हम जिस समाज में रहते हैं वह स्वयं सदियों से कमर से ऊपर नहीं उठ पाया

वात्स्यायन और ओशो ही शायद भारत वर्ष में ऐसे महान प्रमाणिक आत्माएँ हुईं, जिन्होंने स्त्री-पुरुष संबंधो को सहजता से लिया और खुल कर चर्चा भी किया | उन्होंने कुछ भी छुपाने का प्रयास नहीं किया | पहले ऋषि मुनि भी कभी प्रणय निवेदन करने में संकोच नहीं करते थे | हिमाचल में चंपावती का मंदिर उत्तर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जिसकी दीवारों पर यौन क्रिया में लिप्त दिखाए गए देवताओं की कलाकृतियां आज भी सुरक्षित हैं। कामुकता की हदें तोड़ती ये कलाकृतियां साहिल बर्मन की बेटी ने बनवाई थी। यह मंदिर हिमाचल के चंबा में है।

चम्पावती मंदिर

चंबा के इतिहास से जुड़े करीब एक हजार साल पुराने चंपावती मंदिर के शिलालेख में ऐसी कलाकृतियां मौजूद हैं जो दक्षिण भारत की खोज खुजराहो से मेल खाती हैं। इन कलाकृतियों में देवताओं को यौन क्रिया में लिप्त दिखाया गया है। इनमें अलग अलग तरीकों से कामुकता की कलाकृतियों को उकेरा गया है। हिमाचल समेत उत्तर भारत में इस तरह का ये इकलौता मंदिर है जहां ऐसी कलाकृतियां बनवाई गई थी। भूरे पत्थर को उकेर कर बनाई गई यह कलाकृतियां मंदिर के मुख्य भाग में मौजूद हैं। मंदिर भी दक्षिण शैली में ही बना है। मंदिर के मुख्य भाग के लिए बने गुबंद में इन कृलातियों का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर का निर्माण राजा साहिल बर्मन के कार्यकाल के दौरान हुआ था।अब सही ढंग से संरक्षण न मिलने की वजह से यह कलाकृतियां खत्म होने की कगार पर हैं। यह ऐतिहासिक मंदिर चंबा शहर के बीचोंबीच मौजूद है। अब यह मंदिर पुरात्तत्व विभाग के अधीन है।

इससे यह तो पता चलता है कि हमारी संस्कृति कभी भी सेक्स के विरोध में नहीं रहीं | ऋषि मुनियों की जो कथाएं हम पढ़ते आ रहे हैं, उसमें भी ऋषियों ने स्त्रियों से कभी परहेज नहीं किया बल्कि वे तो खुला प्रणय निवेदन कर लेते थे, बिना किसी संकोच के | लेकिन समझ में यह नहीं आ रहा कि ब्रह्मचर्य को सेक्स के दमन से किसने जोड़ दिया और कब से जोड़ा गया |

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‘क्या महात्मा गांधी को सचमुच सेक्स की बुरी लत थी?’ इस कहानी को पढने के बाद महात्मा गांधी भी पाखंडी ही सिद्ध हो रहे हैं | महात्मा गाँधी और आसाराम, रामपाल में कोई भेद ही नहीं नजर आ रहा है | लेकिन इस लिंक में एक बात जो बहुत महत्वपूर्ण कही गयी वह यह है, “इतिहास के तमाम अन्य उच्चाकांक्षी पुरुषों की तरह गांधी कामुक भी थे” | अर्थात कामुकता मूलाधार की सक्रियता से जुड़ा हुआ है | जब मूलाधार अधिक सक्रिय होगा तभी कुण्डलिनी ऊपर की ओर उठेगी और व्यक्ति महत्वाकांक्षी बनाएगा, अधिक सक्रिय बनाएगा | हम इतिहास उठाकर देख लें या जेल में यौनाचार के आरोप में बंद प्रतिष्ठित व्यक्तियों को देखें तो सभी समाज की दृष्टि से काम लोलुप थे… वे अय्याश रहे लेकिन सर्वाधिक सक्रिय व सफल व्यक्तियों में गिने जाते रहे | वहीँ हम देखते हैं जिनके जीवन में सेक्स सहज नहीं होता वह हीनभावना से ग्रस्त हो जाता है, या जीवनी उर्जा से रिक्त हो जाता है | जिसके जीवन में सेक्स और प्रेम का संतुलन है वह लगातार सफलता प्राप्त करता जाता है |

मेरा मानना है कि ये ब्रह्मचर्य का पाखंड अब समाप्त होना ही चाहिए क्योंकि ब्रह्मचर्य का अर्थ प्रकृति के विरुद्ध होना नहीं हैं | ब्रह्मचर्य का अर्थ है दमन नहीं बल्कि सहज होना है अपनी भावनाओं और अपनी कामनाओं के प्रति | उग्रता, बलात्कार अवश्य अप्राकृतिक है | गांधी को भी मैं दोषी इसलिए नहीं मानता क्योंकि गांधी ने शायद किसी का बलात्कार नहीं किया | रही नैतिक और अनैतिक की बात तो अब उसके कोई मायने नहीं रहे क्योंकि अब वे इस दुनिया में नहीं है | वैसे भी समाज उसे ही अनैतिक मानता है जो आर्थिक रूप से कमजोर हो या जो  समाज में कोई प्रभावशाली व्यक्तित्व न रखता हो | कुछ समय बाद तो आसाराम और उसका बेटा भी बाइज्जत बरी हो ही जायेंगे | जिनके पास बाहुबल है अर्थ बल है, सत्ता की ताकत है… वे न जाने ऐसे कितने कर्मों में लिप्त होंगे कौन जानता है ?

