समस्याओं का समाधान नहीं है सत्ता-परिवर्तन

Landmafia

दायाँ हाथ जीते या बायाँ
काँग्रेस जीते या भाजपा
हार होगी जनता की
और जीत होगी
माफिया, घोटालेबाजों की
अडाणी और अम्बानी की

Land Mafia

रिपोर्ट में दावा- अडानी को ज़मीन देने के लिए झारखंड सरकार ने तोड़े नियम, मर्जी के खिलाफ खेतिहर जमीनों का अधिग्रहण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गांव वालों का आरोप है कि उनके दर्द को किसी ने महसूस नहीं किया है। सभी सरकारी दफ्तरों और राज्यपाल को भी चिट्ठी लिखी। लेकिन, कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। कंपनी के कर्मचारियों ने उनकी खड़ी फसलें तबाह कर दी। जबकि, उन्होंने कई महीनों तक दिन-रात मेहनत करके उसे सींचा और बोया था। फसल उजड़ जाने से वह दाने-दाने के लिए मोहताज हैं।

आरोपों के मुताबिक झारखंड की सरकार ने नियमों की अनदेखी करते हुए गोड्डा ज़िले के माली (आदिवासी गांव) और इसके आसपास के गावों की खेती योग्य भूमि अडानी समूह की एक कंपनी को दे डाली। इस दौरान संशोधित भूमि अधिग्रहण कानून का बड़े स्तर पर उल्लंघन किया गया। 2016 से शुरू हुआ यह  मामला आज की तारीख़ में ज्वलंत हो चुका है। इस केस को लेकर मई, 2016 में  प्रदेश की बीजेपी सरकार द्वारा आदिवासियों से संबंधित कानून में संशोधन भी सवालों के घेरे में है। क्योंकि, अडानी ग्रुप ने जिन जमीनों का अधिग्रहण किया है, वे सभी आदिवासी बहुल गांवों की हैं।  गांव वाले आज भी अपनी खोई हुई खेतीहर ज़मीन को पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इंडियास्पेंड समेत तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में प्रशासनिक मिलीभगत के जरिए ग्रामीणों की जमीन हथियाने की बात कही गयी है।

साभार: जनसत्ता

क्या हम माफ़ियायों के दलाल को वोट नहीं दे रहे ?

जनता कभी नहीं पूछेगी राजनैतिक पार्टियों से, कि पाँच वर्षों में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कितना लूटा और कहाँ छुपाया । ये पाँच-पाँच वर्षों की पारी खेलेंगे और लूटकर निकल लेंगे ।

कल रात ही एक भावी एम्पी (सांसद) का फोन आया मेरे पास | कहा कि इस बार मैं एम्पी प्रत्याशी के रूप में खड़ा हुआ हूँ और सौ प्रतिशत सम्भावना है मेरी ही जीत की | अतः आप अपने जानकारों को अवश्य जानकारी दे दीजिये ताकी यदि उन्हें कोई टेंडर आदि चाहिए, कोई सरकारी काम करवाना हो तो चुनाव में मुझे आर्थिक योगदान दें, आवश्यक फण्ड उपलब्ध करवाएं | जीतने के बाद उनकी हर प्रकार की सहायता करूँगा |

यदि प्रत्याशी पहले ही यह तय कर ले रहा है कि वह उसे ही टेंडर आदि उपलब्ध करवाएगा, जो चुनाव जीतने में उसकी आर्थिक सहायता करेगा | तो आप स्वयं समझ सकते हैं कि हम चुन किसे रहे हैं ? हम वोट किसे दे रहे हैं ?

क्या हम माफ़ियायों के दलाल को वोट नहीं दे रहे ? क्या ये दलाल जनहितैषी हो सकते हैं कभी ? क्या या जनता के आँसू पोंछ सकते हैं कभी ?

नहीं ऐसे नेता वे दलाल हैं जो स्त्रियों की भावुकता का शोषण करते हैं, उन्हें बहला फुसलाकर ले जाते हैं कि तुम्हे अच्छी नौकरी दिलाऊंगा, या तुमसे विवाह करूँगा, तुम्हे सुखी रखूँगा….और ले जाकर कोठों में बेच आते हैं चंद रुपयों में | ये तो चुनाव में खड़े होने से पहले ही बिक चुके होते हैं, तो भला ये बिके हुए नेता और रखैल जनता या देश का भला कैसे कर पायेंगे ?

नेता व पार्टियाँ क्या जनसेवक होते हैं ?

