मैं वही गिरा हुआ प्राणी हूँ जिसे दुनिया पुरुष कहती है

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#MeToo नारियों और नारीवादियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है | क्योंकि यह उस घटना को याद करने में सहयोगी है, जो पीड़ादायक था या दुखद था | कई बरस पहले बचपन में किसी ने यौनशोषण किया, उस समय यौनशोषण किया जब आप कमजोर थीं, विरोध नहीं कर पायीं, प्रतिशोध नहीं ले पायीं, और वह दुःख भीतर ही भीतर घुट रहा था जो अब नासूर बन चुका है | वह नासूर अब सड़ चुका है मवाद निकल रहा है क्योंकि कई बरसों तक किसी जख्म का कोई इलाज न हो, तो वह जख्म बहुत ही घातक हो जाता है | स्वाभाविक ही है मैं यह दुःख अच्छी तरह समझ सकता हूँ | क्योंकि कई जख्म ऐसे ही मेरे सीने में भी दफन हैं जिनका इलाज आज तक नहीं हो पाया |

लेकिन मैं न तो नारी हूँ और न ही नारीवादी | नारीवादी तो क्या, मोदीवादी, अम्बेडकरवादी, माओवादी, आतंकवादी, नक्सलवादी, नस्लवादी, फलानावादी, ढिकानावादी….आदि-इत्यादि कुछ भी नहीं हूँ | केवल मानवप्रजाति का पुरुष मात्र हूँ | तो स्वाभाविक ही है कि मेरी सोच पुरुषों की तरह ही होगी, मैं स्त्रियों या स्त्रीवादियों की तरह न तो सोच सकता हूँ और न ही देख सकता हूँ | #MeToo के अंतर्गत आप लोग इसे मेरी स्वीकारोक्ति समझ सकते हैं |

मुझे कोई संकोच नहीं है और न ही कोई अपराध बोध है कि मैं पुरुष हूँ | मुझे यह स्वीकारने में भी कोई शर्म नहीं कि सुंदर स्त्रियाँ मुझे आकर्षित करती हैं | लेकिन मैं उनसे दूर रहना ही पसंद करता हूँ क्योंकि देर से ही सही लेकिन समझ में आ गया कि पुरुष और स्त्रियों की पसंद अलग अलग होती है | सेक्स स्त्रियों की आवश्यकता नहीं, अपितु शोषण है, अत्याचार है, पीड़ा दायक है | यहाँ तक कि इनकी तरफ देखना, इनसे बातें करने की कोशिश करना भी यौनशोषण के अंतर्गत आता है | अब तो फेसबुक पर भी तीन बार से अधिक अस्वीकार हो जाने पर भी फ्रेंडरिक्वेस्ट भेजना यौनशोषण माना जाता है |

मुझे अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि स्त्रियाँ मेरे विषय में क्या सोचती हैं, क्योंकि मैं जानता हूँ कि वे स्त्रियाँ हैं पुरुष नहीं | यहाँ तो पुरुष ही मुझे गलत समझे बैठे हैं तो भला स्त्रियाँ मुझे कैसे सही समझ सकती हैं ? मेरे दस हज़ार फोलोवर्स और फ्रेंड्स में भी स्त्रियाँ कुछ पाँच दस ही होंगी |

प्रकृति ने बचपन में ही मुझसे मेरी माँ छीन ली थी, तब बहुत रोया था, बहुत कोसा था भगवान् को | क्योंकि मेरे जीवन में मेरी माँ के सिवाय कोई मुझे अपना नहीं लगा था | लेकिन फिर मन को तसल्ली दी थी कि जब जवान हो जाऊँगा तब कोई लड़की मेरी जीवन में आएगी जो माँ की कमी को पूरा करेगी | तब सेक्स नहीं था दिमाग में, तब पत्नी का अर्थ केवल इतना ही था कि कोई बहुत केयर करने वाली लड़की जो माँ की कमी पूरी कर देती है |

