ईश्वर यदि है, तो वह कैसा दिखता है ?

बहुत से लोग मुझसे ऐसे ही प्रश्न कर चुके हैं | बहुत से लोग अब नास्तिक हो गये हैं, वे जानना चाहते हैं | अधिकांश लोग वास्तव जानना नहीं चाहते, उन्हें लगता है, इसी बहाने खिंचाई कर ली जाए थोड़ी इस संन्यासी की | खैर व्यास जी को तो समझा दिया…सोचा थोड़ा आप लोगों को भी समझा दूं ईश्वर के विषय में |

मैं अक्सर कहता हूँ कि ईश्वर मेरे साथ ही है, मेरे ही आसपास है, मेरे ही भीतर है | मैं ईश्वर का अनुभव हमेशा करता हूँ, नित करता हूँ | चौबीसों घंटे ईश्वर मेरे साथ होते हैं, इसीलिए मुझे मन्नत मांगने के लिए न तो मंदिर जाना पड़ता है, न ही तीर्थों के चक्कर लगाने पड़ते हैं | कभी कभार किसी के साथ मंदिर चला भी गया तो मुझे समझ में ही नहीं आता कि क्या माँगा जाए और कैसे माँगा जाए | क्योंकि जो भी मैं चाहता हूँ, जो भी मेरी आवश्यकताएं होतीं हैं, वह तो ईश्वर पूरी कर ही देता है किसी न किसी रूप में | अब मंदिर के ईश्वर भी मेरी मनोकामना पूरी करने का कष्ट क्यों करेंगे, जब साक्षात् ईश्वर मेरे ही साथ होते हैं ?

अब समस्या यह हो जाती है कि लोग कहते हैं कि यदि ईश्वर आपके साथ है, आपके ही भीतर है तो कोई चमत्कार दिखाओ, या फिर कोई प्रमाण दिखाओ जिससे हमें विश्वास हो जाए कि आप सही कह रहे हो | कई लोग कहते हैं कि उन्हें तो हनुमान जी के दर्शन होते हैं, कई लोग कहते हैं की उन्हें दुर्गा, काली के दर्शन होते हैं | कई लोग हैं जो हवा में उड़ने का दावा करते हैं और खुद को भगवान् कहते हैं, जैसे पायलट बाबा | कई लोग हाथों से भभूत निकालकर भगवान् बन जाते हैं |

नहीं मेरी ऐसी कोई अभिलाषा नहीं है कि भगवान् को सिद्ध करने के लिए कोई चमत्कार दिखाऊँ, कोई जादूगरी दिखाऊँ, या फिर कोई असाधारण कार्य करके दिखाऊँ | मुझे असाधारण होने में कोई रूचि नहीं है और न ही किसी को यह सिद्ध करने में कोई रूचि है कि ईश्वर है या नहीं है |  हाँ मैं यह अवश्य बताना चाहता हूँ कि ईश्वर के विषय में जनमानस में धारणा बैठा दी गयी है, वह गलत है | ईश्वर कोई व्यक्ति विशेष नहीं है, न ही वह इंसानों जैसा दिखता है मौलिक रूप से, न पशु-पक्षियों जैसा दिखता है |

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कई लोग यह भी कहते हैं कि मृत्यु के समय व्यक्ति को लाईट दिखाई देती है, संगीत सुनाई देता है…..यह बात भी सही है | अधिकांश जिन्होंने निकट मृत्यु का अनुभव किया, उन्होंने यही बताया | ध्यान में भी जब कोई बहुत गहरे में उतरता है, तब एक क्षण ऐसा भी आता है, जब उसे ये सब अनुभव होते हैं | लेकिन यह भी ईश्वर नहीं है |

तो फिर ईश्वर यदि है तो वह कैसा है ?

