न मैं निःस्वार्थी हूँ और ना ही परोपकारी

Print Friendly, PDF & Email

पहले मैं यह मानता था कि मैं दूसरों के लिए कुछ करना चाहता हूँ या करता हूँ | पहले मैं यह मानता था कि मैं दूसरों के लिए लिखता हूँ, दूसरों के लिए जीता हूँ | लेकिन बाद में जब स्वयं को खोजा, जाना, पहचाना, तब पाया कि वास्तव में मैंने कभी भी दूसरों के लिए कुछ नहीं किया | मैं इतना स्वार्थी हूँ कि सिवाय स्वयं के, किसी और के विषय में कभी सोचा ही नहीं |

यही कारण था की मुझे अहंकारी, घमंडी की उपाधि मिल गयी |

लेकिन जिस दिन मुझे इस सत्य का पता चला, उस दिन से मैं सुखी हो गया क्योंकि मैंने जान लिया था कि यह मेरा मौलिक स्वभाव है | मैं आज भी किसी के कहने पर किसी के लिए कुछ नहीं कर पाता, बल्कि वही करता हूँ जो मेरी आत्मा चाहती है यानि मैं स्वयं चाहता हूँ | मैं वही करता हूँ जिससे मुझे ख़ुशी मिलती है, जिससे मुझसे सुख मिलता है, न कि वह काम करता हूँ, जिससे मुझे कष्ट होता हो, लेकिन दूसरों को सुख मिलता हो |

फिर मुझे दूसरों की चिंता करनी भी नहीं चाहिए क्योंकि मैं कोई नेता तो हूँ नहीं कि नौलखा सूट पहनकर, सवा लाख का पेन जेब में रखकर फ़कीर बना विश्वभ्रमण करता फिरूँ दूसरों को सुखी रखने के लिए | न ही मुझे दूसरों को खुश रखने के लिए दुनिया भर के झूठ बोलने की आवश्यकता है, न ही महँगाई डायन को विकास की मौसी बताने की आवश्यकता है | न ही मुझे दूसरों को खुश रखने के लिए कहना पड़ता है कि नोटबंदी से काला धन वापस आयेगा, चालीस रूपये में डॉलर मिलने लगेंगे या चालीस रूपये का पेट्रोल हो जाएगा | ये सब परोपकार वाले काम है और मेरे जैसा स्वार्थी व्यक्ति ऐसे परोपकारों से दूर रहना ही पसंद करता है |

फिर न तो मैं कोई चाटुकार, चापलूस या रखैल पत्रकार हूँ जो दूसरों को खुश करने के लिए लिखता फिरूँ केवल परोपकार के लिए | मैं लिखता भी हूँ तो केवल स्वयं को खुश रखने के लिए लिखता हूँ | दूसरों को खुश रखने के चक्कर में पड़ा तो किसी को भी खुश नहीं रख पाऊंगा यहाँ तक कि स्वयं को भी |

लोग मुझे समाज सेवक समझते है, लोग मुझे परोपकारी समझते हैं, गाँव के लोग भी बहुत सम्मान करते हैं केवल यह मानकर कि मैं उनके सुख दुःख में काम आता हूँ | वास्तव में मैंने कभी समाज सेवा भी नहीं की | जब भी की अपनी ही सेवा की क्योंकि मुझे केवल अपनी ही ख़ुशी पसंद है | मुझे ख़ुशी होती है जब किसी पीड़ित की किसी भी प्रकार की सहायता कर पाता हूँ | मुझे प्रसन्नता होती है, जब किसी भ्रष्ट अधिकारी या माफिया द्वारा पीड़ित व्यक्ति की कोई सहायता कर पाता हूँ | मुझे ख़ुशी होती है, जब आश्रम में स्वयं ही पेंट करता हूँ, स्वयं ही वाइरिंग करता हूँ या इलेक्ट्रिकल, या इलेक्ट्रोनिक्स इक्विपमेंटस रिपेयर कर देता हूँ | मुझे ख़ुशी मिलती है, जब मैं अपना डेस्कटॉप कम्प्यूटर स्वयं ही असेम्बल व इन्स्टाल करता हूँ, मुझे प्रसन्नता होती है जब मैं अपना वेबसाइट स्वयं डिजाईन करता हूँ | मुझे प्रसन्नता होती है जब मैं अपने मनोभावों व अनुभवों को आर्टिकल्स के रूप में लिखता हूँ | यानी जितने भी काम करता हूँ, अपनी ही ख़ुशी के लिए करता हूँ दूसरों को खुश करने के लिए नहीं | इसलिए मेरे लिखे आर्टिकल्स से कई लोग आहत हो जाते हैं | कई लोग कहते हैं कि फलाने पर क्यों नहीं लिखा, ढिकाने पर क्यों नहीं लिखा ?

मैं लिख ही नहीं सकता अलाने-फलाने-ढिकाने पर, मैं तो उसी पर लिख सकता हूँ जिसपर लिखना चाहता हूँ |

वास्तव में मुझे परोपकार जैसे विषय से दूर ही रहना चाहिए | ये नेक काम तो धर्म जाति के ठेकेदारों का है जो समाज को कुत्ते-बिल्लियों की तरह आपस में लड़ाकर परोपकार करते हैं | ये काम तो जुमलेबाज नेताओं का है जो जुमले सुना सुनाकर देश व देश की जनता के हित के लिए खुद कष्ट सहते हुए सबको लूटते हैं और लूटे हुए धन को विदेशी बैंकों में जमा करवाने का कष्ट उठाते हैं | ये काम तो भ्रष्ट रिश्वतखोर अधिकारीयों, मंत्रियों व जजों का है, जो समाज के भले के लिए स्वर्ग व मोक्ष का मोह त्याग कर रिश्वत लेते हैं, विश्वासघात करते हैं | यह जानते हुए भी कि यह सब करके नर्क की आग में जलना पड़ेगा, लेकिन दूसरों का भला करने, परोपकार करने के लिए वे खुद नरक की आग में जलने के लिए भी तैयार रहते हैं |

मैं ऐसा महान परोपकारी, निःस्वार्थी इस जन्म में तो क्या, किसी भी जन्म में नहीं बन पाऊंगा | मुझे क्षमा करें, मुझसे बिलकुल भी अपेक्षा न रखें कि मैं इन नेताओं, अधिकारीयों, धर्म व जाति के ठेकेदारों या कूपमंडूक धार्मिकों सभ्य लोगों की तरह भला व सदाचारी, परोपकारी बन जाऊं | मैं जानता हूँ कि ऐसे निःस्वार्थी परोपकारियों का बहुत ही सम्मान है समाज में, लोग जयजयकार करते हैं ऐसे परोपकारियों व भले लोगों की | फिर भी मैं नहीं बन पाउँगा इनकी तरह भला व्यक्ति क्योंकि मैं इनकी तरह निश्वार्थी नहीं हूँ | मैं बहुत ही बिगड़ चुका हूँ, मुझसे अब किसी भी प्रकार की कोई आशा ही नहीं रखें |

~विशुद्ध चैतन्य

352 total views, 14 views today

लेख से सम्बंधित अपने विचार अवश्य रखें

Comments are closed.