भाग्य क्यों साथ नहीं देता ?

भाग्य

अक्सर हमें सुनने मिलता है कि भाग्य ने साथ नहीं दिया, या हमने तो बहुत कोशिश की, पर भाग्य ही साथ नहीं देता | वहीँ कुछ लोग यह कहते हैं कि भाग्य वगैरह कुछ नहीं होता, कर्म ही सबकुछ होता है | कर्म करो और फल अवश्य मिलेगा | लेकिन व्यवहारिक रूप में हम पाते हैं कि जो कर्मप्रधान हैं वे शूद्र कहलाते हैं और सबसे अधिक शोषित, पीड़ित व दरिद्र वही लोग होते हैं | उदाहरण के लिए मजदूर, किसान, आदिवासी आदि कर्मप्रधान लोग होते हैं | वे बुद्धि से अधिक महत्व कर्म व बल को देते हैं, लेकिन दरिद्रता में जीवन व्यतीत करते हैं या फिर परजीवी प्राणी उनसे उनकी भूमि और खेत ही छीन लेते हैं |

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कर्म को बिलकुल भी महत्व नहीं देते, केवल चापलूसी और चाटुकारिता से ही बड़े बड़े पदों पर आसीन होकर सारे सुख व वैभव भोगते हैं | कुछ लोग वह भी नहीं करते, केवल लड़कियों की दलाली करके, नेताओं के पालतू गुण्डे-मवाली बनकर ही सारे ऐश्वर्य भोगते हैं | तो जो कर्म प्रधान हैं, वे सबसे निचले पायदान पर होते हैं क्यों ?

क्योंकि भाग्य आधारित होता है परिकल्पना (Vision) पर | बिना परिकल्पना के किये गये कर्म व्यक्ति को कहीं नहीं पहुँचा पाते, जैसे मजदूर कर्म करता है बिना किसी परिकल्पना के | उसे काम बता दिया जाय वह कर देगा, लेकिन उसपर काम छोड़ दिया जाये, तो वह काम करेगा नहीं, निपटा देगा जैसे तैसे | एक उदाहरण देता हूँ अभी हाल ही का:

आश्रम में कुछ निर्माण कार्य हो रहा था तो इलेक्ट्रीशियन बुलवाया गया | इलेक्ट्रीशियन आया तो उसे मेरे पास भेज दिया गया कि काम समझा दूँ | काम कोई विशेष नहीं था कुछ नए बाथरूम बने थे, उन सभी में स्विच व बल्ब लगाने के लिए वायरिंग करनी थी | मैंने उसे समझाया कि वायरिंग इस प्रकार करनी है कि वायर अव्यवस्थित न दिखे | कैसे वायर ले जाना है, कहाँ स्विच होना चाहिए, कहाँ बल्ब होना चाहिए आदि समझा दिया | उसे लगा कि यदि मेरे हिसाब से चलेगा तो उसे बहुत समय लग जायेगा, इसलिए वह अपने हिसाब से चलने लगा | सीधे वायर खींचने लगा इधर उधर से ताकि क्लिप लगाने के झंझट से बच जाए | मैंने जब देखा कि वायर बिना क्लिप लगाये ही खींच रहा है, तो उसे डांट कर कहा कि ऐसा बिलकुल नहीं चलेगा, काम तरीके से ही करना होगा | तो मन मारकर उसने  चार बाथरूम में सफाई से काम किया, उसके बाद मुझसे कुछ पैसे यह कहकर ले गया कि कुछ सामान कम पड़ गया है लाना पड़ेगा | लेकिन वह फिर लौट कर नहीं आया | बाद में किसी और को बुलवाकर करवाना पड़ा काम |

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तो ये होते हैं कर्म प्रधान लोग, केवल काम करना है दिमाग नहीं लगाना | बिलकुल भी कोशिश नहीं करते कि जो उनका प्रोफेशन है, उसे ही अधिक से अधिक बेहतर कैसे किया जाए | ऐसे कई उदाहरण देखने मिले मुझे यहाँ जब काम किसी के भरोसे छोड़ कर चला गया, तो बाद में अपना सर ही पीटना पड़ा | अब ऐसे लोगों के जीवन में झाँककर देखो तो पाते हैं कि ये दरिद्रता में जी रहे हैं, घर में कलह मचा रहता है | फिर ये लोग अपने भाग्य को कोसते हैं, ईश्वर को कोसते हैं | ऐसा भी नहीं कि काम नहीं करते, दिन भर काम में व्यस्त रहते हैं, शाम को अपनी दिहाड़ी लेकर जाते हैं | कहीं न कहीं से इनको काम मिल ही जाता है तो काम की इनके पास कोई कमी भी नहीं होती फिर भी दरिद्र रहते हैं |

