मुझे दान देकर अपने खून पसीने की कमाई बर्बाद मत करिए

एक पोस्ट लिखा था मैंने, If you appreciate my efforts for social awakening by my own ways, and willing to support me unconditionally, it will be great help for me. Thanks for your Support.

क्या आप जानते हैं अब तक कितने लोगों ने मुझसे संपर्क किया सहयोग के लिए ?

केवल दो लोगों ने, जिसमें से एक सहयोग नहीं एहसान दिखाना चाहता था, मुझे बेबस समझ मेरा मजाक उड़ा रहा था |

एक बात सभी तो ध्यान में रख लेनी चाहिए कि मैं भीख, या दान पर निर्भर नहीं हूँ | लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं है कि त्यागी, बैरागी, करोड़पति, अरबपति साधू-संतों की तरह मैं भी धन, स्त्री, ऐश्वर्य, भौतिक सुखों को अछूत मानता हूँ | न ही त्यागी बैरागी साधू-संतों की तरह धन को हाथ नहीं लगाता स्वयं अपितु उसके लिय सेक्रेटरी, या सेवक रखता हूँ |

नहीं मैं ऐसा कोई ढोंग पाखण्ड करने इस दुनिया में नहीं आया | मुझे धन की आवश्यकता होगी जो निःसंकोच कहूँगा…लेकिन सहयोग लूँगा उसी से, जिसकी नीयत साफ़ हो, जो स्वयं आर्थिक समस्याओं से न घिरा हुआ हो, जिसके पास इतना धन हो कि वह धन मुझपर बर्बाद कर भी दे, तो भी उसे कोई दुःख न हो |

दूसरी बात यह कि मैंने दो पोस्ट सहयोग के लिए लिखे, उसमें लोगों को यह तो दिख गया कि मैं भीख मांग रहा हूँ | लेकिन लोगों को यह नहीं दिखा कि जिन धूर्त, मक्कारों, घोटालेबाज, रिश्वतखोर नेताओं और राजनैतिक पार्टियों को आप लोग बड़े सम्मान के साथ डोनेशन, चंदा देते हैं, उनसे से तो बेहतर ही हूँ मैं | लेकिन वे लोग भीख मांगते बुरे नहीं लगते क्योंकि उनके पास करोड़ों रस्ते हैं धन अर्जित करने के | दो चार माल्या, नीरव मोदी जैसे दरिद्र, बेबस लाचारों को विदेश भगाने की फीस ही इतनी मिल जाती है कि उनकी सात पुश्तें बैठकर आराम से खायेंगी | राहत और आपदा कोष से ही इतना कमा जाते है कि स्विस बैंक में छुपाना पड़ता है | उनकी ऊपरी कमाई ही इतनी होती है कि उन्हें अपनी कमाई सभी तरह के जाँच व पूछताछ विभाग की पहुँच से बाहर रखना होता है | जनता भी उनसे नहीं पूछ सकती और इनकम टैक्स विभाग भी उनसे नहीं पूछ सकता कि उनके अतिरिक्त आय का स्त्रोत क्या है, कहाँ से उनके पास इतना धन आता है कि वे सांसद खरीद लेते हैं, विधायक खरीद लेते हैं ?

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ऐसे नेताओं, राजनैतिक पार्टियों को आप लोग आर्थिक सहयोग करते हैं, और तनिक भी शर्म नहीं आती ? लेकिन मैं आप लोगों को भिखारी नजर आने लगता हूँ ???

निश्चिन्त रहिये…मैं कोई नेता या चमत्कारी बाबा नहीं हूँ कि किसी गरीब, बेबस लाचार की मजबूरी का लाभ उठाकर उसे लूट लूं | न ही मैं चिल्हर बटोरने में कोई रूचि रखता हूँ | इसलिए जो यह मानते हैं कि वे महँगाई के मारे हैं, जीएसटी के मारे हैं, कर्ज और आर्थिक तंगी के मारे हैं, वे मुझे एक रूपये भी न दें | जिन्हें लगता है कि धूर्त मक्कार, जुमलेबाज, धोखेबाज, ठग, लुटेरे नेताओं की चाटुकारिता, चापलूसी किये बिना उसका घर परिवार नहीं चलेगा, जीवन ही व्यर्थ हो जाएगा…वे भी मुझे एक रूपये का सहयोग न करें | जिन्हें अपने घर के खर्चों से कटौती करके पैसे निकालने पड़ रहे हैं वे भी मुझे एक रूपये न दें | जिन्हें राष्ट्र से अधिक महत्वपुर्ण उनका नेता, उनकी राजनैतिक पार्टियाँ, उनके चमत्कारी बाबा, मंदिर, मस्जिद लगते हों, वे भी मुझ पर एक रूपये खर्च न करें |

