धर्म स्थल एक बाजार में परिवर्तित हो गया और मंदिर-मस्जिद बन गये रिश्वतखोरों के दफ्तर

जब हम ईश्वर की अराधना करते हैं, तब हम द्वैत की अवधारणा लेकर चलते हैं | लेकिन जब हम ध्यान करते हैं, तब हम अद्वैत पर कार्य…
Posted by विशुद्ध चैतन्य on Sunday, 21 September 2014

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