“भारत में 19.4 करोड़ लोग भूखे सोने के लिए विवश हैं ।” न्यूज़


हमने न्यूज़ पढ़ी, सुनी, देखी और बोल दिया “कलयुग है भाई ! हर तरफ भ्रष्टाचार है, नेता लूट रहे हैं देश को, अडानी अम्बानी लूट रहे हैं, जनता की कोई सुनवाई नहीं है…..”

अब दिल पर हाथ रहकर कहें कि हम इस भारत माँ के वास्तविक संतान हैं । यह देश मेरा अपना देश है हम कोई आसमान से नहीं टपके हैं पिकनिक मनाने के लिए । यह देश कोई धर्मशाला या सराय नहीं है । और सुनने का प्रयास कीजिये कि क्या उत्तर मिलता है |

अब पता कीजिये कि आप में से कितने ऐसे हैं जो नेताओं की पूँछ पकड़ कर नहीं बैठे हैं ?

आप में से कितने हैं जो मैं सुखी तो जग सुखी के सिद्धांत पर नहीं जीते हैं ?

यदि मंदिरों मस्जिदों में पैसा सोना चांदी दान करके गोदामों में दफनाने की बजाय, उन पैसों से अपने आसपास किसी परिवार को आत्मनिर्भर बनाने में खर्च करें तो क्या ये 19 करोड़ लोगों को भूखे रहना पड़ता ?

आप में से कितने हैं जो हर महीने 100/- रूपए बिना किसी शर्त के बिना किसी पर एहसान जताए, बिना किसी लाभ की आकांक्षा लिए दान कर सकते हैं ? (मैं जनकल्याण, परोपकार.. जैसे कारण भी लिख सकता था । लेकिन तब फिर आपका दान शर्त के अंतर्गत आ जाता है )

उपरोक्त सभी बातें परोपकार और जनकल्याण की हैं । लेकिन मैं अब एक ऐसी बात कहने जा रहा हूँ जो पूरी तरह स्वार्थ, मक्कारी और धोखेबाजी से भरी हुई है;

मेरे आसपास के गाँवों में कम से कम सौ बच्चियां ऐसी हैं जिनकी शादियाँ आर्थिक आभाव के कारण रुकी हुई हैं । अधिकाँश पाँचवी पास भी नहीं हो पाई क्योंकि वे मजदूरी कर रहीं थी तो पढ़ने के लिये स्कूल नहीं जा पाईं । अब मेरा स्वार्थ यह है कि मैं इनकी शादियाँ करवाने में सहयोग करके सुख का अनुभव करना चाहता हूँ । यह पूर्णतः निजी स्वार्थ है ।

मक्कारी इसलिए क्योंकि मैं निकम्मा, निठल्ला और श्रेष्ठ स्तर का कामचोर होते हुए भी निजी स्वार्थ के लिए आप लोगों से सहयोग मांग रहा हूँ । धोखेबाज इसलिए क्योंकि नेताओं की तरह ही मेरा भी कोई भरोसा नहीं  | मैं दान में मिले सारे पैसे स्विस बैंक में जमा करवा दूं । या फिर जिस प्रकार धार्मिक संगठनो ने राम मंदिर बनवाने के नाम पर चन्दा उगाहा और फिर चुनाव और प्रचार प्रसार में उड़ा दिए गए, वैसे ही मैं भी उड़ा दूं ।

अंत में निवेदन है कि पोस्ट को दोबारा पढ़ें फिर कमेंट करें । यदि सहयोग करने के नाम पर धोखा खाने के लिए तैयार हैं या हर महीने सौ रुपये बर्बाद करने के लिए तैयार हैं, तो मेरा फोन नंबर प्रोफाइल में मिल जाएगा या फिर मुझे मैसेज कर दें । वैसे भी न जाने कितने दशकों से महँगाई कम करने के नाम पर नेताओं से धोखा खाते आ रहे हैं, वैसे भी न जाने कितने वर्षों से सरकारी सेवा विभाग आपको धोखा देता आ रहा है अच्छी सर्विस के नाम पर… तो मुझसे धोखा खाने में क्या आपत्ति हो सकता है आप लोगों को ? ~विशुद्ध चैतन्य

नोट: मैं जानता हूँ मंदिरों-मस्जिदों में दान करने पर मान-सम्मान मिलता है । मैं जानता हूँ मंदिरों में सोने का मुकुट चढाने और दरगाहों पर रेशमी चादर चढाने से स्वर्ग और जन्नत की नागरिकता मिलती है और हूरों/अप्सराओं के साथ लक्ज़री अपार्टमेंट फ्री मिलता है जन्नत और स्वर्ग में । यह और बात है कि बेचारी स्त्रियों के लिए स्वर्ग या जन्नत में ऐसी कोई सुविधा नहीं मिलती । मैं जानता हूँ कि आप लोग तो अभी परलोक सुधारने में व्यस्त हैं और केवल निःस्वार्थ सेवा ही करते हैं | इसलिए आप लोगों पर बिलकुल भी दबाव नहीं देना चाहता कि आप एक स्वार्थी की कोई भी सहायता करें |

कुछ सज्जन समझ रहे  होंगे कि पैसे कमाने के लिए इमोशनल ब्लैकमेल कर रहा हूँ, तो उन सभी से कहना चाहता हूँ कि मुझे आप एक रुपया भी मत दीजिये, क्योंकि मुझे या मेरे आश्रम को रुपयों की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं है | हम तो अपने खाने पीने का जुगाड़ आश्रम की खेती से ही कर लेते हैं… आप लोग अपने ही आसपास किसी असहाय की सहायता कीजिये और किसी परिवार या व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनायेंगे तो मेरा यह पोस्ट सार्थक हो जायेगा |

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