मेरा सहयोग नहीं करेंगे तो भी मेरा कोई अहित नहीं होने वाला क्योंकि मैं संन्यासी हूँ और वह भी अपनी ही तरह का, जिसे अंग्रेजी में कहते हैं “स्वघोषित संन्यासी” यानि “Self Proclaimed Sannyasi” यानि आपकी किताबी परिभाषाओं से परे, समाज या किसी और के द्वारा नहीं, स्वयं के द्वारा ही संचालित व नियंत्रित संन्यासी |

तो मुझे जिंदा रहने के लिए धन की आवश्यकता नहीं है, मुझे धन की आवश्यकता होती है समाज तक अपने विचारों को पहुँचाने के लिए, सोये हुए, स्वार्थ में डूबे समाज को होश में लाने के लिए | और यह कोई समाज सेवा या परोपकार नहीं है मेरे लिए, केवल यह मेरा शौक है, मैं दुनिया में इसी कार्य के लिए ही आया हूँ | तो जब आप मुझे कोई आर्थिक सहयोग करते हैं, तो मैं उन्हें समाज सेवा में नहीं लगाता अब, बल्कि खुद के खाने पीने ऐश करने में उड़ा देता हूँ | क्योंकि मैंने तय कर लिया है कि अब मैं कभी भी कोई भी समाज सेवा का कार्य नहीं करूँगा, बल्कि वही करूँगा जो मुझे करना अच्छा लगता है | इसीलिए मुझे दान देकर अपने खून पसीने की कमाई को बर्बाद मत करिए, अपितु राजनैतिक पार्टियों, राजनेताओं, धर्म व जाति के ठेकेदारों, हिन्दू-मुस्लिम, सवर्ण-दलित, ब्राह्मण-शूद्र नामक खेल के आयोजकों व खिलाड़ियों को दान करिए ताकि वे आपके खून पसीने की कमाई का सदुपयोग कर सकें समाज को आपस में लड़ाकर देश में साम्प्रदायिक सद्भाव बनाने में | अपने खून पसीने की कमाई उन्हें दें, जो धर्म और जाति की रक्षा के लिए निकले हुए हैं, ताकि वे अधिक से अधिक बेरोजगारों को अपने गुंडे मवालियों की सेना में शामिल कर रोजगार दे सकें और आपकी ही बलि चढ़ा सकें धर्म व जाति के नाम पर |

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मुझे तो सहयोग वही लोग करें, जिनके पास सारे खर्चे, कर्जे चुकाने के बाद पैसे बच गये हों | जिनके पास स्विस बैंक में भी धन जमा करवाने के बाद पैसे बच गये हों | जिनके पास नेताओं , राजनैतिक पार्टियों को चंदा देने के बाद भी पैसे बच गये हों | जिनके पास अधिकारीयों, पुलिस को रिश्वत खिलाने के बाद भी पैसे बच गये हों | जिनके पास सारे शौक, ऐय्याशी करने के बाद भी पैसे बच गये हों केवल वही लोग मुझे उन बचे हुए पैसे में से कुछ पैसे सहयोगार्थ भेजें | मैं आपके बच्चों के स्कूल की फीस, कपडे, किताबों के पैसों का दुरुपयोग होते नहीं देखना चाहता, मैं नहीं चाहता कि आप अपने व अपने परिवार के सुखसुविधाओं के लिए जो धन इकठ्ठा कर रहे हैं, वह मुझपर बर्बाद करें | मैं नहीं चाहता कि आज आप मन मारकर मुझे हज़ार पाँच सौ दें और कल अपना सर पीटें और कहें कि एक धूर्त, ढोंगी, पाखण्डी की बातों पर आकर बहक गया और हज़ार रूपये उसे दान कर दिए | यदि उसे दान न किया होता तो आज मैं मर्सिडीज़ का मालिक होता है या लालकिला खरीद लिया होता | मैं नहीं चाहता कि मुझे आप एक रूपये भी दान करके कल पछताएँ…इसलिए पहले अपने सारे शौक, अपने सारे सपने पूरे करे लें, उसके बाद यदि कुछ धन बच जाए और तब ऐसा लगे कि वह धन यदि मुझे दे देते हैं तो आपको भविष्य में पछताना नहीं पड़ेगा, तब दीजियेगा |

या फिर वे लोग आर्थिक सहयोग करें, जिन्हें लगता है कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ, यानि मैं उन पैसों से कुल्फी खाऊं, चाउमीन खाऊँ…..उन्हें कोई दुःख नहीं होगा |

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