा मुखिया खोज पाओ, तो फिर आपको यह अधिकार भी नहीं रह जायेगा कि आप किसी नेता का विरोध कर पाओ |

तो शुरू कीजिये अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध बनाने से, समाज को जागृत करके भ्रष्ट नेता व अधिकारीयों को सबक सिखाने से, वरना ये पूंजीपतियों, अपराधियों, भूमाफियाओं का गिरोह आपको हिन्दू-मुस्लिम, कांग्रेस-भाजपा, वामपंथी-दक्षिणपंथी और क्रिकेट जैसे मादक खेलों के नशे में धुत्त कर बर्बाद कर देंगे | इसलिए दूसरों के भरोसे मत रहिये, अपना दीपक आप खुद बनिए |

~विशुद्ध चैतन्य

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