डॉ. कलाम इसलिए थे सबसे अलहदा

मई 2006 में राष्ट्रपति कलाम का पूरा परिवार (52 सदस्य) उनसे मिलने दिल्ली आया, जिनमें उनके 90 साल के बड़े भाई से ले कर उनकी डेढ़ साल की परपोती भी शामिल थी। वे 8 दिन राष्ट्रपति भवन में रुके। उनके घूमने से लेकर खाने-पीने तक, यहां तक कि एक प्याली चाय तक का भी पूरा खर्च कलाम ने अपनी जेब से चुकाया। उनके जाने के बाद कलाम ने अपने अकाउंट से 352000 रुपये का चेक काट कर राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा। उनका राष्ट्रपति कार्यकाल खत्म होने के बाद अगर उनके सचिव नायर ने अपनी किताब में इस बात का जिक्र न करते तो शायद दुनिया को उनकी इस ईमानदारी और सादगी का पता भी न चलता।

कहते हैं कि कलाम ने अपनी पूरी प्रफेशनल जिंदगी में केवल 2 छुट्टियां ली थीं। एक, अपने पिता की मौत के समय और दूसरी, अपनी मां की मौत के समय।

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