कायरों का जीवन भी कोई जीवन होता है ?

मृत्यु का भय व्यक्ति को कायर बना देता है | यही वह भय है जिसके कारण मानव उन्नत नहीं हो पा रहा और भेड़ों-बकरियों सा जीवन जी रहा है | यही वह भय है जिसके कारण कुछ मुर्ख अपराधिक प्रकृति के मुट्ठी भर लोग सारी मानवजाति को गुलाम बनाकर रखे हुए हैं | और आश्चर्य तो तब होता है जब वृद्धों को मृत्यु से भयभीत अधिक देखता हूँ |

यह ठीक है कि मुझे बचपन से ऐसे माता-पिता का साथ मिला जो कायर नहीं थे, जिन्हें हर कठिन से कठिन परिस्थिति में निडरता से अपने कर्तव्यों के पालन का गुण था….. यह भी ठीक है कि मुझे भी कभी कभी अपनी मृत्यु का भय लगता है लेकिन उतना नहीं कि मुझे किसी से समझौता करना पड़े | उतना कभी भी भयभीत नहीं हुआ कि किसी ने मृत्यु का भय दिखाकर मुझे कोई अनैतिक कार्य करवा लिया हो | मेरा भय केवल इतना ही है कि समय से पहले मृत्यु हो जाने पर मेरा कार्य तब तक के लिए रुक जाएगा जब तक कि अगले जन्म में वही कार्य पुनः करने न लग जाऊं |

अब जो लोग भयभीत हैं मृत्यु से, वे लोग न तो ईश्वर को मानते हैं और न ही पुनर्जन्म को, जबकि आज तो वैज्ञानिक प्रमाण भी उपलब्ध हैं पुनर्जन्म के | जो लोग भयभीत हैं मृत्यु से वे लोग आत्मा अमर है के सिद्धांत को भी नहीं मानते | जो लोग भयभीत हैं मृत्यु से वे लोग हिन्दू नहीं हो सकते क्योंकि हिन्दू धर्म की मूल धारणा यही है कि मृत्यु और निद्रा में इतना ही अंतर है कि निद्रा के बाद हम उसी शरीर में उसी स्थान पर लौटते हैं, जबकि मृत्यु के बाद नए शरीर में नए स्थान पर |

READ  हर विभाग में भ्रष्ट नेताओं व अधिकारीयों को प्राथमिकता मिलती है

फिर हम मृत्यु के भय से कुछ मूर्खों के गुलाम क्यों बने हुए हैं ? फिर हम खुद को शोषित क्यों होने दे रहे हैं ? फिर हम अपनी ही भूमि की रक्षा क्यों नहीं कर पा रहे ? फिर हम अपनी ही सरकारी सेवाओं को सुचारू रूप से क्यों नहीं चलवा पा रहे ?

आज बीएसएनएल हमें सही सेवा नहीं दे रहा तो हम तुरंत निजी सेवाएं लेने लगते हैं | आज रेलवे का भी निजीकरण होने जा रहा है | हर वह सेवा जो हमसे टैक्स लेकर शुरू किये गये, हर वह प्रशासनिक अधिकारी जो हमारे ही दिए टैक्स से वेतन पाता है और हमें ही आँख दिखाता है, हम उनको अधिकार पूर्वक क्यों नहीं कह पाते कि हम निजी सेवाएं नहीं लेंगे, लेकिन तुम्हें सरकारी सेवाओं से मुक्त अवश्य करवाएंगे ?

केवल मृत्यु के भय से ? केवल झूठे आरोपों और कोर्ट कचहरी के भय से ? हमारी यही कायरता आज न्याय व्यवस्था को आय व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया | आज गवाहों की हत्या खुलेआम की जा रही है और हम खामोश बैठे हुए हैं | आज अपराधी धन बल के दम पर छुट जाते हैं और हम खामोश बैठे हुए हैं | क्या इसे आप लोग जीवन कहते हैं ? कायरों का जीवन भी कोई जीवन होता है ?

जरा सोचिये आपकी ये कायरता आपकी आने वाली पीढ़ी को कैसी दुनिया देकर जायेगी !!~विशुद्ध चैतन्य

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of