क्या भ्रष्टाचारियों, रखैल मीडिया और हत्यारी भीड़ का आचरण ही हिन्दू-धर्म है ?

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हज़ार वर्ष पश्चात् हिन्दू-धर्म के ठेकेदारों को सत्ता मिली और इस सत्ता के नेताओं ने जितने झूठ बोले, जितनी मक्कारियाँ की, जितनी ठगी की जनता के साथ उतनी शायद इनसे पहले के किसी भी शासक ने नहीं की थी | केवल पांच वर्षों में ही इन्होने देश की जनता को जितना ठग लिया, देश जी जनता के साथ जितना विश्वासघात किया, उसे देखकर यह कल्पना करना भी भयावह है कि जिस युग में न तो फेसबुक था, न ट्यूटर था, न इन्टरनेट था, न स्मार्टफोन था, न सर्विलांस कैमरे थे……क्या उत्पात मचाया होगा इन्होंने ?

अब सीबीआई का भ्रष्टाचार उजागर हुआ और भ्रष्टाचारी अस्थाना को बचाने के लिए पूरी जाँच टीम ही बदल दी | सीबीआई के डायरेक्टर ने स्वयं कहा कि सीबीआई एक्सटोर्शन का अड्डा बन चुका है | और जब सीबीआई ही एक्सटोर्शन का अड्डा बन चुका है तो आप समझ सकते हैं बाकि प्रशानिक व न्यायिक तंत्र की क्या दुर्दशा हो चुकी होगी ?

ऐसा नहीं है कि यह कोई नयी बात है, यह सब तो पहले से ही चल रहा है, बस अब खुल कर सामने आ गया | उसपर प्रधानमंत्री द्वारा आरोपी को बचाने के लिए दूसरे भ्रष्ट अधिकारी को चार्ज सौंपना, भ्रष्ट अस्थाना की जांच कर रहे अधिकारीयों का स्थानान्तरण करवाना अस्थाना को बचाने के लिए क्योंकि उसने मोदी को बचाया था गोधरा आरोपों से | और यह सब कर रहे हैं वे लोग, जो स्वयं को हिंदुत्व का ठेकेदार मानते हैं | दुनिया भर के झूठ बोलने वाला, भ्रष्टाचारियों का साथ देने वाला, बैंक डकैतों को विदेश निर्यात करने वाला नेता जिन हिंदुत्व के ठेकेदारों का नेता है, वह हिंदुत्व कितना विकृत होगा इसका अनुमान कोई भी मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति लगा सकता है | क्या भ्रष्ट राजनीती, प्रशासनिक व न्यायिक तंत्र ही हिंदुत्व है ?

Abhisar Sharma on How is the Godi media fooling India on the CBI gang war

मोदी सरकार द्वारा CBI पर वार पर गोदी मीडिया की बेशर्मीYouTube -https://youtu.be/yULD1XVBBWM

Posted by Political Hub on Wednesday, October 24, 2018

क्या हिंदुत्व के ठेकेदार यह सिद्ध करना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार, शोषण, अत्याचार, साम्प्रदायिक उन्माद और मोबलिंचिंग ही हिंदुत्व है ?

……शायद यही है इनका हिंदुत्व और हिन्दू-धर्म और इनके भगवान् ऐसे ही कृत्यों से खुश होते हैं | शायद इनके भगवान् ही रिश्वतखोर हैं, इसीलिए बिना चढ़ावा लिए किसी का कोई काम नहीं करते | शौक भी इनके भगवानों के ऐसे हैं जैसे रिश्वतखोर अधिकारीयों के | इनके भगवान् को आलिशान मंदिर चाहिए, वरना वे बेघर भटकते रहेंगे | देश के विभिन्न भागों में बने मंदिरों में इनके भगवान् नहीं रहेंगे, उसी मंदिर में रहेंगे जो अभी बना नहीं है | कल वह मंदिर बन जाएगा तो कहीं और भाग खड़े होंगे इनके भगवान् और वहाँ टेंट लगाकर बैठ जायेंगे कि यहीं रहना है अब मुझे, मेरा मंदिर बना बना दो नहीं तो मैं बेघर रहूँगा | क्या यही है हिंदुत्व के ठेकेदारों और हिंदुत्व के भगवानों का आचरण ? क्या इसी हिंदुत्व के लिए आसमान सर पर उठा रखा था ?

क्या हिन्दू राष्ट्रभक्त नहीं होते

मैं अक्सर देखता हूँ कि किसी पर किसी स्त्री के शोषण का आरोप लगे तो सारा हिन्दू समाज खड़ा हो जाएगा उसके विरुद्ध, किसी पर बलात्कार का आरोप लगे तो जुलूल निकलने लगेंगे बलात्कारी को फाँसी देने के लिए | लेकिन अपनी ही मातृभूमि का शोषण व बलात्कार करने वालों के विरुद्ध कभी भी हिन्दू एक नहीं होंगे | न ही कोई आवाज निकालेगा | क्यों ?

