अंडे और आलू में कोई भेद नहीं है

धर्मों रक्षति रक्षितः |

धर्म का ही पता नहीं है कि धर्म क्या है और धर्म रक्षा के लिए निकल पड़े हवा में तलवारें और लाठियां भाँजते हुए | कभी किसी का घर जला रहे हैं, तो कभी किसी की बस्ती जला रहे हैं | कभी कहीं धन सम्पत्ति लूट रहे हैं, तो कहीं किसी मासूम की इज्ज़त लूट रहे हैं |

कई हजार साल पहले की बात है | एक चक्करभर्ती सम्राट के पास कई मंत्री थे | वे सभी बहुत धार्मिक प्रवृति के होने के कारण हमेशा अपने अपने राज्यों में धर्म कर्म के कार्यों में लगे रहते थे | मंदिर बनाना, मंदिर में चढ़ावा कम न हो इसके उपाय करना, भजन कीर्तन करना, ईश्वर को भोग लगाना, सर्दियों में कम्बल ओढ़ाना, रेशमी शाल या चादर चढ़ाना जैसे कामों में ही व्यस्त रहते थे | सम्राट भी बहुत खुश था उनसे और ईश्वर भी बहुत खुश थे उनसे | सभी इतने व्यस्त थे कि जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं था | जनता पर नए नए टैक्स थोपे जाते ताकि ईश्वर और मंदिर की सेवा में कोई कमी न रह जाए | किसान आत्माहत्या करने के लिए विवश थे, जनता भुखमरी और बेरोजगारी से त्रस्त थी उपर से आये दिन बढती महंगाई ने उनकी जिंदगी नरक कर रखी थी |

जनता मंदिरों में भी ईश्वर से अपना दुखड़ा रोती, लेकिन ईश्वर तो कमीशन खा कर अदालत के जज की तरह बहरे हो गये थे, तो उनकी सुनवाई करता कौन | दुनिया भर में सम्राट की जयजयकार होती कि ऐसे ही सम्राट दो चार और हो जाएँ तो हर बैंक मालामाल हो जाए और हर उद्योगपति सुखी हो जाये | ईश्वर भी उनसे खुश रहते कि उनका खजाना हेरा-फेरी के कमीशन से दिन दूनी राज चौगुना बढ़ रहा था… इसी खजाने से ईश्वर एक नयी सृष्टि रचने का प्लान कर रहा था | एक ऐसी सृष्टि जिसमें गरीबों और किसानों के लिए कोई जगह नहीं होगी, केवल धार्मिकों और पूंजपतियो की सृष्टि रहेगी वह……

तो इन्हीं मंत्रियों में कुछ मंत्रियों को डॉक्टर ने अंडे से परहेज बता दिया | बस फिर क्या था, उनमें करुणा फूट पड़ी और उन्हें ब्रह्मज्ञान हुआ कि एक अंडे को खाने से एक जीव की हत्या होती है एक जीव की वंश वृद्धि रुक जाती है और यह एक महापाप है | उन्होंने पूरे राज्य पर अंडे खाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया |

उसी राज्य में एक फ़कीर रहता था, वह मंत्री के पास गया और बोला कि अंडे और आलू में कोई भेद नहीं है | इसलिए आलू खाने पर भी हिंसा होती है और जीव हत्या होती है | आलू भी निर्जीव पदार्थ नहीं होता | इसलिए आलू खाने पर भी प्रतिबन्ध लगना चाहिए |

सारे दरबारी हंसने लगे कि देखो इस मुर्ख को, हम विलायत से डिग्री लेकर यहाँ बैठे हुए हैं और यह जंगल में भूखा नंगा भटकने वाला हमें सिखाने चला आया | मंत्री बोला कि सिद्ध करो जो तुम कह रहे हो वह सही है |

फ़कीर ने एक अंडा और एक आलू मँगवाया और दोनों को उपयुक्त वातावरण व तापमान पर रखवाया | कुछ दिनों बाद अंडे से चूजा निकल आया और आलू से जड़े और पौधा निकल आयीं | अब मंत्री को जब यह दिखाया तो मंत्री आश्चर्य में पड़ गया लेकिन मंत्री कुछ कहता उससे पहले उनका राज पुरोहित बोल पड़ा कि हमारे शास्त्रों में नहीं लिखा है कि आलू खाने से जीव हत्या होती है, इसलिए चाहे यह प्रमाणित हो रहा है कि आलू और अंडे में कोई भेद नहीं है, दोनों में जीवन है लेकिन फिर भी चूँकि शास्त्र में नहीं लिखा है कि आलू में जीवन है, इसलिए हम आलू पर प्रतिबन्ध नहीं लगा सकते | हाँ इस फ़कीर को अवश्य फांसी पर चढ़ा दिया जाना चाहिए क्योंकि इसने शास्त्रों को झूठा सिद्ध करने का प्रयास किया |

तुरंत मंत्री ने जल्लादों को बुलाया और फ़कीर को फांसी पर लटका दिया…. इस प्रकार तब से लेकर आज तक धर्म की रक्षा की जा रही है लाठियों और तलवारों से ताकि कोई दूसरा फ़कीर न पैदा हो जाए उनके राज्य में | ~विशुद्ध चैतन्य

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