समाज तो समाज है… जिसके पास पैसा उसी की जय जयकार

यह तस्वीर किसी ‌फिल्म का सीन नहीं है बल्कि ऑस्ट्रेलिया के ड्रग माफिया बेनन की अमीरी का नंगा नाच है। खुद को ड्रग माफिया कहलाने वाले तंबाकू कारोबारी बेनन अपने घर में ज्यादातर वक्त बिकनी मॉडल्स से घिरे रहते हैं। बिकनी मॉडल्ड के अपनी रंगीन पार्टियों की तस्वीरें इंस्टाग्राम में डालने से बेनन देश दुनिया में काफी लोकप्रिय या कहें तो चर्चा में हैं। पहली तस्वीर में बेनेन अपनी पत्नी और किसी मॉडल को कुत्ते के पट्टे से बाँध कर टहलने निकला है |

प्रकृति ने किसी को गुलाम बनाकर नहीं भेजा, लेकिन मानव न केवल खुद गुलाम बना, बल्कि अपने से कमजोरों को गुलाम बनाया भी | जो बातें किसी आम आदमी के लिए अपराध की श्रेणी में आते हैं, वही बातें अमीरों के लिए सभ्यता व आधुनिकता की पहचान बन जाती है | कोई कानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती इनपर और न ही समाज को कोई आपत्ति होती है | यही समाज और कानून आम व्यक्ति को तुरंत सजा सुना देगा या जेल में डाल देगा यदि यही सब कोई आम व्यक्ति करे तो |

आखिर ऐसा होता क्यों है कभी सोचा है ?

मनुष्य हो या पशु हो, अपने ही गुणधर्म व वाइब्रेशन के लोगों के साथ एक विशेष अपनापन महसूस करता है, जिसके कारण ही जाति, धर्म, सम्प्रदाय, वर्ण आदि विकसित होते हैं | यह स्वाभाविक ही है कि हम अपने ही विचारों व स्वाभाव के लोगों के साथ उठना बैठना बोलना पसंद करते हैं | क्योंकि दूसरों के साथ सामान्यतः व्यवहार करना असहज होता है | इसी क्रम में दो समुदाय बन गए शोषकों और शोषितों का | शोषक वे लोग हो गये जिनके पास अत्यधिक धन आ गया, सत्ता आ गयी, प्रशासनिक ताकत आ गयी | और शोषित वर्ग वह हो गया जो इन सब से चूक गया | अब समाज है, लेकिन समाज में दो वर्ग हैं एक शोषकों और उनके समर्थकों का और दूसरा शोषितों और आलोचकों का | शोषकों के अंधभक्तों को ही हम लोग अंधभक्त, दुमछल्ला, चापलूस जैसे सबोधनों से अलंकृत करते हैं | इन्हें कभी भी अपने अराध्य शोषकों में कोई दोष नहीं दिखता, क्योंकि इनका अपना कोई स्वाभिमान व व्यक्तित्व नहीं होता | वास्तव में इनकी अपनी कोई पहचान ही नहीं होती | ये लोग मृत्यु से भयभीत रहते हैं या फिर लोभ में इतने अंधे हो चुके होते हैं कि नैतिक अनैतिक का अंतर ही नहीं पहचान पाते | और आश्चर्य की बात यह है कि इन्हें ही कानून, व समाज की ठेकेदारी मिली होती है, यही लोग संयासी को कैसा होना चाहिए, समाज को कैसा होना चाहिए, किसको किससे मिलना चाहिए और किससे नहीं, तय करते हैं |

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ये लोग जो कुछ हैं अपने धन-बल के कारण ही हैं और इनको धनी बनाने वाले हम ही हैं | हम यानि वह वर्ग जो इनके लिए उत्पादन करता है (किसान) और फिर इन्हीं से खरीदता है, जो उपभोक्ता है लेकिन स्वयं को आम आदमी मानता है, पिछड़ा वर्ग मानता है, शोषित वर्ग मानता है, | ड्रग्स खरीदते हैं हम, जबकि ड्रग्स (दवाएं नहीं) की हमें आवश्यकता ही नहीं है, केवल मौज मस्ती तक ही ठीक है | शराब खरीदते हैं हम, जबकि शराब हमारी आवश्यकता नहीं है | दुनिया भर की उटपटांग चीजें खाते पीते हैं हम, जैसे कि पिज़्ज़ा, बर्गर…. वह भी महंगे वाले…. हम चाहें तो घर में ही बना सकते हैं… लेकिन दिखावा आवश्यक हो गया | तो हमने स्वयं ही अपने खून पसीने की कमाई इन पर लुटाई और यही लोग खुद को सम्राट समझने लगे | जबकि न तो ये कुछ उगाते हैं और न ही प्रकृति को कुछ देते हैं, केवल माध्यम हैं इधर से उधर करने का या फिर सेवक होने का ढोंग करते हैं | इन लोगों का अपना वर्ग जिसमें शासक, न्यायतंत्र, प्रशासनिक तंत्र, पुलिस विभाग, पूंजीपति वर्ग…. आदि आते हैं, आपस में ऐसी एकता व समझ रखते हैं कि हर परिस्थिति में वे एक दूसरे के काम आते हैं | उदाहरण के लिए शक्तिकपुर के केस में, सलमान के केस में… सारा बोलीवूड एक हो गया था | आज भी कितने अपराधिक तत्व सत्ता सुख भोग रहे हैं क्योंकि न्यायतंत्र उनकी अपनी ही बिरादरी का है | यदि इनमें से कोई बलात्कार या हत्या के आरोप में भी धरा जाए, तो ये पूरा वर्ग एक हो जाता है और गवाहों को प्रताड़ित करने, धमकाने से लेकर हत्या तक करवाने में संकोच नहीं करता | तो कानून भी जनता को मुर्ख बनाने के लिए ही होते हैं, वास्तव में कानून नाम की कोई चीज होती नहीं है | जो काम आम आदमी के लिए अनैतिक है, वही काम पूंजीपतियों और उच्च सभ्रांत कहे जाने वाले वर्ग के लिए नैतिक हो जाता है, जैसे ‘वाइफ स्वैपिंग गेम’ |

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चूँकि हम संगठित नहीं हो पाते क्योंकि कोई ब्राह्मण है, तो कोई शुद्र है, कोई कलर्क है तो कोई उसका बॉस….. ये शोषक वर्ग हमको आपस में ही उलझाये रखते हैं और इनके चमचे इस बात का ध्यान रखते हैं कि कहीं लोग संगठित न हो जाएँ | ये चमचे हर जगह वाइरस की तरह चुपचाप बैठे रहते हैं… कई तो अभी इस पोस्ट को भी पढ़ रहे होंगे | फिर ये लोग देखेंगे कि कितने लोग लाइक कर रहे हैं और क्या कमेन्ट में कह रहे हैं | यदि अधिक लोग पोस्ट के समर्थन में हो गये तो फिर ये लोग उपद्रव शुरू कर देंगे और पूरा प्रयास करेंगे कि अपमानित करके या डरा धमका कर सबको दूर किया जाए……

और फिर समाज तो समाज है… जिसके पास पैसा उसी की जय जयकार | फिर वह सही करे या गलत करे, फिर वह अपने देश का पैसा विदेश में लुटाये या फिर देश ही बेच खाए….. समाज तो केवल बच्चे पालने, और जैकारा लगाने के लिए ही होता है |

अगर आपने यहाँ तक पढ़ लिया है तो आपके हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी ! ~विशुद्ध चैतन्य

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