हर वह व्यक्ति राष्ट्रद्रोही है जो धर्म या पंथ को आधार बनाकर द्वेष रखता है

जिस भारत को हिन्दू-मुस्लिम और दलितों ने कंधे से कंधे मिलाकर, आपसी भेदभाव भूलकर, न जाने क्या क्या जुल्म सहकर और अपनों को खोकर प्राप्त किया, वह आज केवल ब्राह्मणों का देश कैसे हो गया ?

ये ब्राह्मण तब क्या कर रहे थे जब मुगलों ने आक्रमण किया था ? तब क्या कर रहे थे जब अंग्रेजों ने गुलाम बना लिया देश को ? केवल ब्राह्मण ही नहीं, वे साधू-समाज क्या कर रहे थे जो आज ज़हर बुझे वक्तव्य दे रहे हैं ?

आज अखंडता की बात कर रहे हैं, तब कहाँ थे, जब देश खंडित हो रहा था ?

आज आरएसएस राष्ट्र के एक मात्र हितैषी हो गये, ये लोग तब कहाँ थे जब हिन्दू और मुस्लिम अंग्रेजों से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहे थे ?

सबने मिलकर कुर्बानियां दी और आज फिर देश में भेदभाव की दीवारें कैसे खड़ी हो रहीं हैं ? जो भी हिन्दू और मुस्लिम देश में नफरत के बीज बोने के कारोबार में लगे हुए हैं, कभी सोचा है कि तुम्हारा उपयोग केवल मोहरे के रूप में किया जा रहा है | और यदि मेरी बात समझ में नहीं आ रही तो जाकर देख लो उन लोगों की हालत, जो भारत से अलग हो गये थे कभी, आज उनमें से कितने लोग भारत में शरणार्थी बने पड़े हुए हैं |

जिस दिन तय कर लोगे कि हम आपस में एक दूसरे का सम्मान करेंगे और ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे दूसरे की भावनाओं (कट्टरपंथी, अंधभक्त धर्मों के ठेकेदारों की भावनाओं की बात नहीं कर रहा) को ठेस पहुंचे तो उस दिन कोई नेता या नेता का पिट्ठू फूट नहीं डलवा पायेगा | और जिस दिन हमारे बीच पड़ी नफरत की दीवार गिर जायेगी, उस दिन हम से ताकतवर विश्व में कोई नहीं होगा और न ही कोई होगा हमसे अधिक समृद्ध | 

The two major communities, which formed 97 per cent of Indian population, fought together against the British in the beginning. The British realised the ‘danger’ of this unity, and tried to weaken it by playing ‘divide and rule’ policy. They helped Hindu extremists like Hindu Mahasabha, the forerunner of present BJP, RSS, Bajrang Dal and the like. In the book titled Indian Struggle for Independence it is stated: “The nationalist movement and the Hindu-Muslim unity took giant steps forward after the World War I during the agitation against Rowlatt Acts, and the Khilafat and the Non-cooperation Movements. As if to declare before the world the principle of Hindu-Muslim unity in political action Swami Shradhanand, a staunch Arya samajist, was asked by Muslims to preach from the pulpit of Jama Masjid at Delhi, while Dr. Siafudeen Kichlu, a Muslim, was given the keys to the Golden Temple, the Sikh Shrine at Amritsar. The entire country resounded to the cry of ‘Hindu-Muslim ki Jai”. (Bipin Chandra, et al, P.421). -courtesy: Radiance

कितनी भी धर्म-कर्म और त्याग की बातें कर लो, केंद्र में एक ही स्वार्थ है और वह है सुख की प्राप्ति | स्वर्ग, जन्नत, हूरें या अप्सराएं… सभी कुछ वह लालच है जो हमें इस भ्रम में रखती हैं कि मरने के बाद हमें वह सब मिलेगा… लेकिन वास्तव में ऊपर ऐसा कुछ नहीं है | जो कुछ है यहीं है इसी शरीर में रहते हुए ही भोगा जा सकता है, जब शरीर ही नहीं रहेगा तो फिर हूरें मिलें या अप्सराएं… क्या लाभ होगा ? जरा कल्पना करिए कि बिना शरीर के सुख भोगेंगे तो भोगेंगे कैसे ?

इसलिए इस राष्ट्र को ही स्वर्ग और जन्नत बना दीजिये मिलकर | आपस में सहयोगी हो जाईये | आपके पड़ोस में कोई दुखी है तो उसका दुःख दूर करने का प्रयास कीजिये, बिना यह देखे कि उसका धर्म या जाति क्या है | आप देखिये किसी नेता या धर्म के ठेकेदार की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी इस देश को समृद्ध करने के लिए | वैसे भी ये ठेकेदार कभी किसी गरीब या पीड़ित की सहायता नहीं कर पाये.. इतिहास उठाकर देख लीजिये | ये लोग अपनी कुर्सी और सत्ता में ही उलझे रहे आदिकाल से |

कोई भी संगठन कितना ही ताकतवर क्यों न हो, विक्टोरिया साम्राज्य की तरह सिमट जाएगा एक कोने में यदि उसने नफ़रत के कारोबार को शह दिया | इतिहास उठाकर देख लीजिए सारे आतताई दफ़न हो गये फिर हिटलर हो या ओसामा | इसलिए नफरत के सौदागरों को अनफ्रेंड करना शुरू कर दीजिये आज से ही चाहे फेसबुक से ही शुरू कर दें यदि वास्तविक जीवन में डर लगता है |

मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि मेरे लिए हर वह व्यक्ति राष्ट्रद्रोही है जो धर्म या पंथ को आधार बनाकर द्वेष रखता है और दूसरों के खान-पान पर छींटा-कशी करके दूसरे को हीन सिद्ध करने का प्रयास करता है | फिर वह स्वयं ईश्वर या अल्लाह ही क्यों न हो | जो कुछ लिखता हूँ अपने पोस्ट पर इन धर्मों के ठेकेदारों और स्वयंभू राष्ट्र के मालिकों के विरुद्ध उसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ और यदि अपने इन लेखों के लिए कल किसी सरफिरे के हाथों मारा भी गया या कानून ही कोई सजा सुनाये तो रत्ती भर भी दुःख नहीं होगा, क्योंकि कई जन्म पड़े हैं मेरे पास इस तरह लिखने के लिए | यदि आप मेरे लेख पढ़ने के लिए जुड़े हैं मुझसे तो स्वागत है लेकिन यदि आप मुझे भटकाने या धमकाने के उद्देश्य से जुड़े हैं तो आप गलत पते पर आ गये हैं | ~विशुद्ध चैतन्य

 

नोट: हिन्दू, मुस्लिम और दलित इसलिए लिखा क्योंकि दलितों की चिंता न हिन्दुओं को है और न ही मुस्लिमों को आज | दलितों को मरने के लिए छोड़ दिया उद्योगपतियों और नेताओं के हाथों |

READ  महानुशासन

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of