भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र क्यों घोषित किया गया ?

भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने के पीछे विद्वानों की दूरदर्शिता व इतिहास से प्राप्त शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान रहा | विद्वान् यह अच्छी तरह से जानते थे कि सम्प्रदाय धर्म नहीं है लेकिन समाज सम्प्रदाय को ही धर्म मानकर चलेगा | और साम्प्रदायिकता भारत जैसे सर्वधर्म समभाव आधारित देश के घातक होगा | इसीलिए ही सम्प्रदाय को ही धर्म मानते हुए संविधान में भारत को धर्मनिरपेक्ष घोषित किया गया | ताकि साम्प्रदायिक ताकतें भारत में हावी न होने पायें |
 
साम्प्रदायिक भाजपा सरकार आने के बाद भारतीयों को यह समझने में सहजता हुई कि संविधान निर्माता मूर्ख नहीं, बल्कि बहुत ही सुलझे हुए थे | उन्हें इस बात का पहले से ही पता था कि एक न एक दिन ऐसा होगा कि कोई न कोई साम्प्रदायिक मानसिकता का शासक सत्ता में पहुँचेगा | और वह भी जनता की अपनी मूर्खता व कूपमंडूक मानसिकता के कारण | वे जानते थे कि जनता को कितनी भी अंग्रेजी सिखा दो, रहेंगे वे कूपमंडूक के कूपमंडूक ही और धूर्तों को सौंप देंगे सत्ता किसी दिन | इसलिए ही संविधान को पहले से ही ऐसा बनाया गया कि कोई भी कितना ही उत्पाती सत्ता में आ जाए, उसे उतारा जा सके, जिस दिन जनता के होश ठिकाने आ जाये |
 
साम्प्रदायिक पार्टी या शासक दिमाग से कितने पैदल होते हैं, वह वर्तमान शासकों को देखकर स्वतः ही समझ में आ जाता है | इन्हें चिंता नहीं होती किसानों की | जब किसान आन्दोलन कर रहे होते हैं, तब शासक कहीं विदेश घुमने निकल जाते हैं या किसी विश्व सुंदरी को सुखद वैवाहिक जीवन के गुर सिखाने पहुँच जाते हैं | इन्हें चिंता नहीं होती किसी पुलिस अधिकारी की मृत्यु की | शहीद हुए अधिकारी का जिक्र तक करना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं | शहीद के हत्यारों को पकड़ने में कोई रूचि नहीं, लेकिन गौकशी के आरोपी जिनमें से दो 10-11 साल के बच्चे हैं और अधिकांश नाम फर्जी हैं, पर बहुत रूचि है |
 
साम्प्रदायिक धार्मिकों की रूचि नहीं होती देश व राज्यों के हितों में, उन्हें रूचि होती है मंदिर-मंदिर खेलने में, हिन्दू-मुस्लिम खेलने में, सवर्ण-दलित खेलने में |
 
साम्प्रदायिक नेता या संगठन जब भी सत्ता में आएगी, वह स्कूलों की बात नहीं करेगी, वह अस्पतालों की बात नहीं करेगी, वह शिक्षा की बात नहीं करेगी, वह सार्वजनिक सेवाओं में रूचि नहीं लेगी, बल्कि सभी सरकारी संस्थाओं को ठप्प करके अपने आकाओं के सुपुर्द करने में रूचि लेगी | देश को पूरी तरह निजी कंपनियों के हाथो में सौंपकर देश के नागरिकों को गुलाम बना देने की जुगत लगाएगी |
 
इसलिए ही संविधान निर्माताओं ने भारत को साम्प्रदायिक नहीं, धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया था | यह बात देश के नागरिक जितनी जल्दी समझ लें, उतना ही अच्छा |
 
~विशुद्ध चैतन्य

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