हम तो खतरों के खिलाड़ी हैं,

मेरे जैसे आलसी के लिए मैगी एक वरदान बनकर आया था | लगभग बीस-बाईस वर्ष अपने ही हाथों से खाना बना कर खाना पड़ा था तब मैगी की महिमा समझ में आई थी |

दुनिया भर के मार्कों से पहचान करने के लिए कहा जाता था असली और नकली मैगी में अब सब भूल गया, बस इतना याद है कि मैगी लेना नहीं भूलता था जब भी मार्किट जाता था | फिर आज अचानक मैगी अभिशाप हो गया और सरकार भी तुरंत कार्यवाही करते हुए बैन भी लगा दिया | मुझे तो याद नहीं पड़ता कि मैगी खाकर कोई मरा, किसी ने फुटपाथ पर सोते हुए लोगों पर अपनी कार चढ़ा दी मैगी के नशे में | मुझे तो याद नहीं पड़ता कि मैगी खाकर कोई होश खो बैठा और किसी का बलात्कार कर दिया | मुझे तो याद नहीं पड़ता कि मैगी ने किसी की हत्या करवाई हो, किसी का लीवर डेमेज किया हो, किसी का घर बर्बाद किया हो | क्या आपके पास कोई ऐसी जानकारी है ?
मुझे तो याद नहीं पड़ता कि मैगी खाने वालों ने मैगी न खाने वालों के साथ मार-पीट की हो, या उनको दलित या शुद्र समझा हो | मुझे तो याद नहीं पड़ता कि मैगी की स्थापना के लिए आइसिस-अलकायदा जैसे संगठनों के स्थापना की आवश्यकता पड़ी हो | मुझे तो नहीं लगता कि मैगी के बैन होने पर संघी-बजरंगी जैसी को सेना तैयार हुई हो ‘मैगी रक्षति रक्षितः’ स्लोगन के साथ | मुझे तो नहीं लगता कि कहीं भी मैगी ने कोई भेद-भाव करवाया हो |

फिर भी मैगी पर इतनी तेज कार्यवाही हो गयी केवल इसलिए कि कुछ खोजी दल ने मैगी में सीसा खोज लिया | सीसा मानव स्वस्थ्य के लिए हानिकारक है | लेकिन क्या यह धर्म नाम के व्यापार और दुकानों से अधिक घातक हैं ? क्या यह धर्म के नाम पर ज़हर उगलने वालों, मारकाट करने वालों से अधिक घातक है ? क्या यह शराब, नकली दवाओं, आरक्षण से पास हुए डॉक्टरों से अधिक घातक है ? क्या ये झूठे वादे करने वाले नेताओं, भ्रष्ट अधिकारीयों, वकील और जजों से अधिक घातक हैं ? क्या यह जातिगत राजनीती करने वाले नेताओं और जाति देखकर वोट देने वाले मतदाताओं से अधिक घातक है ?

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जब आप उनपर बैन नहीं लगा रहे और न ही उनपर लगा रहे हैं, जो सदियों से मानव और मानवता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जो न जाने कितने दंगे और फसाद करवा चुके हैं, जो न जाने कितने मासूमों और निर्दोषों को मौत के घाट उतार चुके हैं धर्म और जाति के जहर बोकर, नकली दवाएं बेचकर, गलत दवाएं और इंजेक्शन दे कर… तो फिर मैगी पर बैन क्यों ? आपने कभी शराब पर बैन क्यों नहीं लगाई ? आपने कभी धर्म के नाम पर ज़हर उगलते नेताओं और धर्मों के ठेकेदारों की जबान पर बैन क्यों नहीं लगाईं ?

अरे रहने दीजिये… हम तो खतरों के खिलाड़ी हैं, जब सदियों से धर्मों के ठेकेदारों जैसे ज़हरीले लोगों के बीच सही सलामत रहते आये, जब लड़ाया आपस में लड़ लिए, एक ही इशारे पर अपने ही पड़ोसी के घर पर आग लगाते आये बिना यह सोचे कि ये धर्मों के ठेकेदारों की चाल है | हमने धर्म को समझने से अधिक कर्मकांडों को तिलक टोपी को समझा, बेशक कभी मानवता न निभाया, बेशक कभी किसी के काम नहीं आये, बेशक दूसरे धर्मों के लिए ज़हर उगलते आये, बेशक दूसरों को मिटाने के सपने पाले बैठे रहे, बेशक अपने धर्मों के आदर्शों को आचरण में नहीं लाया, लेकिन कर्मकांड तो पूरी इमानदारी से किया | तिलक लगाना, टोपी लगाना नहीं भूले | इतना ज़हर भरा हुआ है भीतर दूसरे धर्मों और मतो के लिए, जब वह ज़हर हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सका तो… क्या डरेंगे इस मैगी से हम ? मैगी का सीसा शायद उतना नुक्सान नहीं करेगा जितना, ये धर्मों के ठेकेदार करते हैं | ये डिग्रीधारी डॉक्टर करते हैं, ये शिक्षा के व्यापारी करते हैं | मैं तो मैगी खाऊंगा ~ विशुद्ध चैतन्य

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