बड़ा हुआ तो जाना कि माँ केवल माँ होती है, और माँ को खोजना ईश्वर को खोजने से भी कठिन कार्य है | माँ भी स्त्री ही होती है, लेकिन न जाने क्यों वह बाकी सभी स्त्रियों से अलग होती हैं | दूसरी स्त्री केवल दूसरी ही होती है, फिर वह चाहे बहन हो या पत्नी | उतनी अपनी कभी नहीं होती, जितनी कि माँ होती है |

और जब यह समझ में आया कि माँ नाम की स्त्री और बाकी सभी स्त्रियों में बहुत ही बड़ा अंतर है, तब समझ में आया कि यदि मैं बचपन में ही माँ को नहीं खोता, तो समझ ही नहीं पाता कि दूसरी स्त्री केवल दूसरी ही होती है | माँ और बेटे के बीच सेक्स का सम्बन्ध नहीं होता, शायद यही कारण है कि माँ बेटों के बीच बहुत ही अधिक अपनत्व होता है | यदि सेक्स आ गया होता बीच में, तो वह सम्बन्ध भी कटुता भरा होता | क्योंकि स्त्रियों को सेक्स से घृणा है, किसी पुरुष द्वारा देखे जाने से घृणा है, किसी पुरुष का स्पर्श उसे क्रोधित कर देता है | पुरुष उसके लिए केवल शत्रु होता है, पुरुष उसके लिए केवल शोषक होता है, पुरुष उसके लिए दुनिया का सबसे गिरा हुआ प्राणी होता है जो उसके शरीर के लालच में मारा-मारा फिरता है | पुरुष उसके शरीर को पाने के लिए अपनी सारी कमाई लुटा देता है, पुरुष उसके शरीर को पाने के लिए दुनिया भर की शत्रुता मोल ले लेता है….इतना गिरा हुआ प्राणी भला दुनिया में कोई और हो सकता है ?

मैं वही गिरा हुआ प्राणी हूँ जिसे दुनिया पुरुष कहती है….बस मैं स्त्री के शरीर को पाने के कुछ भी कुरबानी देने के लिए तैयार नहीं हूँ | एक फूटी कौड़ी भी नहीं दे सकता स्त्री के शरीर को पाने के लिए | क्योंकि स्त्री और वेश्या में अंतर जानता हूँ |

और ये स्त्रियाँ जिनका जिस्म इतना कीमती है कि जब चाहें जिसे चाहे जलील कर सकतीं हैं | यही स्त्रियाँ इतनी स्वार्थी हैं कि सिवाय अपने जिस्म के इन्हें और कुछ नहीं दीखता | ये नारीवादी, या समाजसुधारक इन सब को बरसों पहले हुए यौनशोषण का दुःख है, लेकिन वर्तमान में हो रहे शोषण से इनको कोई मतलब नहीं | आज किसानों का शोषण हो रहा है, आदिवासियों का शोषण हो रहा है, देश की जनता का शोषण हो रहा है, देश की भूमि का शोषण हो रहा है, देश की नदियों और भूमिगत जल स्त्रोतों का शोषण हो रहा है, बैंकों का शोषण हो रहा है….और इस शोषण के कारण न जाने कितने भूख से मर रहे हैं, न जाने कितने आत्महत्या कर रहे हैं….लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता | बचपन में मेरे साथ यौन शोषण हुआ वह बहुत महत्वपूर्ण है……ऐसे तो न जाने कितने पुरुष होंगे जिनका यौनशोषण आंटी, मौसी, ताई ने किया होगा उनके बचपन में ?

