समाधान क्या है समस्याओं का ?

अक्सर कहा जाता है मुझसे कि आप समस्याएं ही बताते रहते हो, समाधान क्या है समस्याओं का यह नहीं बताते ।

समाधान हर समस्या का होता है बिना समाधान वाली समस्या होती ही नहीं । समाधान जानता भी हूँ लेकिन लाभ नहीं बताने का । इसीलिए केवल समस्याओं पर ही बार बार आप सभी का ध्यान ले जाना चाहता हूँ । ताकि आप सभी जुमलेबाज नेताओं, चमत्कारी बाबाओं, हरामखोर, रिश्वतखोर मंत्रियों, अधिकारियों के सम्मोहन व तिलस्म से बाहर निकल, चाटुकारिता, चापलूसी और अंधभक्ति की मूर्छा से मुक्त होकर स्वविवेक से निर्णय लेने योग्य बनें ।

मैं कोई चमत्कारी बाबा नहीं हूँ कि आपकी या समाज की समस्याएं चुटकी बजाकर या भभूत खिलाकर दूर कर दूंगा । और न ही जुमलेबाज नेताओं की तरह पचास दिनों या महीनों में हल करने का दावा कर यह घोषणा कर सकता हूँ कि यदि हल न कर पाया तो मुझे लात मार देना, जूतों से मारना या चौराहे पर फाँसी दे देना ।

मैं तो समाज सेवक भी नहीं हूँ कि लोगों से चंदा मांगकर, दुनिया भर के अपमान व तिरस्कार सहकर, भुखमरी में जीकर आप सभी की समस्याएं सुलझाता फिरूँ, भंडारे लगवाता फिरूँ और आप आराम से हाथ पर हाथ धरे भजन करते रहें, सरकार को कोसते फिरें अपनी नपुंसकता व कायरता छुपाने के लिए ।

मैं तो मात्र एक संन्यासी हूँ जिसका धर्म ही है स्वयं को जाग्रत व चैतन्य करने के पश्चात समाज को जाग्रत व चैतन्य बनाना । मैं हिन्दू मुस्लिम, ब्राह्मण, दलित जैसे दड़बों में कैद साधु संत भी नहीं हूँ कि राष्ट्रभक्ति या धर्म व जाति रक्षा के नाम पर समाज मे नफरत के ज़हर बोता फिरूँ, आपस मे लड़ाता फिरूँ, दंगे करवाता फिरूँ ।

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मैं तो किसी का आदर्श भी नहीं हूँ कि मेरी नकल करने से किसी का भला हो जाएगा । मैं तो केवल आप लोगों का सोया स्वाभिमान व विवेक जगाने की चेष्टा मात्र कर सकता हूँ । जागना या न जागने का अधिकार भी ईश्वर ने आपको ही दिया है, मुझे तो यह अधिकार भी ईश्वर ने नहीं दिया कि बलपूर्वक आप लोगों को जगाऊँ । क्योंकि ईश्वर कहता है सोना स्वास्थ्य के लिए अतिआवश्यक है और प्रत्येक व्यक्ति को उसकी आवश्यकतानुसार निद्रा लेने का अधिकार है । कोई एक जन्म में ही जाग जाता है और कुछ लोगों की नींद कई हज़ार जन्मो में भी पूरी नहीं होती ।

तो मैं आपके साथ बलात्कार नहीं कर सकता । केवल जो जाग चुके हैं उनका मार्गदर्शन अवश्य कर सकता हूँ । लेकिन कदम उन्हें ही बढ़ाना पड़ेगा, मेहनत उन्हें ही करनी पड़ेगी ।

अब जैसे टैक्स के नाम पर लूट व भ्रष्टाचार देश की सबसे बड़ी समस्या है, साम्प्रदायिकता व जातिवादी वैमनस्यता के बाद । तो उसका एक उपाय तो यह है कि ऐसे नेताओं, मंत्रियों व अधिकारियों का पूर्ण बहिष्कार किया जाए सामाजिक रूप से जो रिश्वतखोरी, हरामखोरी में लिप्त हों, अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के सहयोगी हो और अपने क्षेत्र व दायित्व के प्रति सुस्त हो ।

उपाय मैंने बता दिया करना आपको है ।

लेकिन करेंगे नहीं आप लोग यह भी मैं जानता हूँ और फिर बार बार मुझसे उपाय भी पूछेंगे यह भी जानता हूँ । क्योंकि इन भ्रष्ट नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों में कोई आपका रिश्तेदार होगा, कोई अपनी जात, धर्म, पार्टी या गाँव का होगा । अब अपनों का बहिष्कार भला कोई कर सकता है ? अपना तो कोई हत्या भी कर दे किसी निर्दोष का तो उसे बचाने में जुट जाता है समाज और मौका मिलते ही उसे नेता भी बनाने की जुगत लगाने लगता है…जैसे शम्भू रैगर के साथ हो रहा है |

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फिर दूसरी समस्या यह भी है कि इनके पास धन की ताकत है, सत्ता की ताकत है, गुंडे-बदमाशों और हत्यारों की पूरी सेना होती है इनके पास । भला इनसे बैर लेकर अपनी शामत कौन बुलाना चाहेगा ?

तीसरी समस्या यह भी आड़े आ जाती है कि आप धार्मिक होंगे आस्तिक होंगे । तो अवतारों की प्रतीक्षा में बैठे होंगे या कयामत के दिन लगने वाली अदालत के इंतज़ार में । अब जो काम अल्लाह और ईश्वर को करना है, उसमें अपनी टाँग कैसे अड़ा सकते हैं ? यदि आपने स्वयं ही भ्रष्टाचारियों को सजा देने की कोशिश की तो खुदा और ईश्वर नाराज हो जाएंगे कि कानून को अपने हाथों में क्यों लिया ?

~विशुद्ध चैतन्य

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