तो कर्म बिना परिकल्पना के आपका भाग्य नहीं बनाता |

कोई भी काम करो, उसे जितना अच्छा कर सको, उतना करो, चाहे उसकी कीमत आपको कम ही क्यों न मिल रही हो | यदि कम कीमत में काम नहीं करना, तो साफ इनकार कर दो | लेकिन यदि डील हो गयी, तो फिर काम अपनी तरफ से बेहतर ही करो पैसा मत देखो |

मैं बहुत ही कम समय में एक सफल साउंड रिकार्डिस्ट बन गया था | दूर दूर से लोग मेरे पास आते थे और कई प्रसिद्द हस्तियाँ तो मुझे बहुत ही महत्व दिया करती थीं | क्योंकि काम करते समय मैं उसे बेहतर से बेहतर करने की कोशिश करता था | जब तक मुझे तसल्ली न हो जाए, तब तक क्लाईंट को प्रोजेक्ट नहीं सौंपता था | लोग कहते थे कि मेरा भाग्य बहुत बलवान है, वास्तव में कर्म के साथ परिकल्पना भी जुडी थी मेरी | मैं किसी भी प्रोजेक्ट को रूटीन जॉब की तरह नहीं लेता था, हर प्रोजेक्ट मेरे लिए कुछ नया करने का चेलेंज हुआ करती थी | मैं हर प्रोजेक्ट में कुछ न कुछ नया खोजने की कोशिश करता था, हर सिंगर को बेहतर से बेहतर आवाज देने की कोशिश करता था | कई बार ऐसा भी हुआ कि सिंगर अपनी ही आवाज सुनकर हैरान हो गये कि ये उन्हीं की आवाज है | कई सिंगर ऐसे भी थे जो रिकॉर्डिंग तो बोम्बे या किसी और स्टूडियों में करवा लेते थे, लेकिन डबिंग व मिक्सिंग के लिए मेरे ही पास आते थे |

तो यदि आप केवल कर्म कर रहे हैं, कर्म के साथ कुछ श्रेष्ठ करने की भावना नहीं जुडी है, तो आपमें और गधे में कोई फर्क नहीं | और गधों का कोई भाग्य नहीं होता | वे वन में रहें या धोबी के पास कोई रचनात्मकता नहीं लायेंगे कभी अपने जीवन में | ऐसे बहुत से लोगों को देखा है मैंने जीवन में, जो रेल की पटरी में दौड़ती माल-गाड़ी से अधिक नहीं हैं | एक ही जीवन शैली, ढोए चले जा रहे हैं | उनके जीवन में कोई उतार चढ़ाव नहीं |

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आज का युवा भी vision-less हो चुका है | उसके पास कोई लक्ष्य नहीं है, कोई उद्देश्य नहीं है, बस जैसे तैसे नौकरी मिल जाए, छोकरी मिल जाए बस उससे अधिक कोई सोच नहीं | कई ऐसे भी हैं जो यह कहते हैं कि बस दो वक्त की रोटी मिल जाए और कुछ नहीं चाहिए | कुछ लोग अधिक पाने की चाह में गलत रास्ते पकड़ लेते हैं, तो कुछ नेताओं के चाटुकार और चापलूस दुमछल्ले बन जाते हैं | अब इनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य होता है अपने नेता के गलत को सही साबित करना | इसके लिए वे दुनिया भर से लड़ते झगड़ते रहते हैं | इन्हें पता भी होता है कि इनका नेता गलत कर रहा है, झूठे वादे करता है, विश्वासघात करता है, दल-बदल करता है, अपराधियों का साथ देता है, तब भी ये उसे अपना अराध्य बनाये घूमते हैं क्योंकि उस नेता की वजह से ही उसकी पहचान है | नेता हट जाये तो उसका अपना अस्तित्व ही मिट जाएगा, उसे समझ में ही नहीं आयेगा कि वह खुद कौन है, उसकी खुद की विशेषता व योग्यता क्या है |

