मृत्यु से भयभीत…..

मृत्यु से भयभीत सबसे अधिक वे लोग होते हैं,
जो स्वर्ग, मोक्ष, जन्नत, हूरों की तमन्ना रखते हैं |
मृत्यु से भयभीत सबसे अधिक वे लोग होते हैं
जो कहते है आत्मा अमर है, जगत मिथ्या है
मृत्यु से भयभीत सबसे अधिक वे लोग होते हैं,
जो कहते हैं अल्लाह/ईश्वर की मर्जी के बगैर कुछ नहीं होता
मृत्यु से भयभीत सबसे अधिक वे लोग हैं,
जिनका सर ईश्वर/अल्लाह के सिवाय किसी के आगे नहीं झुकता |
मृत्यु से भयभीत सबसे अधिक वे लोग होते हैं,
जो हर रोज आसमानी, हवाई, धार्मिक किताबें पढ़ते हैं |
मृत्यु से भयभीत सबसे अधिक वे लोग होते हैं,
जो मंदिर-मस्जिद, हिन्दू-मुस्लिम, सवर्ण-दलित खेलते हैं
मृत्यु से भयभीत सबसे अधिक वे लोग होते हैं,
जो साकार/निराकार ईश्वर को सबसे अधिक ताकतवर मानते हैं

लेकिन मृत्यु से भयभीत नहीं होता वह अधार्मिक,
जो धर्म और जाति के नाम पर नफरत फैलाता है |
मृत्यु से भयभीत नहीं होता वह अधार्मिक,
जो धर्म व जाति के ठेकेदारों का गुलाम होता है |
मृत्यु से भयभीत नहीं होता वह अधार्मिक,
जो दुनियाभर के घोटालेबाजों का साथ देता है |
मृत्यु से भयभीत नहीं होता वह अधार्मिक
जो दंगा-फसाद करता है, निहत्थों की हत्याएं करता है


ढोंगी और कायर हैं वे सभी धार्मिक,
जो अधर्म के विरुद्ध आवाज तक उठाने से डरते हैं |
ढोंगी और कायर हैं वे सब,
जो अन्याय व अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने से भी डरते हैं |
ढोंगी और कायर हैं वे सब,
जिनपर कुछ सड़क छाप गुंडे मवाली शासन करते हैं |
छोड़ दो ये धार्मिक होने का ढोंग, क्योंकि तुम लोगों से बड़ा कायर और अधर्मी इस जगत में और कोई नहीं |

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~©विशुद्ध चैतन्य

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