और जो नेता और पार्टियाँ पहले ही खुद को बेच चुके होते हैं, रखैल हो चुके होते हैं किसी माफिया, अपराधी या पूंजीपति के, वे प्रजा के सेवक कैसे हो सकते हैं ?

प्रजा तो इनके लिए वोटबैंक होते हैं, बलि के पशु-पक्षियों से अधिक महत्व नहीं होता प्रजा का |हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद, सवर्ण-दलित के नाम से आपसे में लड़ाने के काम आती है प्रजा….बाकि इन नेताओं और पार्टियों का जीवन अपने मालिक को खुश करने में ही बीत जाता है |

हाँ कुछ बदलाव अवश्य हो सकता है, यदि सत्तापक्ष के हारे हुए नेताओं की समृद्धि के रहस्यों को खोजा जाए । यदि हर वर्ष सत्ता पक्ष के नेताओं से काम का लेखा जोखा बिल्कुल वैसे ही लिया जाए, जैसे मालिक मैनेजर से लेता है । क्योंकि मालिक देश की प्रजा है कोई राजनैतिक पार्टी नहीं । तब कुछ हद तक समस्याओं का समाधान होना शुरू हो सकता है

और लोकतंत्र प्रजा और प्रतिनिधि का संबंध है प्रजा और शासक या पार्टियों का नहीं । भारतवर्ष स्वयं एक पार्टी है और हर भारतीय सदस्य है उसका । संसद भवन केन्दीय कार्यालय है भारतीयों के प्रतिनिधियों का । तो ये पार्टियाँ मालिक कब से और कैसे हो गयीं भारतीयों की ?

और क्या पार्टियों को बदलते रहने से समस्याओं का समाधान हो जाएगा ?

समस्याओं का समाधान होगा कैसे ?

सत्ता परिवर्तन से समस्याओं का कोई समाधान नहीं होता यह पिछले चार वर्षों के इतिहास से अच्छी तरह समझ में आ चुका है | व्यवस्था परिवर्तन की आवश्यकता है और व्यवस्था परिवर्तन में सबसे प्रमुख हैं:

  1.   सार्वजनिक (सरकारी) धन का दुरूपयोग, हेरा-फेरी, या गबन (घोटाला) राष्ट्रद्रोह माना जाए | वेतनभोगी द्वारा अपने ही दायित्वों को निभाने के लिए जन साधारण से अतिरिक्त धन यानि रिश्वत लेना या अपने पद का दुरूपयोग करने के लिए धन लेना राष्ट्रद्रोह माना जाए | और दोषी पाए जाने पर उनकी सम्पत्ति जब्त कर देशनिकाला या मृत्युदंड दिया जाए |
  2. धर्म या जाति के आधार पर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना, किसी के धार्मिक स्थलों पर उत्पात मचाना या तोड़-फोड़ करना, समाज में धर्म व जाति के आधार पर वैमनस्यता, घृणा या द्वेष फैलाना राष्ट्रद्रोह माना जाए |
  3. सभी साम्प्रदायिक द्वेष व घृणा से भरे हुए संगठन व दल, हिन्दू देवी देवताओं के नाम पर बने गुंडे-मवालियों, लुच्चे लफंगों की सेनाओं व दलों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाए और भविष्य में ऐसी कोई संगठन, दल या सेना खड़ी न हो पाए यह सुनिश्चित किया जाए |
  4. पुलिस व्यवस्था, कार्यशैली, ट्रेनिंग व ड्रेस में विस्तृत परिवर्तन किया जाए और भारतीय परिवेश व संस्कारों के अनुसार उन्हें तैयार किया जाए | पुलिस को नागरिकों का हितैषी बनाया जाये न कि अपराधियों और अपराधिक छवि के नेताओं का रखैल बनने के लिए विवश किया जाए |
  5. ऐसे नेता व अधिकारी  जो जनहित से अधिक महत्व किसी माफिया या पूंजीपति को दे रहा हो, उसपर कड़ी निगरानी रखी जाए | और जनता या देश के विश्वासघात करते हुए पाए जाने पर उन्हें मृत्युदंड या देश निकाला दिया जाए, उसकी संपत्ति जब्त करके |
  6. सभी सरकारी स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों को पूर्ण निःशुल्क किया जाए और उन्हें इतना उन्नत बनाया जाये कि उनसे बेहतर सुविधा किसी भी निजी संस्थानों में न मिल सके |

आपके सुझाव आमंत्रित हैं

~विशुद्ध चैतन्य

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