क्या आपको पूरा विश्वास है कि आप ढोंगी-पाखण्डी नहीं हैं ?

क्या आप ढोंगी-पाखण्डी नहीं हैं ?

क्या आपको पूरा विश्वास है कि आप ढोंगी-पाखण्डी नहीं हैं ?

आइये थोड़ा जाँच लेते हैं

स्वयं से प्रश्न करिए और देखिये आपके भीतर से क्या उत्तर आता है

१- क्या आप नियमित पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन या जो भी आपकी विधि है, अपने अराध्य को ख़ुश करने के लिए करते हैं, या स्वयं की एकाग्रता व शांति के लिए करते हैं या दूसरों को दिखाने के लिए करते हैं ?

२. क्या आप नियमित अपने भोजन या उसके समतुल्य कुछ अंश किसी जरुरतमंद को दान करते हैं ?

३. क्या आप अपने पुराने वस्त्र कबाड़ी को बेचने की बजाय किसी जरूरतमंद को देते हैं ?

४. क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो किसी भी प्रकार के समाजिक हित के कार्यो में लगा है, लेकिन बेरोजगार है ? क्या आप उसकी किसी भी प्रकार की कोई सहायता करते हैं ?

५. क्या आप किसी ऐसे मंदिर या मस्जिद में श्रम या अर्थ दान करते हैं, जो अपने आस-पास के ग्रामीणों को धूर्त मक्कार अधिकारीयों, नेताओं, माफियाओं से सुरक्षा प्रदान करता हो, या फिर उनकी किसी भी प्रकार की सहायता करता रहता हो ?

६. क्या आप किसी ऐसे धर्म या सम्प्रदाय का सहयोग करते हैं जो अपने सम्प्रदाय के लोगों को अत्याचार, शोषण व भुखमरी से की बजाय, गोदामों और बैंकों में धन जमा करने में रूचि रखता हो, या धार्मिक दिखावों, आडम्बरों में व्यय करता हो ?

७. क्या आप किसी ऐसे धार्मिक, राजनैतिक या जातिगत पार्टी या संस्था का सहयोग करते हैं जो अपनी ही जाती, या समाज के उत्थान में दिन रात लगा हो, न कि सबको सरकार या भगवान् भरोसे बैठा रखा हो ?

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स्वयं चिन्तन मनन करिए मुझे उत्तर देने की कोई आवश्यकता नहीं है |

आत्मचिंतन करिए

यदि आप किसी भी ऐसी संस्था, पार्टी, या संगठन का सहयोग कर रहे हैं, जो केवल धर्म व जाति के नाम पर नफरत फैला रहे हों, धर्म व जाति के नाम पर लाखों करोड़ों का चंदा वसूल रहे हों, मंदिर मस्जिद के नाम पर चंदा वसूल रहे हों, लेकिन अपने ही जाति समाज को भ्रष्ट अधिकारीयों, नेताओं, माफियाओं से सुरक्षा देने में असमर्थ हों, अपने ही समाज के भूखे, गरीब, असहाय व्यक्ति या परिवार की सहायता कर पाने में असमर्थ हों तो निश्चित मानिये कि आप ढोंगी-पाखण्डी हैं |

यदि आप साम्प्रदायिक उन्माद फैलाते हों, आप धर्म व जाति के नाम से नफरत फैलाकर समाज को बाँटते हों, आप साम्प्रदायिक अराजकता फ़ैलाने वालों का समर्थन करते हों, उनका सहयोग या बचाव करते हों, तो निश्चित मानिये आपसे बड़ा ढोंगी-पाखण्डी और कोई नहीं |

यदि आप स्वयं दुनिया भर की हेरा-फेरी करते हों, मिलावटखोरी करते हों, ब्लू-फिल्म देखते हों, कॉल गर्ल्स बुलाते हों….लेकिन दूसरों को ढोंगी-पाखंडी कहते हों…तो निश्चित मानिए आपसे बड़ा ढोंगी-पाखंडी और कोई नहीं |

यदि आपका समाज अपने ही समाज के कमजोर वर्ग की सुरक्षा व सहायता कर पाने में असमर्थ है, तो आपकी धार्मिक किताबों में कितनी ही अच्छी बातें लिखीं हो, आप और आपका समाज कितने ही बड़े त्यागी बैरागी या महात्मा का अनुयाई हो कोई फर्क नहीं पड़ता, आप और आपके समाज से बड़ा कोई भी ढोंगी-पाखंडी नहीं |

और ऐसे समाज का नेतृत्व कोई ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ नहीं कर सकता क्योंकि ऐसा समाज उसे बर्दाश्त ही नहीं कर पायेगा | ऐसे समाज का नेतृत्व कोई उनसे भी बड़ा धूर्त-मक्कार, जुमलेबाज ही कर सकता है क्योंकि ऐसा समाज उन्हें सर माथे बैठायेगा |

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~विशुद्ध चैतन्य

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