Vishwaroop Darshan

विश्वरूप दर्शन और कुछ नहीं, केवल यह समझाना मात्र था कि ईश्वर कोई खंडित रूप नहीं, बल्कि सर्वत्र उपस्थति वह शक्ति है, जो सभी के भीतर विद्यमान है

तीन शक्तियां सृजन (ब्रह्मा), संचालन (विष्णु), विनाश (महेश) अर्थात Generator, Operator, destroyer (GOD) को ही हम ईश्वर कहते हैं | समस्त ब्रह्माण्ड की जानी अनजानी शक्तियों के

समूह को ही हमने ईश्वर का नाम दिया है | इन शक्तियों को हम भारतीयों ने विभिन्न रूपों व नामों से समझाने का प्रयास किया साधारण जनमानस को | जैसे संगीत वह शक्ति है, जो सभी जीव जंतुओं को सम्मोहित कर लेती है | उसे नाम दिया सरस्वती | विद्या वह शक्ति है जो व्यक्ति को असाधारण वैभव, सुख समृद्धि उपलब्ध करवा सकती है यदि सदुपयोग किया गया, अन्यथा विनाश के कागार पर पहुँचा देती है | इसे भी नाम दिया सरस्वती | अर्थात संगीत व विद्या की देवी सरस्वती |

 

सरस्वती की अराधना का उद्देश्य केवल यह है कि जब कोई छात्र संगीत या विद्या प्राप्त करने के उद्देश्य से विद्यालय या शिक्ष्ण केंद्र में प्रवेश करे, तो वह एकाग्रचित हो जाए कि वह किसी विशेष शक्ति को समझने, पहचानने के उद्देश्य से वहाँ पहुंचा है | वह बाकी सभी विषयों से ध्यान हटा केवल संगीत या विद्या पर ही ध्यान केन्द्रित रखे | मध्यप्रदेश में हमारे गाँव में छात्र अपने अपने टेबल या अपने कमरे में, सरस्वती की तस्वीर  अवश्य रखता था | जब तक वह छात्र जीवन जीता था, सरस्वती उसकी विशिष्ट आराध्या हुआ करती थी | उसे बाकि किसी भी देवी देवता को पूजने की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि उसे केवल विद्या ही प्राप्त करना होता था उस समय |

फिर अगली बड़ी व प्रभावी शक्ति है धनऐश्वर्य | इसे नाम दिया गया लक्ष्मी |  लक्ष्मी यानि धन वह शक्ति है, जो बड़े से बड़े तपस्वियों का तप भंग कर सकती है | बड़े से बड़े नेता अपना ईमान, सिद्धांत त्याग देते हैं लक्ष्मी यानि धन व ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए | वर्तमान युग में लक्ष्मी ही सर्वाधिक प्रभावी शक्ति है जो विद्या से भी ऊपर का स्थान रखती है | लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए किसानों को बेमौत मरने के लिए छोड़ दिया जाता है, आदिवासियों और किसानों की भूमि हथियायी जाती है, नोटबंदी की जाती है, ईंधनों पर चालीस प्रतिशत से अधिक टैक्स लगाया जाता है | जिसके पास लक्ष्मी अर्थात धन है वह अराध्य माना जाता है, जैसे अडानी, अम्बानी, माल्या, नीरव, ललित मोदी इत्यादि | आम नागरिक से लेकर प्रधानमंत्री तक इन लक्ष्मीपतियों के सामने नतमस्तक रहते हैं | नेता, मंत्री, अधिकारी, इन्हें अपना जमीर, अपना ईमान, अपना स्वाभिमान, अपनी आत्मा तक गिरवी रख देते हैं या बेच देते हैं | अतः लक्ष्मी नामक शक्ति सर्वाधिक शक्तिशाली शक्ति है वर्तमान युग में |