तो ऐसे युवा केवल भेड़चाल में चल रहे होते हैं, विवेक विहीन जीवन जी रहे होते हैं | फिर अपने भाग्य को कोसते हैं, ईश्वर को कोसते हैं |

सोशल मिडिया में ही नहीं, आपके अपने आसपास भी ऐसे लोग मिल जायेंगे जो केवल उन विषयों पर रूचि लेते हैं, जिसका उसके अपने जीवन या समाज से कोई मतलब नहीं होता | उदाहरण के लिए नेता, अभिनेताओं के व्यक्तिगत जीवन में ताक झाँक या फिर दूसरों के खान-पान, रहन सहन पर टीका टिप्पणी करना | ये सब कभी कभार हो, किसी विशेष कारण से हो, तो समझ में भी आता है, लेकिन यदि यह स्वाभाव ही बन जाये, तो खुद के भाग्य को बाधित करने लगता है | जब भी हम स्वयं से अधिक महत्व किसी नेता या बाबा या अभिनेता को देने लगते हैं, तो उनका भाग्य तो संवर जाता है, आपका अपना भाग्य अधर में लटक जाता है |

इसीलिए प्रतिदिन इस बात का चिन्तन मनन करके सोना चाहिए कि आज दिन भर जो भी कार्य किया, उससे मेरे अपने भाग्य को, अपने उद्देश्य को, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में किस प्रकार का सहयोग मिला | यदि आपके दैनिक जीवन में अपने उत्थान से अधिक दूसरों के व्यक्तिगत जीवन के विषय में चिन्तन रहा, तो निश्चित मानिये कि आपका भाग्य आपका साथ नहीं देगा | क्योंकि आपने अपने भाग्य को अपने उत्थान के विषय में कुछ नहीं बताया | दिन भर आपने केवल दूसरों की चर्चा की, दूसरों के विषय में ही सोचा तो आपके भाग्य को आपने यही सन्देश दिया कि आपको समृद्ध नहीं होना है | और जब आपने स्वयं ही अपने भाग्य को गलत सन्देश दे दिया, तो फिर भाग्य भला आपका साथ क्यों देगा ?

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अतः यदि भाग्य को अपने पक्ष में करना है, तो अपने हर कर्म के साथ यह भाव भी रखिये कि यह कार्य मुझे सर्वोत्तम करना है, मुझे इस कार्य से अधिक से अधिक सीखना है ताकि भविष्य में और अधिक अच्छा कर पाऊं | कल्पना करते रहिये कि आप प्रतिदिन पहले से अधिक समृद्ध हो रहे हैं |

स्मरण रखें कि यह जगत माया है अर्थात जैसा भाव होगा आपका, जैसी कामनाएं व कल्पनाएँ होंगी आपकी, जैसे कर्म होंगे आपके, जितनी योग्यता आपने विकसित की है अपनी, उसी के अनुरूप परिणाम मिलेंगे | न तो केवल कल्पना करने मात्र से कुछ हासिल होने वाला है, और न ही केवल कर्म करने से | दोनों का समुचित प्रयोग ही आपके भाग्य को संवारेगा |

मैं ऐसे लोगों से दूरी बना लेता हूँ जो केवल दूसरों की बुराई करने में ही अपना जीवन नष्ट करते हैं | मैं ऐसे लोगों से भी दूरी बना लेता हूँ, जो दिन रात अभावों, आर्थिक तंगी का रोना लिए बैठे रहते हैं | क्योंकि ऐसे लोग अपने ही भाग्य के दुश्मन होते हैं और ऐसे लोगों की संगत, आपके अपने भाग्य को प्रभावित करती है | मैं ऐसे लोगों से भी दूरी बना लेता हूँ, जो केवल मुझमे कमियां ही खोजते रहते हैं, जो केवल मेरी निंदा व आलोचना ही करते रहते हैं | क्योंकि इनकी संगत आपके मस्तिष्क में नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, ऐसे लोग न तो खुद ऊपर उठ पाते हैं और न ही किसी दूसरे को ऊपर उठने देते हैं | और यह आदत मेरी कोई आज की नहीं है, बचपन से ही मैं ऐसा हूँ | यही कारण रहा कि मैंने बहुत ही कम उम्र में वह सफलता प्राप्त कर ली थी, जो उस उम्र में कोई सोच भी नहीं सकता था |

आशा करता हूँ कि मेरा यह लेख आपको कुछ नवीन प्रेरणा देगा |

~विशुद्ध चैतन्य

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