ये स्त्रियाँ, ये नारीवादी….बहुत ही स्वार्थी प्राणी होते हैं, इन्हें केवल अपनी चिंता होती है, बाकी सारा देश जल जाए इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, सारे किसान मर जाएँ इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, सारे आदिवासी मारे जाएँ इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, सारी नदियाँ बर्बाद हो जाएँ इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, सारे जंगल मिट जाएँ, सारे खेत मिट जाएँ इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता…..फर्क पड़ता है तो उस बात पर कि बचपन में किसी ने शोषण किया…और इससे बड़े दुःख की कोई बात है ही नहीं इस दुनिया में |

मैं जानता हूँ कि मेरे इस लेख को पढ़कर आप मुझे गालियां देंगे, मुझे नारीविरोधी कहेंगे, इस लेख को स्त्री जाति का अपमान मानेंगे…..मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता…क्योंकि मैं तो पुरुष हूँ जिसे सभ्य व धार्मिक स्त्रियाँ दुनिया का सबसे गिरा हुआ प्राणी मानती हैं, जो केवल स्त्री का जिस्म पाने के लिए इस दुनिया में आता है और मरने के बाद भी स्वर्ग जन्नत में अप्सराएं व हूरों की कामना करता है और यही सच्चाई भी है | पुरुष किसी स्त्री को पाने के लिए बड़ी से बड़ी कुरबानियाँ दे सकता है, असीम धन सम्पदा प्राप्त कर सकता है…..लेकिन यदि उस यह अहसास हो जाए कि उसके जीवन में कोई स्त्री नहीं आने वाली, तो वह यह तो वैज्ञानिक बन जायेगा या फिर त्यागी-बैरागी मेरी तरह |

आप लोग अपना अभियान जारी रखें…एक समय वह वह भी आ जाएगा, जब जापानी युवाओं की तरह कोई स्त्रियों से विवाह करना तो दूर, बात करना भी पसंद नहीं करेगा और सेक्स डॉल से ही विवाह करके स्वयं धन्य मानेगा |

~विशुद्ध चैतन्य

नाबालिग लड़के ने सेक्स से किया इंकार, शादीशुदा पड़ोसन ने गर्म चिमटे से दाग दिया प्राइवेट पार्ट

दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में एक महिला के उपर सेक्स से इनकार करने पर नाबालिग के प्राइवेट पार्ट को चिमटे से दागने का आरोप लगा है. पुलिस के मुताबिक छपरौला गांव की रहने वाली महिला ने कथित तौर पर 13 वर्षीय नाबालिग लड़के को जबरन अपने पास बुलाया और जब उसने सेक्स से इनकार किया तो प्राइवेट पार्ट को गर्म चिमटे से दाग दिया. पुलिस ने बताया कि नाबालिग लड़के की मां का यह भी कहना है कि आरोपी महिला ने बार-बार उसका यौन शोषण किया. अधिकारियों ने बताया कि 25-30 साल उम्र की महिला शाम को नाबालिग बच्चे को फुसलाकर अपने घर ले गई. उस समय वह अपने घर पर अकेले ही थी.

After Failing To Find A Human Wife, Chinese Man Marries ‘Love Doll’ | NZ FIJI TIMES

A Chinese engineer has given up on his search for love and decided to marry a robot. 31-year-old Zheng Jiajia who was tired of failing to find a human wife and the constant pressure from his family to get married, is now trying to find the love in his robo mate who he has named Yingying.

Apparently he dated her for two months before tying the knot with her in a ceremony that was attended by his mother and some close friends. Zheng designs robots for a living and it was at his workplace where he created Yingying.

 

 

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More then 20 years, I have worked with various organizations, production houses, Broadcast Media and commercial sound studios, both as a full time employee as well as free-lancer. This has enabled me to gain valuable audio restoration and optimization expertise including designing and installation of new studios. Besides, I have done lot of dubbing jobs for National Geography, History Channel, Hungama, Pogo, Doordarshan.But now I have left that field and writing articles and short posts in blog and social media to awake the society and people for the Humanity, Social and the National cause.If you appreciate my efforts for social awakening by my own ways, and willing to support me unconditionally, it will be great Support for me.Thanks for your Support.~विशुद्ध चैतन्य

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