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इसी प्रकार नौ देवियाँ यानि नौ सहयोगी शक्तियाँ जो ब्रम्हा, विष्णु, महेश की सहयोगी हैं | उदाहरण के लिए माँ दुर्गा, माँ काली जो अत्याचारियों, रक्तबीजों का संहार करती हैं | इनकी अराधना व सिद्धि का उद्देश मात्र यह होता है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर इतना सामर्थ्य व साहस होता है कि वह अत्याचारियों, उत्पातियों का सामना कर पाए | यह शक्ति उसके भीतर ही सुप्तावस्था में पड़ी होती है, जिसे जागृत करना पड़ता है | आप में से कई ने देखा होगा कि आपातकाल में दुर्बल से दुर्बल व्यक्ति भी कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो वह सामान्य अवस्था में सोच भी नहीं सकता | उदाहरण के लिए केनेडा में एक माँ अपने नौ दस वर्षीय बेटे के साथ कहीं जा रही थी रात के समय | रास्ते में उसकी कार पलट गयी और उसका बेटा उसके नीचे दब गया | वह औरत सहायता के लिए आवाज लगाने लगी, लेकिन उस बियाबान में कोई नहीं था उसकी सहायता करने के लिए | हाई वे में कोई इक्का दुक्का वाहन दिखते भी आते हुए तो वे अपना वाहन नहीं रोक रहे थे | वह बार बार लौटकर वापस आती, कार को हिलाने की कोशिश करती, लेकिन एक अबला नारी, इतने भारी वाहन को हिला भी नहीं पा रही थी | वह कार इतनी भारी थी कि उसे हिलाने के लिए भी कम से कम चार हट्टे-कट्टे पुरुषों की आवश्यकता पड़ती | थोड़ी देर में उसे दिखने लगा कि यदि और देर हुई तो उसका बेटा दम तोड़ देगा | अचानक न जाने क्या हुआ कि उसमें इतनी शक्ति आ गयी कि उसने कार को पलट दी और अपने बेटे को बाहर निकाल लिया | फिर उसी कार से वह अपने बच्चे को लेकर अस्पताल पहुँची | डॉक्टर को जब यह सब बातें पता चली तो वह आश्चर्य चकित रह गया | इतनी भारी कार उस कमजोर सी दिखने वाली औरत ने पलट कैसे दी या किसी के समझ में नहीं आ रहा था | उस औरत को भी भारी चोटें लगी थीं, काफी खून बह गया था, लेकिन जब तक डॉक्टर के पास वह अपने बेटे को नहीं पहुँचा दी, तब तक उसे कुछ भी होश नहीं था अपने विषय में |

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तो हम सभी के भीतर असीम शक्ति समाहित है | हमें उसी शक्ति को जगाना है यही समझाने के लिए इन देवियों के रूप में हमारे भीतर ही स्थित शक्तियों को दर्शाया गया | यह समझाने का प्रयास किया गया कि ये शक्तियाँ हमारे ही भीतर है, हम इन्हें जागृत करें और अन्यायियों व अत्याचारियों का सामना करें |

काम शक्ति भी प्रमुख शक्ति है, जिसे कामदेव नाम दिया गया | रतिक्रिया यानि फॉरप्ले भी महत्वपूर्ण शक्ति है व्यक्ति को चैतन्य व प्रसन्नचित रखने के लिए | इसे कामदेव की पत्नी यानि रति नाम दिया गया |

तो इसी प्रकार विभिन्न शक्तियों को हम भारतीयों ने अलग अलग नामों से समझाने का प्रयत्न किया | सभी शक्तियों का संयुक्त नाम है ईश्वर | जो इन सभी शक्तियों को समझ जाता है, पहचान जाता है, आत्मसात करने में समर्थ हो जाता है, वह ऐश्वर्यवान हो जाता है | ऐश्वर्यवान होने का अर्थ है, सभी प्रकार के अभावाओं से मुक्त व संतुष्ट | इसीलिए ही कहा जाता है कि जिसने ईश्वर को प्राप्त कर लिया, वह ऐश्वर्यवान हो जाता है | अर्थात जिसने इन शक्तियों को समझ लिया, जान लिया, पहचान लिया, अपने ही भीतर खोज लिया, इनका सदुपयोग करने में सक्षम हो गया, उसने ईश्वर को प्राप्त कर लिया |

तो यह है मेरा दर्शन ईश्वर के विषय में | यदि आप असहमत हैं, तो अपना पक्ष कमेन्ट बॉक्स में रख सकते हैं |

~विशुद्ध चैतन्य

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