हर व्यक्ति को यह समझ लेना चाहिए कि दूसरों से मिला सम्मान आपका कभी नहीं हो सकता, यहाँ तक कि मृत्यु के बाद भी | आपने कोई अच्छा काम किया वह कभी भी भुला दिया जा सकता है, लेकिन जिसे समाज बुरा मानता है, लेकिन खुद उसमें लिप्त हैं, वे हर महान व्यक्ति को अपने स्तर तक नीचे लाने के प्रयास में लगे रहेंगे | वे कब्र तक खोद लेंगे कि उसके अंडरवियर में कोई दाग मिल जाए और बता सकें कि वह कोई महान व्यक्ति नहीं था | इसलिए इन झूठे सम्मान के लिए अपने जीवन को व्यर्थ मत करो, यदि सेक्स की आवश्यकता है तो उसे पूरी करिए क्योंकि यदि सेक्स से भागे तो आप ऊपर नहीं उठ पाएंगे |

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हम जिस समाज में रहते हैं वह स्वयं सदियों से कमर से ऊपर नहीं उठ पाया | आप देखेंगे कि किसी भी व्यक्ति को बदनाम करने के लिए स्त्री-पुरुष संबध जो कि प्राकृतिक है, उसी को आधार बनाया जाता है | आज सुनने में आता है कि किसी पर बलात्कार का आरोप लगा है और वह चार पांच साल से किसी महिला का बलात्कार कर रहा था | सुनने में बड़ा अजीब लगता है कि कोई किसी का बलात्कर एक या दो बार ही कर सकता है… चार पांच साल तक निरंतर बलात्कार कैसे हो सकता है ? बाद में पता चलता है कि शादी का वादा किया और मुकर गया इसलिए बलात्कार हो गया | यदि वह शादी के लिए हाँ कर देता तो बलात्कार नहीं, प्रेम हो जाता |

बड़ा ही अजीब है कानून और हमारा समाज |

खैर हम सब कुछ तो बदल नहीं सकते, खुद को ही बदल सकते हैं इसलिए खुद को बदलिए और स्त्री-पुरुष के संबंधो को सहजता से लेना शुरू करिए | ब्रह्मचर्य का ढोंग बंद कर दीजिये | स्त्री की उपेक्षा के साथ ही ब्रह्मचर्य समाप्त हो जाता है क्योंकि स्त्री उसी ब्रह्म का अंश है जिसका पुरुष है | जब तक दोनों एक दूसरे के शत्रु बने रहेंगे, ब्रम्हचर्य घटित हो ही नहीं सकता | स्त्री से दूर होकर आप जो कुछ भी करेंगे वह अप्राकृतिक ही होगा फिर चाहे हस्तमैथुन (Masterbation) ही क्यों न हो | क्योंकि इस क्रिया में भी केवल स्थूल शरीर ही तृप्त होता है कुछ समय के लिए, लेकिन आपका मूलाधार चक्र सक्रीय नहीं हो पाता | हाँ यदि आप ध्यान और योग का अच्छा अभ्यास रखते हैं, तो शायद आप स्त्री या पुरुष की कमी को अनुभव न कर पायें, लेकिन फिर भी सम्पूर्णता तो आएगी नहीं | क्योंकि आपका वर्तुल पूरा नहीं होता और जब तक वर्तुल पूरा नहीं होगा आप ऊपर गति नहीं कर पायेंगे | सम्भोग = सम+भोग अर्थात सहमती व समर्पण भाव से भोग | इसलिए सम्भोग को घ्रणित कार्य न मानकर शुद्ध मन से इसका भोग करें |

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आये दिन यही सम्भोग न जाने कितने को बदनाम कर रहा है, न जाने कितनो को जेल भेज रहा है…. लेकिन जिनके पास ताकत है, सत्ता है, धन है… वे आजन्म इस सुख को भोगते रहते हैं और कोई उनपर आरोप नहीं लगाता |

एक बात और ध्यान में रखें कि कुछ लोग सेक्स के प्रति उदासीन होते हैं, ऐसे लोगों के लिए आजीवन सेक्स से दूर रहने पर भी उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं महसूस होगी | लेकिन ऐसे लोग सामान्य नहीं माने जा सकते, उन्हें अपना आदर्श बनाकर उनकी नकल मत करिए | स्वयं को पहचानिये | स्वयं की भावनाओं को स्वयं समझिये | दुनिया क्या समझाती है उसे भूल जाइए क्योंकि आपके विषय में आपसे बेहतर कोई और नहीं जान सकता | किसी कि महानता को इस बात से मत परखिये कि वह अपने व्यक्तिगत जीवन में क्या करता है या कितनों से उसके शारीरिक सम्बन्ध हैं, बल्कि इस बात से परखिये कि वह समाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण कर रहा है या नहीं | वह किसी पर अत्याचार कर रहा है या नहीं, वह अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार है या नहीं | ~विशुद्ध चैतन्य

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