वास्तव में हम भीख की आस लगाए रहते हैं

समाज में एक गलत धारणा प्रचलित हो गयी कि इमोशनलेस आदमी ही सफल होते हैं | समाज यह मानकर चलता है कि धूर्तता, मक्कारी, बेईमानी के बिना सफलता प्राप्त नहीं हो सकती | हम बिलगेट को देखते हैं, जुकरबर्ग को देखते हैं, नेताओं को देखते हैं, बाबाओं को देखते हैं….. उनकी असीम संपत्ति पर लार टपकाते हैं लेकिन हम उनकी निंदा भी कर रहे होते हैं | हम अमीरों को कोसते हैं, और उनसे अपेक्षा भी रखते हैं कि हमारी सहायता करें… सहायता कहना गलत होगा, वास्तव में हम भीख की आस लगाए रहते हैं |

कभी सोचा है आप लोगों ने कि वे दिन प्रतिदिन अमीर क्यों होते जा रहे हैं और आप गरीब क्यों हैं ? कभी सोचा है कि नेता दुनियाभर के घोटाले करने के बाद भी शान से बेशर्मी से सर उठाकर चलता है, दुनिया भर के अपराधों में लिप्त होने के बाद भी बेदाग़ रहता है…..ऐसा क्यों होता है ? क्यों ये नेता लोग सत्ता मिलने से पहले और सत्ता मिलने के बाद ही गरीबों, असहायों की हमदर्द बनते हैं और सत्ता मिलने के बाद पूंजीपतियों के हितैषी हो जाते हैं ?

पहली बात तो यह कि बिलगेट, जुकरबर्ग जैसे लोग स्वयं को महत्व देते हैं | वे स्वयं से परिचित हैं और जो करने के लिए आये हैं वही कर रहे हैं | वे दूसरों को देखते हुए नहीं जी रहे | वे अमीरों या अमीरी से नफरत नहीं करते, इसलिए वे अमीर होते चले जाते हैं | वे पैसों को हाथ का मैल नहीं समझते और न ही अमीर होना पाप समझते हैं | वे हमेशा सकारात्मक उर्जा व विश्वास से भरे रहते हैं, इसलिए आपके स्वार्थ ने जिस नेता को चुनकर भेजा में भेजा होता है, वह भी स्वार्थी ही निकलता है और पूंजीपतियों की फेंकी हड्डियों पर बिक जाता है | चूँकि आपके सब्कांशियास ने निजी लाभ को ध्यान में रखकर नेता चुना होता है, इसलिए आपका नेता ईमान का कच्चा निकलता है | आपने अपने देश से गद्धारी की होती है निजीस्वार्थवश, इसलिए आपका नेता आपसे गद्धारी कर जाता है|

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इसलिए सभी के कल्याण का भाव रखिये मन में | आप फेसबुक पर हैं और आपको वह निःशुल्क उपलब्ध है, फिर भी जुकरबर्ग अमीर हो गया | यदि वह सर्वमंगल की भावना नहीं रखता तो फेसबुक की हालत भी बीएसएनएल जैसी ही होती | आप लोग अमीरों से नफरत करके सब्कांशियास माइंड में यह सन्देश डाल देते हैं कि आप अमीर नहीं होना | आप गरीब ही रहना चाहते हैं | इसलिए यदि आपके पास कोई अवसर आता भी है तो आप चूक जाते हैं |

स्वयं को स्वीकार लीजिये | जैसे हैं वैसे ही सही हैं वाले सिद्धांत को अपनाइए | जो बुरा होगा देखा जाएगा हम तो ऐसे ही हैं मानकर चलिए…. बिलकुल नेताओं की तरह बेशर्म हो जाइए | अपराधियों की तरह स्वीकार लीजिये कि हाँ मैं बुरा हूँ… अच्छा बनने में मेरी कोई रूचि नहीं है | आप अपने जीवन में परिवर्तन देखना शुरू कर देंगे |

यदि आप पूर्वजन्मों में सद्मार्ग में रहे तो आप अपराध से दूर स्वतः ही रहेंगे उसके लिए आपको कोई प्रयास करने की आवश्यकता नहीं है | आप बिना अपराध किये, बेईमानी किये भी अमीर हो सकते हैं यदि आपने स्वयं को स्वीकार लिया | आपने नकल करने की अपनी आदत छोड़ दी और भीतर ही खोज शुरू की कि आप दुनिया में क्यों आये हो | हो सकता है कि आपके भीतर कोई एडिसन, बिलगेट, जुकरबर्ग से भी अनोखा व्यक्तित्व छुपा हो, जो दुनिया की चकाचौंध में खो गया हो ? हो सकता है कि आप दुनिया को कोई ऐसी चीज दे जाएँ, जिसकी दुनिया ने अभी तक कल्पना ही न की हो ?

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लेकिन यदि आप नेताओं की नकल करेंगे, अपराधियों की नकल करेंगे, मक्कार व्यापारियों की नकल करेंगे, अमीरों की निंदा करेंगे, पैसों को अमीरी को पाप समझेंगे… तो तय है आप कितने ही योग्य हों, भुखमरी आपका साथ नहीं छोड़ेगी | कर्ज अपने सर से कभी नहीं उतार पायेंगे… क्योंकि ये कर्ज आपकी अपनी ही लालच और दूसरों की नकल के परिणाम ही हैं | आप दूसरों की तरह होना चाहते हैं, उसी मानसिकता का लाभ उठाते हैं ये पर्सनल लोन देने वाले साहूकारों के बैंक |

स्वयं को जानिये, समझिये और प्रतिदिन आवश्यकतानुसार ही खर्च कीजिये | रुके हुए जलकुंडों में साफ़ पानी नहीं आ सकता, इसलिए दान कीजिये ताकि स्वस्थ उर्जा व धन आपकी ओर बहे | अपनी योग्यतानुसार किसी के सहयोगी बनिए, ताकि आपकी रुकी हुई उर्जा प्रवाहित होना शुरू हो जाए | न तो बिलगेट ने किसी की नकल की और न ही जुकरबर्ग ने… वे वही कर रहे हैं जो करने आये थे.. उन्होंने अपनी उर्जा, नफरत फैलाने के कारोबारियों का साथ देने में व्यर्थ नहीं की थी | उन्होंने अपनी उर्जा दंगा भड़काने, नेताओं को कोसने, गाली-गलौज करने में व्यर्थ नहीं की थी…. जरा सोचिये यदि वे आप लोगों की तरह ही बैठकर दूसरे धर्मों की निंदा करते रहते, अपने नेता के विरोधियो के पोस्ट पर जाकर गाली गलौज करते रहते… तो क्या बनते ?

हाँ अंत में यह और कहना चाहता हूँ कि मैं जैसा हूँ वैसा ही हूँ, न तो मेरी तरह बनिए और न ही मुझे अपनी तरह बनाने के लिए कोई सलाह दीजिये |~विशुद्ध चैतन्य

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