क्या हिन्दू राष्ट्रभक्त नहीं होते ? क्या इनको अपनी मातृभूमि से उतना प्रेम नहीं, जितना किसी शोषित, बलात्कार पीडिता स्त्री या कन्या से होता है ? क्या भारत माता की जय का नारा लगाने वालों को अपनी माता से उतना प्रेम नहीं, जितना कि किसी अन्य शोषित स्त्री से होता है ? क्या कारण है कि हिन्दू इतना कायर व स्वार्थी हो गया कि भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध आवाज उठाने में स्वयं को असमर्थ पाता है ?

क्या हिन्दुओं के लिए राष्ट्र व नागरिकों के हितों से अधिक महत्वपूर्ण भ्रष्टाचारी राजतन्त्र है ? क्या हिन्दुओं के लिए नागरिकों की सुख समृद्धि से अधिक महत्वपूर्ण वे धर्म के ठेकेदार हैं जो समाज को धर्म व जाति के आधार पर बाँटकर, द्वेष व घृणा फैलाकर अराजकता का वातावरण बनाये रखते हैं और खुद सब को लूटते खसोटते रहते हैं ?

क्या हिन्दुओं के लिए वे हिन्दू मंदिर अधिक महत्वपूर्ण हैं, जो श्रृद्धा व भक्ति के नाम पर जनता को ठगने के लिए बनाए जाते हैं, जिन मंदिरों से मंदिरों के आसपास रहने वाले नागरिकों का तो छोडिये, मंदिर के गेट में बैठे भिखारियों का भी भला नहीं हो पाता | वे भी आजीवन मंदिर के सामने बैठे भीख माँगते मर जाते हैं लेकिन उस मंदिर में बैठा ईश्वर उनकी नहीं सुनता, उन्हें भीख मांगने के धंधे से मुक्ति दिलाकर कोई अच्छा रोजगार उपलब्ध नहीं करवाता | ऐसे मंदिरों का लाभ क्या जो करोड़ों का दान बटोरता है लेकिन अपने आसपास के गाँवों को समृद्ध कर पाने में असमर्थ होता है ? क्यों चाहिए हमें ऐसे मंदिर ?

क्या मंदिर अपने ही देश की जनता को ठगने के लिए बनाये जाते हैं ? क्या यही है हिंदुत्व ?

क्षमा चाहता हूँ, मैं ऐसी मानसिकता को हिन्दू धर्म तो क्या धर्म ही नहीं मानता | मैं ऐसी मानसिकता को अधर्म मानता हूँ क्योंकि मैं सनातनी हूँ | और सनातन धर्म परस्पर सहयोगिता, अधर्म के विरुद्ध विद्रोह का नाम है | ऐसी कोई भी व्यवस्था धर्म नहीं है, जिसमें भ्रष्टाचार को मान्यता मिलती हो, रिश्वतखोरों का सम्मान होता हो, अत्याचारियों, निर्दोषों के हत्यारों का माल्यार्पण होता हो | इसे धर्म की संज्ञा देने वाले या तो मूर्ख हैं या फिर अपराधिक मनोवृति के, जो अपने अपराधों को न्यायोचित ठहराने के लिए ऐसी विकृत व्यवस्था व आचरणों को धर्म की संज्ञा दे रहे हैं |

मेरे इस पोस्ट को पढ़ने वाले यदि वास्तव में राष्ट्रभक्त हैं, तो वे गहन चिंतन मनन करें | मुझे न सिखाएं कि गीता में क्या लिखा है, वेदों में क्या लिखा है, शास्त्रों में क्या लिखा | मुझे न सिखाएं कि कृष्ण ने क्या कहा था, राम ने क्या कहा, विष्णु ने क्या कहा था या ऋषियों ने क्या कहा था | स्वयं पढ़ें और समझें और अपने भीतर झाँकें, कि क्या आप राष्ट्रभक्त हैं ? क्या आप समर्पित हैं राष्ट्र के प्रति और राष्ट्र का हित चाहते हैं ? या फिर आप इन भ्रष्ट, लुटेरे, ठगों के गिरोह के मनगढ़ंत हिंदुत्व के समर्थक हैं और अपने ही देश को लुटेरों के हाथों सौंप देने को हिंदुत्व मान रहे हैं ?

हज़ार वर्ष पहले जिस प्रकार ऐसी ही मानसिकता के लोगों ने देश को विदेशियों के हाथों बेच दिया, उन्हें समर्थन देकर क्या आप पुनः यह सिद्ध करना चाहते हैं कि हिन्दुओं के पास बुद्धि-विवेक का आभाव है ?

~विशुद्ध चैतन्य

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