जब ये किताबें ही लोगों को आपस में लडवा रहीं हैं…..

किसी से बात चल रही थी तो उन्होंने बताया कि किसी ने इस्लाम अपना लिया केवल इसलिए, कि उसे बताया गया कुरान ही दुनिया की पहली किताब है, जो स्वयं अल्लाह ने लिखी थी | वेद आदि सब बहुत बाद में आये और वह भी क़ुरान की नकल की गयी है | मुझे आश्चर्य  हुआ यह सब सुनकर कि लोगों के धर्म परिवर्तन के कारण भी बड़े अजीब अजीब होते हैं |

वेद सबसे प्राचीन किताब है इसलिए हिन्दू धर्म को अपनाओ, कुरआन सबसे प्राचीन किताब है इसलिए मुसलमान हो जाओ, कल कोई कहेगा कि दुनिया के पहले संत लेपटॉप बाबा हैं उन्हें किसी ने नहीं बनाया वे खुद ही लेपटॉप लेकर दुनिया में आये….. और लोग उनके चरणों में लोटने लगें | कल कोई आईफोन बाबा, ट्विटर बाबा खुद को दुनिया का पहला बाबा बताने लगें और लोग उनके चरणों में लोटने लगें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए | कुछ बाबा इसलिए पूजनीय हैं क्योंकि उनकी उम्र सौ वर्ष से अधिक है…..

अरे कैसे तो ये धार्मिक लोग हैं और कैसे ये बरगलाने वाले ! आप हिन्दू हो जाओ, मुसलमान हो जाओ, इसाई हो जाओ…. क्या कुछ फर्क पड़ेगा ? ईसाईयों के इतिहास में भी क्रूरता भरी पड़ी है, और ईराक में अमरीकी फौजों की क्रूरता तो अभी कुछ वर्ष ही हुए हैं | सबसे शांति-प्रिय धर्म बौद्धों की शांति का प्रदर्शन बर्मा में चल ही रहा है | शांति के धर्म इस्लाम कितनी परमानेंट शांति दे रहा है वह भी आईसीस द्वारा दी जा रही तस्वीरों और विडियो में दिख ही रहा है… छोटी छोटी बच्चियों तक को परमानेंट शांति प्रदान की जा रही है | हिन्दुओं की सहनशीलता फरीदाबाद में दिख ही रही है |

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और आप लोग इस आधार पर धर्म परिवर्तन कर रहे हैं कि कोई धर्म ग्रन्थ कितनी पुरानी है | क्या करोगे इन पुरानी किताबों का ? जब ये किताबें ही लोगों को आपस में लडवा रहीं हैं, एक दूसरे के खून से अपनी प्यास बुझा रहे हैं इनको पढ़ने वाले…. तो क्या लाभ ऐसे किताबों को पढने का ? कोई किताब मानवता पर नहीं लिखी गयी, क्योंकि मानवता की समझ ही नहीं थी किसी को पहले | अब शायद मिल भी जाएँ मानवता पर कोई किताब, उसे पढ़िए और समझिये कि मानवता क्या है | हिन्दू क्या है, मुस्लिम क्या है, इसाई क्या है, बौद्ध क्या है…. वह सब तो इतिहास पढ़कर ही पता चल जाएगा और हाल ही में आये दिन हो रहे खून खराबे से समझ में आ जायेगा | ईश्वर ने हमें इंसान बनाकर इंसान बनने के लिए भेजा था, हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, बौद्ध…… बनने के लिए नहीं भेजा है |

पुस्तकें निर्जीव होते हैं, वे आपको सही और गलत नहीं समझा सकते, एक ही पुस्तक से सभी लोग अपने अपने अर्थ निकालते हैं | गीता और महाभारत को पढ़कर कोई स्वामी विवेकानंद बन जाता है, कोई ओशो बन जाता है तो कोई योगी आदित्यनाथ और तोगड़िया बन जाता है | कुरान पढ़कर कोई अब्दुलकलाम बन जाता है तो कोई आइसिस चीफ अबुबकर बन जाता है | कोई उसी पुस्तक से सभी में प्रेम की गंगा बहाता है तो कोई गोलियों की बौछार करता है |

लेकिन पुस्तक कोई धर्म नहीं है | धर्म है वह व्यवहार को मानव को मानव के साथ करना चाहिए, जो समय परिस्थिति के अनुसार करना चाहिए, जो समृद्धि और आनंद देता हो, जो सभी के साथ सामंजस्यता देता हो, जो प्रेम और अपनापन देता हो…. वही धर्म है | सभी सम्प्रदायों में अच्छे और बुरे लोग हैं… कोई भी किसी से कम नहीं है… बस अवसर मिलने की देर है | बौद्ध भी उतने ही हिंसक हो जायेंगे जितने कि आईसीस हैं, हिन्दू भी मारकाट मचाएंगे जैसे कि चौरासी में मचाया था और मुस्लिम भी मचाएंगे | पुस्तकों पर निर्भर नहीं होता कोई सम्प्रदाय और न ही पुस्तकों में बताये अच्छे संदेशों का कोई अनुसरण ही करता है | सभी अपने अपने मतलब की चीजें निकालते हैं उससे | ~विशुद्ध चैतन्य

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